बारिश के दिनों में गांव से बाहर सड़क पर निकलना यहां किसी परीक्षा से कम नहीं है। कच्ची पगडंडी पर जगह-जगह कीचड़ और पानी भर जाता है। करीब 400 से 500 मीटर का यह रास्ता पार करना बच्चों और बुजुर्गों के लिए मुश्किल मुश्किलों से भरा हुआ है।
रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – रचना
इसी वजह से महोबा के ग्योड़ी ग्राम पंचायत के सिद्धांनडेरा और इलाहीपुरा के मजरे (ग्रामीण बस्तियां) के बच्चे कई दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ये समस्या इतनी बढ़ गई है कि 24 अगस्त को तकरीबन 70 बच्चे और गांव वाले जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और रास्ता बनवाने की मांग को लेकर आवेदन दिया।
इस समय देश भर के अलग-अलग राज्यों बच्चे अपने स्कूल में हो रहे समस्या के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं या फिर स्कूल में सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। ठीक ऐसे ही ये मामला महोबा जिले की ग्राम पंचायत ग्योड़ी के इलाहीपुरा और सिद्धांनडेरा का है। यहां करीब 180 लोगों की आबादी रहती है। वहीं शंकरडेरा जो इसी बस्ती का हिस्सा है में करीब 250 लोग रहते हैं। गांव वालों के मुताबिक शंकरडेरा पिछले साठ साल से बसा हुआ है और सिद्धांनडेरा को बसे करीब 70 साल हो चुके हैं। इतने वर्षों बाद भी इन मजरों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बन पाई है।
सिद्धांनडेरा और इलाहीपुरा ग्योड़ी गांव से मुख्य मार्ग की तरफ करीब 400 से 500 मीटर अंदर बसे हैं। यहां पहुंचने के लिए लगभग तीन से चार मीटर चौड़ी कच्ची पगडंडी ही रास्ता है। गर्मी के दिनों में तो किसी तरह लोग इस रास्ते से निकल जाते हैं पर बारिश शुरू होते ही यही रास्ता कीचड़ और जलभराव से पूरा भर जाता है।
खबर लहरिया को बताते हुए सिद्धांनडेरा की रहने वाली मधु बताती हैं कि गांव से लोग ग्योड़ी-खन्ना चक रोड तक इसी रास्ते से जाते हैं। किसी के बीमार होने पर भी बड़ी परेशानी होती है। करीब 400 मीटर का रास्ता बारिश में पैदल पार करना होता है जिसमें घंटों लग जाते हैं। इसी परेशानी को लेकर गांव वालों ने जिलाधिकारी को एक लिखित आवेदन देकर सड़क बनवाने की मांग की है।
शीला खबर लहरिया को बताती हैं कि खन्ना से ग्योड़ी जाने वाला रास्ता और गांव तक पहुंचने वाला रास्ता करीब 15 साल से बारिश के दिनों में कीचड़ और पानी से भर जाता है। जब मिट्टी सूखी होती है तो लोग किसी तरह निकल जाते हैं और बारिश होते ही रास्ते में पानी और कीचड़ एक साथ हो जाता है। फिर पैदल चलना भी आसान नहीं रह जाता।
बच्चों ने कहा- रास्ता खराब है इसलिए स्कूल नहीं जा पा रहे
इसी रास्ते की बदहाली का सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है। गांव वालों से बातचीत में पता लगा कि सिद्धांनडेरा और आसपास के कुछ गांवों के करीब 70 बच्चे कीचड़ और पानी पार करके ही स्कूल जाते हैं। इस हालत में ऐसे स्कूल जाना उनकी मजबूरी बन चुकी है। फिर बीते 24 अगस्त को ये बच्चे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। बच्चों ने अपनी मांग को लेकर नारे-बाजी की और फिर सड़क बनवाने की मांग से लिखित आवेदन भी दिया।
सिद्धांनडेरा पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक पवन कुमार बताते हैं कि स्कूल में 26 बच्चे पढ़ते हैं। बच्चे सामान्य दिनों में स्कूल आ जाते हैं पर बारिश और रास्ते में कीचड़ होने पर कई बच्चे स्कूल ही नहीं पहुंच पाते। एक रास्ते के वजह से उनकी पूरी पढ़ाई पर प्रभाव दिखता है।
गांव वालों के मुताबिक शंकरडेरा के बच्चे भी पिछले करीब 10 दिनों से स्कूल नहीं जा पाए हैं। जब स्कूल जाने का रास्ता ही इतना खराब है तो बच्चों को स्कूल भेजना भी उनके परिवारों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
प्रधान बोले- सड़क योजना में डाली गई है
बच्चे और रास्ते के संबंध में ग्राम प्रधान सिद्धनारायण ने भी अपना पक्ष बताया कि ग्योड़ी-खन्ना मुख्य मार्ग से गांव तक करीब 400 मीटर का रास्ता है। रिपोर्टर द्वारा जब उनसे पूछा गया कि इतने समय से यह रास्ता क्यों नहीं बनवाया गया तो उन्होंने बताया कि रास्ते को योजना में डलवा दिया गया है। योजना के तहत काम की स्वीकृति और प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही सड़क का निर्माण हो सकेगा।
अधिकारियों ने भी देखी सड़क की स्थिति
इस पर महोबा के बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि बच्चों के माध्यम से रास्ता खराब होने के विषय के बारे में पता लगा है। उन्होंने कहा कि वे मौके पर जाकर स्थिति देखेंगे। अगर रास्ता स्कूल तक जाने वाला है तो उसकी स्थिति का भी सत्यापन किया जाएगा।
वहीं महोबा एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने बताया कि रास्ते की समस्या को लेकर बच्चों ने लिखित आवेदन दिया है। राजस्व टीम भी मौके पर पहुंची है। खंड विकास अधिकारी और एडीओ पंचायत से बात कर के समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
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