खजुराहो के ये मंदिर सिर्फ पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि समय के उस आइने की तरह हैं जो हमें हमारे अतीत का एक उदार और भव्य चेहरा दिखाते हैं। ये दीवारें गवाही देती हैं कि प्रेम का स्वरूप हमेशा से इतना रूढ़िवादी या सीमित नहीं रहा, जितना हम आज समझते हैं। इन बेजोड़ मूर्तियों में हम प्रेम के हर रंग को देखते हैं। यहाँ समलैंगिकता के चित्रण भी मिलते हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि सदियों पहले हमारा समाज मानवीय भावनाओं और विविधताओं को स्वीकार करने में कितना सहज और साहसी था। यहाँ स्त्री और पुरुष का संबंध केवल प्रजनन की सामाजिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। इन पत्थरों में उकेरा गया हर स्पर्श, हर मुद्रा यह बताती है कि प्रेम—खुशी, उत्सव और चरम उल्लास का मार्ग भी है। खजुराहो हमें सिखाता है कि शरीर और आत्मा का मिलन वर्जना नहीं, बल्कि जीवन की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है।
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