मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। चोरी के 2 साल एक पुराने मामले में कार्रवाई न होने से परेशान एक पिता-बेटे ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने 16 जून 2026 को पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।

आत्मदाह करने से पहले एसपी कार्यालय छतरपुर में पिता द्वारा 16 जून को दिया गया शिकायत पत्र (फोटो साभार: अलीमा)
रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – सुचित्रा
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला छतरपुर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र का है, जहां रहने वाले प्रदीप तिवारी और उनके परिवार का आरोप है कि 8 दिसंबर 2024 को उनके घर में बड़ी चोरी हुई थी। इस घटना में लगभग 227 ग्राम सोना और 2 किलो चांदी सहित अन्य कीमती सामान चोरी हो गया था।
परिवार का कहना है कि उन्होंने घटना के तुरंत बाद नौगांव थाने में एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। उल्टा पुलिस ने ही परिवार को संदेह की नज़र से देखा और सवाल किया कि इतने सारे गहने कहाँ से आए? परिवार का कहना है कि यह उनके पास जो गहने थे वो उनके पूर्वजों की निशानी थी।
लगातार न्याय की गुहार, लेकिन कार्रवाई नहीं
परिवार का आरोप है कि उन्होंने बार-बार पुलिस और एसपी कार्यालय के चक्कर लगाए। इस दौरान उनका लगभग 8 से 10 हजार रुपये का खर्च हर बार आने-जाने में हुआ और वे मजदूरी छोड़कर बार-बार न्याय की उम्मीद में कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन केवल आश्वासन ही मिलता रहा। प्रदीप तिवारी की पत्नी नीलम तिवारी (38 साल उम्र) के अनुसार, वे कई बार शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंचीं, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना गया।
परिवार का यह भी कहना है कि उन्होंने जांच में सीसीटीवी फुटेज देखने और आरोपियों की पहचान करने की मांग की, लेकिन उस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
परिवार ने थाना प्रभारी पर लगाया आरोप
परिवार ने इस मामले में देरी की वजह थाना प्रभारी सतीश सिंह से मिलीभगत को बताया। परिवार ने आरोप लगाया की थाना प्रभारी की आरोपियों से मिलीभगत है।
नौगांव थाना प्रभारी सतीश सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस लगातार जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।
उन्होंने कहा कि पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और जैसे ही कोई ठोस सुराग मिलेगा, मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
न्याय मिलने में देरी पर आत्मदाह करने की कोशिश
लगातार अनसुनी से परेशान होकर 16 जून को प्रदीप तिवारी अपने बेटे के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने वहां फिर से शिकायत पत्र दिया था लेकिन मामले को गम्भरीता से न लेता देख पिता ने एसपी कार्यालय के आत्मदाह करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने समय रहते उन्हें ऐसा करने से रोक लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
छतरपुर के पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है। परिवार द्वारा उठाया गया कदम दुर्भाग्यपूर्ण है। मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंप दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला केवल एक चोरी की जांच का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है जो आम नागरिक पुलिस और व्यवस्था से करता है। लंबे समय से न्याय न मिलने के आरोप, लगातार शिकायतें और बढ़ती निराशा ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बना दिया है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है?
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