खबर लहरिया Blog Ground Report: शटडाउन के बाद भी आया करंट, बिजली कर्मचारी की मौत, छह महीने में चार मौत 

Ground Report: शटडाउन के बाद भी आया करंट, बिजली कर्मचारी की मौत, छह महीने में चार मौत 

अयोध्या जिले की सोहावल तहसील के सिकंदरपुर (बनटवा) गांव के रहने वाले 35 वर्षीय संविदा बिजली कर्मचारी मातादीन पासी (गुड्डू) की 21 अप्रैल 2026 की शाम करीब चार बजे बिजली लाइन ठीक करते समय करंट लगने से मौत हो गई।

रिपोर्ट – संगीता – लेखन – रचना 

फोटो साभार: संगीता

परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि जिस लाइन पर वह काम कर रहे थे उसका पहले से शटडाउन लिया गया था। इसके बावजूद अचानक लाइन में करंट आ गया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

अयोध्या जिले में छह महीने में चार लाइनमैनों की मौत हो चुकी है लेकिन क्या एक भी हादसे से सबक लिया गया? क्योंकि हर हादसे के बाद कुछ दिनों तक हलचल होती है परिवार को आर्थिक सहायता और आश्वासन दिया जाता है लेकिन समय बीतते ही मामला ठंडा पड़ जाता है। 

22 अप्रैल को उनका अंतिम संस्कार हुआ। उसी दिन बिजली विभाग की ओर से अंतिम संस्कार के लिए 30,000 की सहायता दी गई। इसके बाद विभागीय प्रक्रिया पूरी होने पर जून 2026 के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के नियमों के तहत 5 लाख की अनुग्रह राशि उनकी पत्नी गायत्री देवी के खाते में भेजी गई।

मातादीन की पत्नी गायत्री के अनुसार उनके दो छोटे बच्चे हैं। बेटी 12 साल की है और बेटा सिर्फ 7 साल का और अब उनका सवाल है कि अब उनकी देखभाल कौन करेगा? उनका सवाल यह भी है कि “मेरा सरकार से सिर्फ एक सवाल है कि जब शटडाउन लिया गया था तो फिर करंट कैसे आ गया?” वह बताती हैं कि विभाग ने अंतिम संस्कार के लिए 30,000 दिए थे और बाद में मुआवजा भी मिला लेकिन घटना के बाद परिवार के किसी सदस्य को नौकरी देने की बात अभी तक पूरी नहीं हुई है। उनका कहना है कि कागजी कार्रवाई तो हुई पर रोजगार का इंतजार अब भी है।

नियम क्या कहते हैं?

विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता बृजेश कुमार के अनुसार ड्यूटी के दौरान हादसे में जान गंवाने वाले संविदा लाइनमैन के परिवार को विभागीय नियमों के तहत 5 लाख से 7.5 लाख तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि मृतक कर्मचारी के परिवार के किसी योग्य सदस्य को संविदा के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति देने की भी व्यवस्था है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज जमा होने और जांच पूरी होने के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाती है। विभाग का कहना है कि जिन परिवारों के मामले उनके संज्ञान में आए हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है। यदि किसी अन्य परिवार ने अब तक आवेदन नहीं किया है तो वे अपने दस्तावेज जमा कर सकते हैं।

विभागीय नियमों के अनुसार हादसे के बाद 30 से 60 दिनों के भीतर सहायता राशि देने का प्रावधान है। मातादीन के मामले में परिवार ने घटना के करीब 15 दिन के भीतर आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज विभाग में जमा कर दिए थे।

ये तो रही विभाग के नियम लेकिन मातादीन पासी  मुआवजा दिया गया लेकिन नौकरी देने की बात अभी तक पूरी नहीं हुई न ही उनके बच्चों की आगे की शिक्षा की कोई बात हुई।

छह महीने में चार मौत 

मातादीन की मौत अकेली घटना नहीं है। बिजली विभाग मुख्य अभियंता ब्रिजेश कुमार के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या जिले में करंट लगने से कई लाइनमैनों की जान गई है। फिलहल छह महीने में चार मौतों की जानकारी भी उनके अनुसार दी गई। 

  • 21 अप्रैल 2026 को सोहावल क्षेत्र में मातादीन पासी (गुड्डू) की मौत हुई।
  • 5 जून 2026 को नाका स्थित दुर्गापुरी विद्युत उपकेंद्र से जुड़े राजबली की भी करंट लगने से मौत हुई।
  • इसी अवधि में मिल्कीपुर-कुमारगंज क्षेत्र के मोहम्मद रईस की भी करंट लगने से मौत का मामला सामने आया।

वर्ष 2024 और 2025 

  • वहीं अगस्त 2024 में हैरिंग्टनगंज विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र के प्राइवेट लाइनमैन नन्हें लाल यादव की करंट लगने से मौत हो गई। उनकी पत्नी प्रभावती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि घटना के बाद कुछ मदद और आश्वासन तो मिला लेकिन बाद में किसी ने परिवार की सुध नहीं ली।
  • जुलाई 2025 में गोसाईगंज क्षेत्र के संविदा लाइनमैन राकेश वर्मा की ट्रांसफॉर्मर ठीक करते समय करंट लगने से मौत हो गई।
  • अगस्त 2025 में रुदौली क्षेत्र के मुस्तकीम अहमद की लाइन पर काम करते समय करंट लगने से जान चली गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी कई घटनाएं सामने ही नहीं आ पातीं। उनका आरोप है कि कई मामलों में परिवारों को कुछ आर्थिक मदद देकर समझौता करा दिया जाता है और घटनाएं सार्वजनिक चर्चा तक नहीं पहुंचतीं।

सुरक्षा उपकरण मिले लेकिन क्या इससे हादसे रुक जाएंगे?

लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद जुलाई 2026 में मिल्कीपुर क्षेत्र के लगभग 30 लाइनमैनों को स्मार्ट हेलमेट (स्मार्ट हेलमेट एक आधुनिक सुरक्षा उपकरण है जो ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, जीपीएस नेविगेशन और दुर्घटना का पता लगाने वाले सेंसर जैसी उन्नत तकनीकों से लैस होता है) और अन्य सुरक्षा उपकरण वितरित किए गए। विभाग का कहना है कि इससे काम के दौरान सुरक्षा बढ़ेगी। पर सवाल यह है कि क्या सिर्फ हेलमेट और कुछ सुरक्षा उपकरण बांट देने से समस्या खत्म हो जाएगी? अगर शटडाउन लेने के बाद भी लाइन में करंट आ जाता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या भविष्य में ऐसे हादसे नहीं होंगे इसकी कोई गारंटी है?

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