खबर लहरिया Blog UP/Banda: दलित बस्ती में 25 दिनों से नहीं है बिजली

UP/Banda: दलित बस्ती में 25 दिनों से नहीं है बिजली

मलेहरा निवादा में पिछले लगभग 25 दिनों से बिजली नहीं आई है। यह बस्ती दलित बस्ती है और इस दलित बस्ती सहित लगभग 350 घरों की बिजली बाधित है। दलित बस्ती सहित करीब 350 घरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।

रिपोर्ट – गीता, लेखन – रचना   

आवेदन देने पहुंचे ग्रामीण (फोटो साभार:गीता)                                     

इन दिनों बिजली नहीं होने की समस्या से देश के कई राज्यों के ग्रामीण और शहरी इलाके के लोग जूझ रहे हैं। बिजली नहीं होने का कारण या तो अचानक तेज आंधी तूफान होता है या फिर तेज गर्मी जिससे ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं और बिजली कट जाती है। इससे लोग कई कई दिनों तक बिजली आने के इंतज़ार में भरी गर्मी से परेशान हो रहे हैं। उस समय की गर्मी जब डिग्री 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो। 

ठीक ऐसे ही बांदा जिले के नरैनी तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मलेहरा निवादा में पिछले लगभग 25 दिनों से बिजली नहीं आई है। यह बस्ती दलित बस्ती है और इस दलित बस्ती सहित लगभग 350 घरों की बिजली बाधित है। इस भीषण गर्मी के बीच बिजली न होने से परेशान ग्रामीणों द्वारा 10 जून 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन देकर जल्दी बिजली देने की मांग की और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो वे उग्र आंदोलन की ओर जाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। लोगों के इस शिकायत के बाद भी बस्ती में बिजली नहीं पहुंची। 

उसी बस्ती के कालीचरण नाम के व्यक्ति से जानकारी मिली कि गांव की दलित बस्ती सहित करीब 350 घरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। गांव में लगे लगभग 10 से 15 बिजली के खंभों के बीच का मुख्य तार जलकर पूरी तरह खराब हो चुका है जिसके कारण बिजली की सप्लाई बंद हो गई। पिछले 25 दिनों से बिजली न होने के कारण रात लोग सो नहीं पा रहे हैं और वे इतने दिनों से अंधेरों में ही रह रहे हैं। ये भी जानकारी मिली कि बाकी बस्तियों में बिजली आ रही है बिना कोई समस्या केवल दलित बस्ती की ही बिजली कई दिनों से कटी हुई है।

बता दें कई इलाकों में ट्रांसफार्मर कई-कई दिनों तक खराब पड़े रहते हैं लेकिन उसकी मरम्मत या उसे ठीक करने की प्रक्रिया में कोई कार्यवाही नहीं हो पाती। कई बार ट्रांसफार्मर खुले में पड़े रहते हैं तो कभी आंधी, बारिश तेज गर्मी के कारण जल जाते हैं। और बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। लोगों द्वारा शिकायतें करने के बावजूद अक्सर समस्या का समाधान समय पर नहीं हो पाता है। खबर लहरिया की ग्राउंड रिपोर्टों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहां ट्रांसफार्मर खराब होने या जल जाने के कारण लंबे समय तक बिजली कटी होती है या फिर उसमें करंट आने लगता है। हालाँकि हर मामले में ट्रांसफार्मर खराब होने की वजह अलग-अलग रही है लेकिन एक बात लगभग सामान दिखती है वो है समस्या से समाधान में होने वाली देरी। 

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बिजली कि कमी के कारण नहीं आ रहा पानी

उसी गांव के रहने वाले कल्लू दिलीप और संतोष से जब बात की गई तो उनका कहना है कि बिजली के कमी के कारण पानी की समस्या और भी बढ़ गई है क्योंकि सप्लाई वाले पानी के लिए पंपों और मोटरों पर निर्भर होते हैं जो बिजली से ही चलता है। अब बिजली लंबे समय से नहीं आ रही तो पानी की टंकी भी नहीं भर पाती। इसका सबसे ज़्यादा असर मजदूर वर्ग रोजाना कमाकर खाने वाले लोगों पर पड़ता है। उन्हें सुबह काम पर जाने से पहले पीने, नहाने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कामों के लिए पानी की जरुरत होती है। 

