खबर लहरिया Blog सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD द्वारा जर्जर इमारतों पर कार्यवाही, ऐसी ही हादसों से डरे हुए छात्र कर रहे प्रदर्शन 

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD द्वारा जर्जर इमारतों पर कार्यवाही, ऐसी ही हादसों से डरे हुए छात्र कर रहे प्रदर्शन 

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD द्वारा जर्जर और अवैध इमारतों के खिलाफ कार्यवाही कर रही है। वहीं यूपी सहित कई राज्यों में जर्जर स्कूलों और सुविधाओं की कमी से परेशान बच्चे सुरक्षित स्कूल की माँग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।  

जर्जर इमारत पर कार्यवाही

जर्जर इमारत पर कार्यवाही (फोटो साभार: PTI)                 

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए घटना के बाद जर्जर इमारतें और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी गई है। जहां पर भी अवैध निर्माण या बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन की आशंका है, वहां राजधानी के 12 जोन के नगर निगम टीमें उन मकानों और संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जा रहा है। जांच के दौरान ख़ामी या बिल्डिंग में कोई समस्या मिलने पर संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जा रहा है। जरुरत के मुताबिक इमारतों को सील करने और गिराने की कार्यवाही की जा रही है। 

India TV में छपी खबर के अनुसार 10 सितंबर 2026 को MCD (म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ़ दिल्ली) के द्वारा 41 जगहों पर धवस्तीकरण यानी निर्माण इमारत गिराया गया। 61 संपत्तियों को सील किया गया, और 32 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही 3 संपत्तियों को गिराने के आदेश भी दिए गए हैं। इस बीच 1,355 ऐसी इमारतों का सर्वे किया गया जिनमें PG चल रहे हैं। 

सत्य निकेतन हादसे के बाद नॉर्थ दिल्ली के गांधी विहार में भी कई इमारतों की जर्जर और खराब हालत मिलने पर MCD द्वारा कार्यवाही शुरू कर दी गई है। MCD की जांच में एफ-ब्लॉक में हुई जांच के दौरान 65 मकानों को असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। ये ऐसी इमारतें और मकान हैं जिनमें से कुछ झुकी हुई है और कई घरों के बीच की जगह भी बहुत कम बची है। इससे आसपास रहने और स्थानीय लोगों को मकानों के गिरने का डर बना हुआ है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा को ध्यान देते हुए जर्जर और ख़तरनाक मकानों खाली करने का निर्देश दिया गया है। 

इस कार्रवाई के बीच MCD ने अपने तीन अधिकारियों AE रविंदर कुमार, JE सुमन सौरभ और JE मोहित यादव को भी सस्पेंड किया है। इससे पहले सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई थी 

मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार अब तक 1,355 इमारतों की जांच में से 1,304 इमारतों को सुरक्षितबताई जा रही है। जबकि 3 को खतरनाक और 9 को बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत वाली इमारत बताया गया है। इन इमारतों में करीब 27 हजार छात्र रह रहे हैं और कार्रवाई के चलते कुछ छात्रों के सामने रहने की समस्या भी खड़ी हो गई है।

सत्य निकेतन की अब तक की पूरी घटना, क्या हुआ था सत्य निकेतन में? 

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके (दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास) में 6 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे एक पांच मंज़िला इमारत गिर गई। इस इमारत में दबने से लगभग 7 स्टूडेंटस की मौत हो गई और कई घायल भी हुए। 

जानकारी के अनुसार ये इमारत तक़रीबन 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत थी। इमारत के बेसमेंट/भूतल पर बिना अनुमति के तोड़फोड़, निर्माण या दुकान बनाने के लिए दीवार या पिलर कमजोर करने का काम चल रहा था। इसके अलावा इमारत केवल ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर की अनुमति वाली थी, जिस पर अवैध रूप से मंजिलें तानी गई थीं। 

घटना के बाद कार्यवाही 

घटना के बाद पुलिस द्वारा इमारत की मालकिन उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा पीजी संचालक और ठेकेदार पर भी शिकंजा कसा गया। लापरवाही बरतने पर MCD दिल्ली नगर निगम के 5 वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है। 

