खबर लहरिया Blog UP News: यूपी के लोहगरा रेलवे स्टेशन पर पानी की किल्लत, भीषण गर्मी में यात्री प्यास से परेशान

UP News: यूपी के लोहगरा रेलवे स्टेशन पर पानी की किल्लत, भीषण गर्मी में यात्री प्यास से परेशान

इस चिलचिलाती धूप और गर्मी में लोगों के लिए सफर करना तब भारी पड़ जाता है जब बोतल में रखा पानी खत्म हो जाए और आस पास पीने को पानी ही न मिले। देखने को भले ही टंकी, हैंडपंप और यहाँ तक की वॉटर कूलर में भी पानी न हो तो आपको गुस्सा आएगा, लेकिन आप प्यास के मारे कुछ नहीं कर पाएंगे। ऐसी ही हालत है उत्तर प्रदेश के लोहगरा और मझियारी रेलवे स्टेशन की।

Lohgara Railway Station

लोहगरा रेलवे स्टेशन (फोटो साभार: सुनीता)

रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – सुचित्रा 

गर्मियों के मौसम में अक्सर पानी की जरूरत बढ़ जाती है लेकिन कई जगह पानी की कमी की वजह से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई जगह जल स्तर नीचे चले जाने से भी हैंडपंप सूख जाते हैं इस वजह से पानी की व्यवस्था के लिए टंकी का इतंजाम किया जाता है। लोगों का कहना है कि यह पहाड़ी इलाका भी है इस वजह से यहां पानी का स्तर काफी नीचे पहुँच गया है।

लोहगरा रेलवे स्टेशन ज्यादा बड़ा नहीं है शायद इसलिए यहां इतना ध्यान नहीं दिया जाता। कई लोगों ने यह नाम पहली बार सुना होगा। लेकिन छोटे रेलवे स्टेशन की वजह से ही शायद यहां समस्या को देखते हुए भी नज़रअंदाज किया गया है। इस स्टेशन पर रोजाना 300 यात्री चढ़ते उतरते हैं। जहां सिर्फ दो ट्रेनें रुकती हैं। एक इटारसी पैसेंजर, जो छिवकी से आती है और दूसरी ग्वालियर की ओर से आने वाली ट्रेन। ये ट्रेनें सुबह और शाम के समय ही रुकती हैं, यानी स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही बहुत सीमित है।

लोहगरा स्टेशन पर रुकने वाली और आने जाने वाली रेल गाड़ियों की सूची (फोटो साभार: सुनीता)

यहां यात्रियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था लगभग न के बराबर है। जो हैंडपंप मौजूद हैं, उनसे गंदा और बदबूदार पानी निकलता है, जो पीने लायक नहीं होता। पानी की व्यवस्था के लिए अलग अलग जगह और अलग अलग प्रकार की टंकी की व्यवस्था की गई है लेकिन क्या फायदा जब उनमें पानी ही नहीं आता।

लोहगरा स्टेशन पर पानी व्यवस्था का हाल (फोटो साभार: सुनीता)

गर्मी में बढ़ जाती है परेशानी

बोरिंग करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि गर्मी के मौसम में हैंडपंप का जलस्तर 400 फीट नीचे चला जाता है। पहले जलस्तर 250 फीट था इसलिए पानी मिल जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया स्टेशन पर यह पानी की समस्या मार्च महीने से है। ऐसे में हैंडपंप में पानी बहुत देर से निकलता है या फिर लाल और जंग जैसा गंदा पानी आता है। कई बार आधा घंटा तक हैंडपंप चलाने के बाद भी साफ पानी नहीं मिल पाता।

यात्रियों की मजबूरी

बारा गांव की पार्वती बताती हैं कि जब वह इटारसी पैसेंजर ट्रेन से सफर करती हैं और ट्रेन देर तक स्टेशन पर रुक जाती है, तो पानी के लिए भटकना पड़ता है। स्टेशन पर कोई पक्की व्यवस्था नहीं है और हैंडपंप का पानी बदबूदार और गंदा होता है।

लोहगरा के धर्मराज का कहना है कि “ट्रेन रुकते ही यात्री बोतल लेकर पानी की तलाश में दौड़ पड़ते हैं, लेकिन ज्यादातर निराश होकर लौटते हैं। कई बार लोग हर नल और हैंडपंप चलाकर देख लेते हैं, लेकिन पानी नहीं मिलता।”

चन्नाड गांव की कलावती बताती हैं कि “मझियारी स्टेशन की हालत भी ऐसी ही है। ट्रेन लेट हो जाए तो घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं होती।”

नारीवारी गांव की कुन्ती कहती हैं कि “छोटे स्टेशनों पर गरीब परिवारों के लोग घंटों बैठकर ट्रेन का इंतजार करते हैं। अगर पानी गंदा भी हो, तो मजबूरी में वही पीना पड़ता है, क्योंकि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होता।”

पानी व्यवस्था जल्दी ही चालू करने का भरोसा

लोहगरा स्टेशन मास्टर आर.के. सरोज के अनुसार, गर्मी के मौसम में हैंडपंप अक्सर खराब हो जाते हैं या गंदा पानी देने लगते हैं। स्टेशन पर 24 टोटियों वाला बोर सिस्टम है, लेकिन कई बार टंकी में एयर आने से पानी सप्लाई रुक जाती है। छह हैंडपंप हैं, जिनमें से दो रिबोर में हैं और बाकी से भी देर से पानी निकलता है। हाल ही में एक फ्रीजर की व्यवस्था की गई है, जिसे जल्द चालू करने की बात कही गई है।

यह सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि एक ऐसी परेशानी है जो हर दिन सैकड़ों यात्रियों को झेलनी पड़ती है। प्यास से बेहाल लोग जब गंदा पानी पीने को मजबूर होते हैं, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए अगर यात्रियों को संघर्ष करना पड़े, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि इंसनियत को भी शर्मशार करती है।

 

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