चित्रकूट के मऊ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सुरौधा और भिटारी गांवों में पिछले लगभग 15 दिनों से ट्रांसफार्मर जला पड़ा है, जिससे पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ है। गर्मी और उमस के इस दौर में बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – सुचित्रा
गर्मियां आते ही ख़बरों में बिजली कटौती और ट्रांसफार्मर जलने और खराब होने की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। इस बार तो यूपी में यह समस्या बड़े स्तर पर दिखाई दी जिसके चलते लखनऊ में प्रदर्शन भी किया गया। कुछ दिन पहले तक तापमान और लू ने लोगों की रातों की नींद छीन ली थी, वहीं अब आंधी-तूफान और बारिश के बीच बिजली कटौती का भी सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार 24 घंटे में मुश्किल से 10 घंटे ही बिजली मिल पाती है। 24 और 25 मई को आए आंधी-तूफान के बाद से बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी, जिसके बाद से लगातार फॉल्ट और कटौती की समस्या बनी हुई है।
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अधिक लोड पड़ने पर जला ट्रांसफार्मर
चित्रकूट के सुरौंधा गांव की आबादी कुल 3 हजार है और भिटारी गांव की आबादी 2 हजार है। सुरौंधा गांव में 63KV यानी 63,000 वोल्ट का ट्रांसफार्मर है और यह 35 घरों का कनेक्शन है और 65 घरों का लोड उठा सकता है। भिटारी गांव में 65KV का है और इसमें वही नियम है 65 घरों का लोड उठा सकता है और 35 घरों का कनेक्शन है।
बिजली न होने से रात की नींद, पढ़ाई और रोजमर्रा के काम पर असर
खबर लहरिया से बात करते हुए स्थानीय निवासी गीता देवी बताती हैं कि “दिन में तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात में छोटे बच्चे गर्मी से रोते रहते हैं। खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है, मोमबत्ती की रोशनी में किसी तरह काम चलाना पड़ता है। रात के समय कीड़े मकोड़े का भी डर रहता है किसी को काट ले तो दवा कराने का खर्चा अलग।”
अनुज पाल का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई का समय चल रहा है, लेकिन बिजली न होने से मोबाइल तक चार्ज नहीं हो पाते। पढ़ाई पूरी तरह ठप है, और दिन-रात गर्मी से हाल बेहाल है। मोबाइल चार्ज न होने की वजह से इमरजेंसी में कहीं परिजन के पास बात भी नहीं हो पाती है।
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गुस्से अनुज ने ये भी कहा कि बिजली विभाग बस आश्वाशन देता है कि बिजली 15 दिन में आ जाएगी लेकिन अब तक नहीं आई और कब लाइट लाइट आएगी?
वहीं ब्रिजलाल पाल ने पानी की समस्या को सबसे बड़ी परेशानी बताया। उनके अनुसार पहले बोरिंग से साफ पानी मिल जाता था, लेकिन अब बिजली न होने से पानी की भारी किल्लत है, जिससे लोगों को बीमारियां भी हो रही हैं।
गांव पतेरी के निवासी रामकुमार बताते हैं कि इस समय बारिश और उमस भरी गर्मी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। ऐसे मौसम में बिजली कटौती सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। उनका कहना है कि रात में बार-बार बिजली आने-जाने से लोग न तो घर के अंदर चैन से रह पाते हैं और न ही बाहर। हल्की सी आंधी या तूफान आने पर दो से तीन दिन तक बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। भीषण गर्मी में लोग मछली की तरह तड़पते रहते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
15 दिनों से घर के पंखे बंद
रोहित का कहना है कि बिजली न होने से घरों में रखे कूलर और पंखे केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। उन्होंने बताया कि उनका दूध डेयरी का काम है, लेकिन बिजली न होने के कारण मशीनें चार्ज नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा ई-रिक्शा ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, जो चार्ज न होने के कारण पिछले पंद्रह दिनों से खड़ा है। इससे उनकी आय पूरी तरह प्रभावित हो रही है। रोहित का कहना है कि बिजली संकट से केवल गर्मी ही नहीं, बल्कि लोगों की रोज़ी-रोटी पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है और ऐसा लगता है कि अधिकारियों का ध्यान तब ही जाएगा जब हालात और गंभीर हो जाएंगे।
रोहित, जो डेयरी और ई-रिक्शा चलाकर अपना घर चलाते हैं। उन्होंने बताया कि बिजली न होने से उनका काम पूरी तरह ठप हो गया है। मशीनें और ई-रिक्शा बैटरी चार्ज न होने के कारण पिछले कई दिनों से खड़े हैं, जिससे रोज़ी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है।
रामरती ने नाराजगी जताते हुए कहा, “हम गरीब लोग नियमित रूप से बिजली का बिल जमा करते हैं, लेकिन जरूरत के समय बिजली नहीं मिलती। यदि यही स्थिति बनी रही, तो हम सभी ग्रामीण मिलकर आंदोलन करेंगे और अपनी मांगों को लेकर बिजली विभाग का घेराव करेंगे।”
उन्होंने मांग की कि ट्रांसफार्मर को तत्काल बदला जाए और गांव में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
वहीं बिजली विभाग के जेई सौरभ अग्रहरि के अनुसार क्षेत्र में दो गांवों के ट्रांसफार्मर जल चुके हैं और उन्हें बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि ओवरलोड और आंधी-तूफान के कारण बार-बार फॉल्ट की स्थिति बन रही है। कभी-कभी सप्लाई रोककर दूसरे गांवों को बिजली दी जाती है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है।
जब गर्मी अधिक होती है तब सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होती है लेकिन गांव लगे छोटे ट्रांसफार्मर लोड नहीं ले पाते जिसकी वजह से वे या तो खराब हो जाते हैं या तो उनमें आग लग जाती है।
बिजली की समस्या यह कोई नई नहीं है हर साल इसी तरह की समस्या ग्रामीणों को झेलनी पड़ती है। सवाल यही है कि आखिर जो सरकार हर घर बिजली की बात करती है ऐसे समय में वह चुप क्यों हो जाती है? क्या उन्हें इन लोगों की समस्या दिखाई नहीं देती है? कब तक इस तरह की परेशानियों का सामना इन लोगों को करना पड़ेगा?
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