चित्रकूट में 28 से 30 अगस्त के बीच आई लगातार बारिश और फिर बाढ़ ने मंदाकिनी के किनारे बसे शहर और गांवों को बुरी तरह प्रभावित किया। मंदाकिनी का जलस्तर महज छह घंटे में करीब साढ़े सात मीटर बढ़ गया और 2003 के पुराने रिकॉर्ड से लगभग तीन मीटर ऊपर पहुंच गया। इतनी असाधारण बारिश को रोकना किसी सरकार के बस में नहीं था। लेकिन क्या बाढ़ से हुआ नुकसान उतना ही प्राकृतिक था, या सालों की प्रशासनिक लापरवाही और नदी के साथ किए गए छेड़छाड़ ने इसे और भयावह बनाया? इस रिपोर्ट में हम इसी सवाल को आंकड़ों, स्थानीय रिपोर्टों और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर समझने की कोशिश करते हैं। मंदाकिनी की बाढ़ निगरानी के तीन केंद्रों में से करवी का गेज 22 जून 2026 से बंद था। मानिकपुर के डोडा माफी बांध का एक गेट पहले से जाम था और स्थानीय लोगों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद समय रहते दोनों गेट ठीक नहीं किए गए। बाढ़ के दौरान डोडा, छेरिहा, जरोमाफी और कल्याणपुर जैसे गांव प्रभावित हुए और छेरिहा में कई घर ढह गए। बाढ़ के लिए कौन ज़िम्मेदार जानने के लिए देखिये द कविता शो का नया एपिसोड।
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