छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में बच्चों के पोषण को लेकर हुई हालिया जांच ने चिंता बढ़ा दी है। आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज बच्चों के वजन और सेहत की जांच में पता चला कि करीब 2 हजार बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं जबकि 15 से 17 हजार बच्चों में मध्यम कुपोषण पाया गया है।
ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब महिला एवं बाल विकास विभाग हर साल गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करता है ताकि कुपोषण जैसी समस्या को कम किया जा सके। इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चों का कमजोर स्वास्थ्य यह बताता है कि जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह नहीं बदले हैं।
हरी भूमि रिपोर्ट के अनुसार विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि गंभीर कुपोषण की श्रेणी में आने वाले ज्यादातर बच्चे जन्म से 6 महीने तक की उम्र के हैं जिन्हें शुरुआत से ही बेहतर देखभाल और सही पोषण की जरूरत है। यह रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि योजनाएं चलने के बावजूद कुपोषण अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।यह रिपोर्ट हाल ही में किए गए सर्वे में स्थिति एक बार फिर सामने आई है।
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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर शहर के कुछ बस्ती वाले इलाकों में बच्चों में कुपोषण की समस्या ज्यादा गहरी नजर आ रही है। खासकर भाठागांव और आसपास की बीएसयूपी कॉलोनियों में हालात ज्यादा चिंता बढ़ाने वाले बताए जा रहे हैं। यहां रहने वाले कई बच्चों की सेहत कमजोर पाई गई है। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मुताबिक, सिर्फ उनके इलाके में ही 40 से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि शहर के कुछ हिस्सों में बच्चों तक सही पोषण और जरूरी सुविधाएं अभी भी पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही हैं।
एक लाख से ज्यादा बच्चों के वजन की जांच की गई
जिले में आयोजित वजन त्योहार के दौरान एक लाख से ज्यादा बच्चों के वजन की जांच की गई। इस जांच में सामने आया कि कई बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से काफी कम है जिसके बाद उन्हें कुपोषित बच्चों की सूची में रखा गया। इनमें ऐसे बच्चे भी शामिल हैं जिनकी उम्र कुछ दिनों से लेकर करीब दो साल तक है। ऐसे बच्चों की सेहत में सुधार लाने के लिए उन्हें पौष्टिक आहार, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और जरूरी इलाज की सुविधा दी जा रही है ताकि शुरुआती दौर में ही उनकी कमजोरी दूर की जा सके और उनका विकास बेहतर हो सके।
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बस्ती इलाक़ों में स्थिति चिंताजनक
रायपुर जिले में कुपोषण के आंकड़ों में बीते वर्षों के मुकाबले कमी जरूर दर्ज की गई है लेकिन अब यह सुधार बहुत धीमी रफ्तार से हो रहा है। करीब 10 से 15 साल पहले जिले में 15 से 30 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की चपेट में थे जो अब घटकर लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। यह बदलाव राहत देने वाला जरूर है पर पिछले कुछ वर्षों में कमी की गति उम्मीद के मुताबिक तेज नहीं रही। वहीं साल 2025-26 के आंकड़े अभी शुरुआती अनुमान माने जा रहे हैं इसलिए विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी आने के बाद इनमें थोड़ा बदलाव संभव है।
वहीं अगर पिछले तीन साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ साफ होती है। साल 2023 में 20,600 मध्यम कुपोषित और 3,662 गंभीर कुपोषित बच्चे दर्ज किए गए थे। इसके बाद 2024 में यह संख्या घटकर 20,185 मध्यम और 3,081 गंभीर रह गई। वहीं 2025 में मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या 17,613 और गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 2,651 तक पहुंची। यानी आंकड़ों में गिरावट तो आई है पर बहुत धीरे-धीरे।
इलाकेवार स्थिति देखें तो कुछ ब्लॉकों में चिंता ज्यादा गहरी है। पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक अभनपुर और तिल्दा ब्लॉक सबसे ज्यादा प्रभावित रहे जहां आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 16.55 प्रतिशत बच्चे कुपोषित दर्ज किए गए। इसके अलावा धरसींवा, आरंग, मंदिर हसौद और रायपुर के कई हिस्सों में भी बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। खासकर रायपुर शहर के बस्ती और बीएसयूपी कॉलोनी वाले इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्र की प्रभारी प्रतिमा सिंह के मुताबिक भाठागांव क्षेत्र में ही करीब 42 बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में हैं। यह स्थिति साफ इशारा करती है कि कुछ इलाकों में बच्चों तक सही पोषण और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कुपोषण से बचने के लिए उपाय
बच्चों को कुपोषण से बचाने और उनकी सेहत बेहतर करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना, बच्चों का समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, जरूरी विटामिन देना और पोषण को लेकर जागरूक करना। अगर ये सभी कदम लगातार उठाए जा रहे हैं तो इन कोशिशों के बावजूद जमीनी हालात क्यों पूरी तरह बदलते नजर नहीं आ रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चों के कुपोषित मिलने से साफ है कि योजनाएं तो चल रही हैं पर उनका पूरा फायदा हर जरूरतमंद तक पहुंचना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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