इसमें एक और बात छिपी हुई है कि पानी और बिजली नहीं आने की समस्या सबसे ज़्यादा महिलाओं के रोजमर्रा के काम पर ही पड़ता है। घरेलू कामों में महिलाओं की ही भागीदारी सबसे अधिक होती है बच्चे, बूढ़े सभी की चिंता का भार भी महिलाओं के सर पर ही होता है। बस उनकी समस्या समस्या नहीं लगती या फिर सामने नहीं लाई जाती। 

बड़ा ट्रांसफर रखने की मांग 

गांव के संदीप और राम खिलावन कहना है कि गांव में लगभग 100 केवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर रखा है जो कुछ समय से ओवर लोड चल रहा है क्योंकि गर्मी में बिजली की खपत ज़्यादा होती है तो ट्रांसफार्मर में लोड ज़्यादा पड़ता है यही कारण है कि ट्रांसफार्मर बार-बार खराब हो जाता है इसलिए उनकी माँगें हैं कि 100 केवीए का ट्रांसफार्मर हटा कर 250 केवीए क्षमता का बड़ा ट्रांसफार्मर रखा जाए और क्षतिग्रस्त तारों को तत्काल हटाकर नए केबल डाले जाएं ताकि ओवरलोडिंग की समस्या से स्थाई रूप से निजात मिल सके।

दिया गया आवेदन (फोटो साभार: गीता)                  

संदीप का कहना है कि इस भीषण गर्मी के कारण बच्चों के ज़्यादा हाल बेहाल है और बीमारी भी फैल रही है। रात के समय में पूरे मोहल्ले में अंधेरा छाया होता है। उनके मांग करने के बाद डीएम ने उनको आश्वासन दिया है कि एक हफ़्ते में बिजली की समस्या दूर करने की कोशिश करेंगे। गांव बड़ा होने के कारण ओवरलोडिंग के कारण उनके तरफ का रस्सा जल गया है जिससे घरों में बिजली नहीं आती है। 

मोबाइल चार्ज करने के लिए इधर उधर भटकने को मजबूर 

वर्तमान में मोबाइल फ़ोन इतना जरुरी बन गया है जिसके बिना कोई काम नहीं किया जा सकता तो अब बिजली कि कमी के कारण मोबाइल चार्ज करने के लिए भी लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। “बाहर परदेस में लोग रहते हैं मोबाइल चार्ज नहीं होता तो फिर उन परिवारों से बात नहीं हो पाती तो चिंता लगी रहती है। इसलिए गांव में किसी के घर से या कहीं बाहर से मोबाइल भी चार्ज करके लाते हैं। आजकल टेक्नोलॉजी का जमाना है बिना मोबाइल का किसी का काम नहीं चलता और हर हाथ में मोबाइल है लेकिन बिजली की कमी के कारण सब काम ठप पड़े हुए हैं।” इस मामले को डीएम से बात की गई जिसके बाद एक हफ़्ते के भीतर बिजली ठीक करने का आश्वासन दिया गया है। इसे लेकर खुरहड बिजली पावर हाउस के जेई को उनके पक्ष को जानने के लिए कई बार फ़ोन कॉल किया गया किया बात करने के लिए लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया।  

अगर बिजली विभाग द्वारा फ़ोन नहीं उठाया जा रहा है या शिकायत करने पर भी कार्यवाही में देरी की जा रही है तो यह यह कैसे भरोसा किया जाए कि समस्या का समाधान जल्द होगा। सवाल यह है कि क्या यही स्थिति किसी शहर के मुख्य बाजार बड़े आवासीय इलाके या किसी कंपनी या कारख़ाने में होती तो वहां भी कई दिनों तक बिजली का इंतिज़ार करना पड़ता? 

सवाल तो उठता ही है कि भीषण गर्मी के दौरान बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है जिसका बड़ा कारण एसी और अन्य बिजली से चलने वाले उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल है। लेकिन जिन गरीब बस्तियों में ट्रांसफार्मर खराब होने या जलने की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है वहां रहने वाले अधिकांश लोगों के पास एसी जैसी सुविधाएं क्या होती हैं? यानी बिजली की बढ़ी हुई खपत का बड़ा हिस्सा जिन वर्गों से आता है उसका असर और नुकसान अक्सर उन लोगों को झेलना पड़ता है जो खुद इस खपत में बहुत पीछे हैं यानी कम बिजली का इस्तेमाल करते हैं। ट्रांसफार्मर खराब होने पर सबसे पहले और सबसे लंबे समय तक अंधेरे में वही बस्तियां रहती हैं जहां लोगों के पास पहले से ही संसाधनों की कमी है।

 

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