महोबा के लाडपुर गांव में लगातार बारिश के बीच तीन पक्के मकान गिर गए, जिसमें परिवार मलबे में दब गया। ग्रामीणों ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, पर घर और सामान बर्बाद होने से परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया।
रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – रचना
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश और बाढ़ ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कितने लोग भारी बारिश और बाढ़ के कारण घर से बेघर हो गए हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की उफान से कई इलाकों में बाढ़ भी पहुंच चुका है।
इस बारिश का असर शहर के साथ-साथ गांवों में भी होने लगा है। बारिश के कारण लोगों के घरों के गिरने का खतरा बढ़ गया है।
महोबा जिले के जैतपुर ब्लॉक और कुलपहाड़ कोतवाली क्षेत्र के लाडपुर गांव में भी इसी बारिश के बीच 4 सितंबर की रात करीब एक बजे तीन पक्के मकान गिर गए।
खबर लहरिया के रिपोर्टिंग के दौरान पता लगा कि जिस समय मकान गिरे, एक पूरा परिवार घर के अंदर था। ये परिवार उसी गांव के रहने वाले देशराज कुशवाहा का था। अचानक एक दिवार गिरने से पति-पत्नी मलबे में दब गए। आवाज सुन कर गांव के लोग मौके पर पहुंचे और मलबा हटा कर परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला।
देशराज की पत्नी कमबोध कुमारी बताती हैं कि पहले एक दिवार गिरी उसके बाद देखते ही देखते तीनों पक्के मकान गिर गए। घर के अंदर रखा करीब चार टंकी यानी बीस कुंतल गेहूं, चावल, दाल, कपड़े, बिस्तर और बाकी और दूसरे घरेलू सामान मलबे में दबकर खराब हो गए।
कमबोध कुमारी कहती हैं “एक-एक पैसे के लिए तरस रहे हैं। अभी एक दिन का खाना पानी चलाना भी मुश्किल हो रहा है। हम बेघर हो गए हैं, और घर कैसे बनाएँगे?”
महंगाई में मकान बनाना मुश्किल
वहीं देशराज कुशवाहा ने भी अपनी पीड़ा बताई। उनके तीनों मकान करीब 15 साल पुराने थे लेकिन पक्के मकान थे। पिछले तक़रीबन एक महीने से लगातार बारिश हो रही थी और घर के आगे पीछे पानी बह रहा था। बारिश के पानी के वजह से मकानों में दरारें भी आ गईं थी, लेकिन ये उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मकान इस तरह गिर जाएगा।
अब उनका कहना है कि “आज की महंगाई में एक मकान बनाना इतना मुश्किल है, मेरे तो तीन मकान बारिश के कारण गिर गए। हमारा करीब दस लोगों का परिवार है और अब कहाँ रहेंगे पता नहीं।”
देशराज कुशवाहा के मुताबिक पीछे एक कमरा बचा है बस। पर लगातार बारिश में उसके भी गिरने का डर बना हुआ है। फ़िलहल अभी परिवार के पास खाना बनाने और रहने तक की भी जगह नहीं है।
छह-सात मकान पहले भी गिर चुके हैं
लाडपुर के बाकी ग्रामीणों के मुताबिक बारिश शुरू होने के बाद अब तक छह से साथ मकान गिर चुके हैं।
दूसरी ओर गांव के लेखपाल से बातचीत पर उनका कहना था कि घर गिरने की सूचना मिली। जिसके बाद परिवार की पासबुक और घर की तस्वीरें मंगाई है।
प्रधान ने क्या कहा?
साथ ही ग्राम प्रधान को भी मौके पर जाकर स्थिति देखने के लिए कहा है। उनका कहना रहा कि मौके पर पहुंच कर नुक़सान का आँकलन किया जाएगा। जिसके बाद रिपोर्ट तहसील भेजी जाएगी।
बारिश में घर गिरने से सरकारी प्रावधान – लेखपाल
वहीं लेखपाल के मुताबिक आपदा के तहत मकान गिरने पर सरकारी सहायता का प्रावधान है। लेकिन इस समय देशराज और उनका परिवार सरकारी मदद का इंतजार करने से पहले इस चिंता में है कि लगातार बारिश के बीच रात कहां बिताएंगे और अपना घर दोबारा कैसे खड़ा करेंगे।
बता दें इससे पहले भी इस बाढ़ के चलते गिरने वाले घरों का खबर लहरिया द्वारा रिपोर्ट किया गया है।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’


