उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत हर व्यक्ति तक साफ पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी साल मार्च 2026 जल जीवन मिशन के एक कार्यक्रम में कहा था, “जेजेएम (जल जीवन मिशन) के तहत गांव के अंतिम व्यक्ति तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की पहल की गई है।” उन्होंने योजना को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुए समझौते का भी जिक्र किया था। लेकिन वाराणसी के कोनिया घाट स्थित महादेव कुआं के पास रहने वाले करीब 400 परिवारों की परेशानी इस दावे से अलग तस्वीर दिखाती है।
रिपोर्ट – सुशीला, लेखन – सुचित्रा
वाराणसी की घनी आबादी के बीच कोनिया घाट स्थित महादेव कुआं के पास करीब 400 परिवार ऐसे हैं, जिनके सामने इन दिनों सबसे बड़ा सवाल पीने के साफ पानी का है। इलाके में लगे हैंडपंपों से बालू मिला पानी निकल रहा है, सप्लाई का पानी भी कई बार गंदा आता है और गर्मी में लगाया गया वाटर कूलर भी लोगों के काम नहीं आ रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की यह समस्या आज की नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। बाढ़ और बारिश के दौरान सीवर की समस्या बढ़ने से हालात और खराब हो जाते हैं।
बाहर से पानी खरीदने को मजबूर, गन्दा पानी बना वजह
स्थानीय निवासी रामचंद्र मौर्य बताते हैं कि यहां तीन हैंडपंप हैं, लेकिन किसी से भी साफ पानी नहीं मिल रहा है। पानी में बालू आने के कारण लोग उसे पहले जमा होने देते हैं और फिर घरेलू काम में इस्तेमाल करते हैं। पीने के लिए कई परिवारों को बाहर से पानी खरीदना पड़ता है।
रामचंद्र के अनुसार, महादेव कुआं के पास गर्मी में वर्ष 2026 में वाटर कूलर लगाया गया था। स्थानीय लोगों का दावा है कि शुरुआत में करीब 15 दिन तक उसमें पानी मिला, लेकिन इसके बाद वह भी उपयोगी नहीं रहा। कुआं भी सूख चुका है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
पानी पीने लायक नहीं, फिर भी इसी से चल रहा काम
स्थानीय निवासी दिलीप मौर्य कहते हैं कि इलाके में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि लोग मजबूरी में चापाकल लगवाने तक को तैयार हुए, लेकिन वहां भी साफ पानी नहीं मिला। उनका कहना है कि पानी निकालने के बाद कुछ देर रखने पर बालू नीचे बैठ जाता है। इसके बाद इसी पानी का इस्तेमाल नहाने, कपड़े और बर्तन धोने में किया जाता है, जबकि पीने के लिए पानी खरीदकर लाना पड़ता है।
दिलीप का आरोप है कि इलाके में जगह-जगह सीवर की समस्या भी है। उनका कहना है कि पाइपलाइन फटने या सीवर की खराबी के कारण कई बार गंदा पानी सप्लाई लाइन में पहुंच जाता है। उन्होंने जलकल विभाग, स्थानीय पार्षद और जनसुनवाई पोर्टल तक शिकायत करने की बात कही। उनके मुताबिक, वर्ष 2025 में शिकायत के बाद अधिकारी पानी का सैंपल लेकर गए थे, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
महिलाओं और परिवारों की बढ़ी परेशानी
स्थानीय महिला अनीता मौर्या बताती हैं कि हैंडपंप से निकलने वाले पानी में बालू आता है। उनका कहना है कि इस पानी के इस्तेमाल से पेट संबंधी परेशानी भी होती है, लेकिन साफ पानी का दूसरा इंतजाम नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
अनीता के मुताबिक, जब सप्लाई का पानी नहीं आता तो लोग आसपास के घरों से पानी मांगकर काम चलाते हैं। कई बार दूर से पानी लाना पड़ता है। उनका कहना है कि हर दिन किसी दूसरे घर से पानी मांगना भी संभव नहीं है।
आपको याद दिला दें कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा था कि जल जीवन मिशन से करीब 9 करोड़ महिलाओं को रोज पानी लाने की मेहनत से राहत मिली है। इससे वे खेती, रोजगार और दूसरे कामों के लिए ज्यादा समय दे पा रही हैं। उन्होंने डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अगर हर घर में नल से सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध हो, तो महिलाओं के रोजाना करीब 5.5 करोड़ घंटे बच सकते हैं। साथ ही, डायरिया से हर साल होने वाली करीब 4 लाख मौतों को भी रोका जा सकता है। यह 18 मार्च 2026 में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में केंद्रीय मंत्री ने कहा कहा था।
