खबर लहरिया Blog UP/Electricity: रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति के दावों के बीच गांवों में अंधेरा क्यों? 

UP/Electricity: रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति के दावों के बीच गांवों में अंधेरा क्यों? 

सरकार और यूपीपीसीएल के अनुसार बीते 14 और 15 जून 2026 को प्रदेश बिजली मांग पूरी करने के मामले में देश में पहले स्थान पर रहा। 16 जून 2026 को 30,760 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग पूरी की गई। इससे पहले 15 जून को 29,579 मेगावाट और 14 जून को 29,571 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की गई।  

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: एआई)

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी इस समय अपने चरम पर है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बनाए जा रहा है जिससे लोगों का आम जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार और यूपीपीसीएल के अनुसार बीते 14 और 15 जून 2026 को प्रदेश बिजली मांग पूरी करने के मामले में देश में पहले स्थान पर रहा। 16 जून 2026 को 30,760 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग पूरी की गई। इससे पहले 15 जून को 29,579 मेगावाट और 14 जून को 29,571 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की गई। बिजली आपूर्ति के आकंडे बताते हैं कि प्रदेश में तमिलनाडु, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। 

हालाँकि इन उपलब्धियों के बीच यह सवाल भी उठता है कि जब प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है तब भी कई ग्रामीण यहां तक की शहरी इलाकों में भी लोग घंटो बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। इस मामले पर खबर लहरिया द्वारा कई ग्राउंड रिपोर्टिंग किया गया है जिसमें भीषण गर्मी के बीच कई जगहों पर लोगों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है जिससे आम जीवन परेशानियों के साथ गुजर रही है। 

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश 2026-27 तक 33,033 मेगावाट पीक विद्युत मांग के साथ देश का दूसरा सर्वाधिक बिजली मांग वाला राज्य बनेगा 

प्रदेश में 25 मई को 31,824 मेगावाट की अधिकतम मांग दर्ज की गई थी जो कुछ समय के लिए 30,000 मेगावाट के आँकड़े को भी पर कर गई थी। वहीं राज्य का कुल संयोजक भर 8 करोड़ 57 लाख किलोवाट से अधिक है जबकि सब स्टेशनों की क्षमता 6 करोड़ 25 लाख 76 हजार किलोवाट है। राज्य विधुत उपभोक्ता परिषद ने भी मांग की गई है कि उपभोक्ताओं के स्वीकृत भार के अनुरूप बिजली व्यवस्था को मजबूत किया जाए। 

ऐसे में सवाल यह है कि रिकॉर्ड बिजली की आपूर्ति के दावों के बावजूद क्या प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं तक सामान रूप से बिजली पहुंच पा रही है? जिन इलाकों में अब भी बार-बार बिजली कटौती हो रही है वहां के लोगों के लिए आँकड़ों से ज़्यादा मायने नियमित और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति रखती है। 

ग्राउंड रिपोर्ट से जमीनी हकीकत का हाल 

– चित्रकूट के मऊ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सुरौधा और भिटारी गांवों में पिछले लगभग 15 दिनों से ट्रांसफार्मर जला पड़ा रहा। खबर लहरिया से बात करते हुए स्थानीय निवासी गीता देवी ने बताया कि “दिन में तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात में छोटे बच्चे गर्मी से रोते रहते हैं। खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है, मोमबत्ती की रोशनी में किसी तरह काम चलाना पड़ता है। रात के समय कीड़े मकोड़े का भी डर रहता है किसी को काट ले तो दवा कराने का खर्चा अलग।” 

Chitrakoot News: चित्रकूट में गर्मी में जला ट्रांसफार्मर, 15 दिनों से बिजली नहीं लोग परेशान 

बांदा जिले के मलेहरा निवादा में पिछले लगभग 25 दिनों से बिजली नहीं आई। यह बस्ती दलित बस्ती है और इस दलित बस्ती सहित लगभग 350 घरों की बिजली बाधित है। दलित बस्ती सहित करीब 350 घरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। 

