अयोध्या में 1976 से लगने वाला यह पारंपरिक सांस्कृतिक मेला आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भादों मास में कृष्ण जन्माष्टमी से शुरू होकर यह मेला अमावस्या तक, यानी करीब एक सप्ताह तक चलता है। मेले को लेकर आसपास के गांवों के लोगों में खासा उत्साह रहता है और रिश्तेदार भी कई दिन पहले से घरों में आने लगते हैं। दिन में मेले में खरीदारी और घूमने का माहौल रहता है, वहीं रात में आकर्षक झांकियां निकाली जाती हैं। करीब 30 कोस दूर से भी लोग मेला और झांकियां देखने पहुंचते हैं। मेले में अलग-अलग जाति और धर्म के लोग शामिल होते हैं, जिससे यहां की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले मेले में कठपुतली के जरिए नाटक भी दिखाए जाते थे। खासकर महिलाओं के लिए यह मेला मनोरंजन और खरीदारी का एक खास मौका होता है, जहां वे रोजमर्रा की चिंताओं से दूर एक सप्ताह तक उत्सव का आनंद लेती हैं।
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