इसके बावजूद महिलाओं की समस्या कम नहीं हुई है। ऐसी बातों से लगता है कि वास्तव में जमीनी स्तर पर महिलाओं की समस्या को इन आंकड़ों में जगह ही नहीं दी गई। क्योंकि आज भी यूपी में ऐसे कई गांव हैं जहां महिलाओं को पानी के लिए दूर कई किलोमीटर तक पानी के लिए जाना पड़ता है। सरकार ने भले अपने नाम के लिए योजना के नाम पर शुद्ध जल पहुंचाने का दावा किया हो लेकिन जब हम इस तरह के सरकारी आंकड़ें देखते हैं तो यह झूठ महसूस होता है।
पूर्व पार्षद बोले- पाइपलाइन टूटने से बढ़ी समस्या
पूर्व सभासद शिव प्रसाद मौर्य का कहना है कि इलाके में पानी की समस्या पुरानी है। उनके अनुसार, उनके कार्यकाल में कई जगह पाइपलाइन की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन गलियों में लगातार तोड़फोड़ और मरम्मत के कारण पाइपलाइन टूटने की समस्या बनी रहती है। इससे सीवर का पानी पाइपलाइन में मिलकर घरों तक पहुंचने का खतरा रहता है।
उनका कहना है कि पहले लोग समस्या लेकर उनके पास आते थे, लेकिन वर्तमान में लोगों की शिकायतों का समाधान ठीक से नहीं हो पा रहा है।
पार्षद बोले- शिकायत मिली तो तुरंत जांच कराएंगे
कोनिया वार्ड नंबर 68 के सभासद अमर देव यादव का कहना है कि पूरे वार्ड की आबादी एक लाख से अधिक है, जबकि कोनिया क्षेत्र में करीब 8 से 10 हजार लोग रहते हैं। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत कुछ स्थानों पर घरों तक पानी पहुंचा है और दो जगह मिनी टंकी भी लगाई गई हैं।
सभासद ने कहा कि महादेव कुआं क्षेत्र में पानी की इतनी पुरानी समस्या होने की जानकारी उन्हें पहले नहीं मिली थी। स्थानीय लोगों की शिकायत सामने आने के बाद उन्होंने जलकल विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच कराने और पाइपलाइन की स्थिति देखने की बात कही है। उनका कहना है कि अगर सीवर का पानी पाइपलाइन में मिल रहा है तो उसकी वजह पता लगाकर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
जलकल विभाग ने जांच का दिया भरोसा
वाराणसी जलकल विभाग के सुधीर कुमार मौर्य ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद मौके पर जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि आखिर पानी गंदा क्यों आ रहा है और पाइपलाइन या सीवर में कहां समस्या है। बारिश के कारण इस समय कई जगह मरम्मत का काम चल रहा है, लेकिन संबंधित क्षेत्र की समस्या भी देखी जाएगी।
पानी की इस समस्या को सरकारी योजनाओं के दावों के संदर्भ में देखें तो सवाल और गंभीर हो जाता है। केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन-हर घर जल ग्रामीण परिवारों को नियमित, पर्याप्त और निर्धारित गुणवत्ता वाला पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। फरवरी 2026 की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को बीआईएस मानकों के अनुरूप पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ‘हर घर नल-हर घर जल’ के संकल्प के तहत ग्रामीण परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की बात कह चुके हैं। मार्च 2026 में मुख्यमंत्री योगी ने कहा था, “उत्तर प्रदेश राज्य में 1,05,000 से अधिक राजस्व गांव हैं, जिनमें से 10,000 से अधिक गांवों में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश में इस योजना के कार्यान्वयन के साथ, हमने यह सुनिश्चित किया है कि सभी कार्यान्वयन एजेंसियों और ठेकेदारों को कार्य पूरा होने के बाद 10 वर्षों तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी होगी।”
इस तरह की बातों पर सुनकर तालियां बजती है और नाम भी होता है लेकिन उन ग्रामीणों का क्या जो वर्षों से शुद्ध पानी का इंतजार कर रहे हैं? पानी एक बुनियादी जरूरत है क्यूंकि जल है तो जीवन है और जल ही साफ़ नहीं होगा तो इससे स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा। लोग कई तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जायेंगे।
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