UP/Banda: दलित बस्ती में 25 दिनों से नहीं है बिजली

– पिछले दिनों (27 मई) कई राज्यों समेत उत्तर प्रदेश में भी जमकर आंधी तूफ़ान आया था जिसमें उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला भी शामिल है। तेज आंधी तूफ़ान के कारण बिजली कट गई, तार टूट गए रास्ते बंद हो गए थे और अब इसे एक सप्ताह हो गए हैं लेकिन कई गावों में अब भी बिजली व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई। 

UP/No Electricity: यूपी के कई गांवों में अब भी नहीं पहुंची बिजली, 25 गांव में अब भी बिजली गुल

– उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के जसपुरा ब्लॉक अंतर्गत नरायढ गांव में आंधी-तूफान के बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिनों से गांव में बिजली नहीं पहुंची है और टूटे हुए खंभों व तारों की मरम्मत भी नहीं हुई है।

– उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के तिंदवारी ब्लॉक में 27 मई 2026 की रात आए तेज आंधी-तूफान ने कई गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया। बिजली के खंभे और ट्रांसफॉर्मर टूटकर गिर गए जिससे कई गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।

– उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ क्षेत्र स्थित सेसासुबकरा गांव में पिछले एक महीने से बिजली नहीं। 38 से 40 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में ग्रामीण परेशान। दिनभर लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदी किनारे बैठकर समय गुजार रहे।

– उत्तर प्रदेश में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी। प्रयागराज, वाराणसी, मेरठ, बाँदा और लखनऊ में पिछले 2-3 दिनों से रात-दिन बिजली गुल रहने की खबर सामने आई।

Power cuts in UP: यूपी में भीषण गर्मी में बिजली कटौती से झुलसता बांदा

यदि प्रदेश लगातार तीस हजार मेगावाट से अधिक बिजली की मांग पूरी कर रहा है तो फिर ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ कई शहरों में भी लोग घंटो बिजली कटौती झेलने को मजबूर क्यों हैं? अलग-अलग जिलों से की गई ग्राउंड रिपोर्ट से यह सामने आता है कि कहीं ट्रांसफार्मर कई दिनों से जले पड़े हैं, कहीं आंधी तूफ़ान के बाद टूटे बिजली के खंभों और तारों की मरम्मत नहीं हुई है तो कहीं पूरी बस्तियाँ हफ़्तों से अंधेरे में रह रहे हैं। ऐसे में क्या बिजली का आकलन केवल राज्य स्तर के आँकड़ों से किया जा रहा है जबकि गांवों और दूरदराज के इलाकों की समस्याएँ इन आकंडों में कहीं छिप जाती हैं? 

इस समय बिजली की समस्या देश के कई राज्यों में अलग-अलग तरीके से सामने आ रही है। अगर अभी छत्तीसगढ़ की बात करें तो हालही में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। आयोग ने बिजली वितरण कंपनी की ओर से मांगी गई 24 प्रतिशत बढ़ोतरी को खारिज करते हुए औसतन 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नई दरों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी होगी। 0 से 100 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को अब 4 रुपये 40 पैसे प्रति यूनिट देना होगा। 

इसी के विरोध में बीते कल यानी 17 जून 2026 को जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा तिफरा स्थित बिजली वितरण कंपनी के मुख्य कार्यालय का घेराव किया और मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। 

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिजली की बढ़ी हुई दरों को जनविरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में संख्या इतनी अधिक रही कि कार्यालय का मुख्य द्वार बंद करना पड़ा। आक्रोश को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया। जिसके बाद सीएसईबी को ज्ञापन सौंपा गया। 

कहीं बढ़े हुए बिजली के बिलों को लेकर लोगों में नाराजगी है, कहीं स्मार्ट मीटरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो कहीं भीषण गर्मी के बीच लंबे समय तक बिजली कटौती लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। जब बिजली आम लोगों की बुनियादी जरूरत है, तब उससे जुड़ी हर समस्या सीधे लोगों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करती है।

 

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