इसी के साथ सत्य निकेतन और आसपास के जर्जर व अवैध पीजी इमारतों के खिलाफ एमसीडी ने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और सीलिंग अभियान शुरू किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली में छात्रों के आवासों और पीजी की सुरक्षा ऑडिट को लेकर सख्त रुख अपनाया है। 

सत्य निकेतन की इस घटना पर सरकार का पक्ष 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि बेसमेंट में चल रहे मरम्मत कार्य और नियमों की अनदेखी के चलते यह हादसा हुआ। सरकार और उपराज्यपाल के निर्देशानुसार एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो 60 दिनों के भीतरअपनी रिपोर्ट सौंपेगी और छात्रों की सुरक्षा के लिए मानक प्रोटोकॉल तैयार किए जाएंगे।

रेखा गुप्ता ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि “सत्य निकेतन की दुखद घटना के बाद, एमसीडी के उपायुक्त, कार्यकारी अभियंता, अधीक्षण अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। भवन मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। दिल्ली भर में अनधिकृत पांचवीं मंजिल वाले भवनों को तुरंत सील करने का आदेश दिया गया है। आसपास के पीजी और भवनों का भी गहन निरीक्षण किया जा रहा है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीलिंग सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। दोषी या जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।” 


इस समय देश के कई हिस्सों में सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंताजनक स्थिति नजर आती है। शिक्षा की बदहाल स्थिति को लेकर CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद देश के अलग-अलग राज्यों में भी बच्चों ने अपने स्कूलों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई और प्रदर्शन किए। CJP की ओर से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान कई स्कूलों में जर्जर इमारत, खराब व्यवस्था और जरूरी सुविधाओं की कमी सामने आई है।

खबर लहरिया के रिपोर्टिंग द्वारा भी सरकारी स्कूलों की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जहां बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं तक नहीं हैं। साथ ही स्कूल की स्कूल की सुविधाओं की कैसे खाना, शौचालय सब की धज्जियाँ भी उड़ी दिखी। 

‘School Thik Karo’ Campaign Ground Report: क्या 15 अगस्त से शुरू CJP का गांवों में “स्कूल ठीक करो” राष्ट्रव्यापी अभियान ठीक कर पाएगा दशकों से ख़राब सरकारी स्कूलों की बदहाली की सच्ची तस्वीर?

हालही में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में 9 सितंबर 2026 को एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के बच्चों ने जर्जर इमारत और सुरक्षा के खतरे को देखते हुए कक्षाओं का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। ये स्कूल बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के विधानसभा क्षेत्र अतरौली में है। बच्चों को डर है कि कहीं जर्जर इमारत गिर न जाए और उनकी जान खतरे में न पड़ जाए। उत्तर प्रदेश में खराब स्कूल भवन और सुविधाओं की कमी को लेकर बच्चों के प्रदर्शन का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले फतेहपुर, हमीरपुर, कन्नौज और राजधानी लखनऊ से भी सरकारी स्कूलों की खराब हालत को लेकर बच्चों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ चुकी हैं।

इसी तरह कर्नाटक के हासन जिले के शांतिग्राम से भी स्कूल की खराब स्थिति का एक गंभीर मामला सामने आया। यहां डॉ. बी.आर. अंबेडकर आवासीय स्कूल के करीब 172 छात्र-छात्राएं पिछले 5 साल से एक तबेले में रहने, खाना खाने और पढ़ाई करने को मजबूर थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इस मामले को लेकर देशभर में नाराजगी देखने को मिली।

छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से भी सरकारी स्कूलों की खराब इमारतों, जरूरी सुविधाओं की कमी और बच्चों की परेशानियों से जुड़ी खबरें सामने आती रही हैं। 

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ हादसा भी इसी खतरे की ओर इशारा करता है। वहां जर्जर इमारत गिरने से स्टूडेंटस की मौत हो गई। इसी तरह की घटनाओं का डर स्कूलों के बच्चों में भी है, जहां इमारतें पुरानी और जर्जर हालत में हैं। इसी तरह के घटनाओं से डर के चलते कई जगह बच्चे स्कूल की सुरक्षित इमारत और बेहतर व्यवस्था की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं।

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