महोबा जिले के कबरई ब्लॉक के पचपहरा गांव में कागजों पर साफ गांव का सपना दो साल पहले ही पूरा दिखा दिया गया था लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि कूड़ा घर आज भी खाली खड़ा है और पूरा गांव कूड़े और गंदगी के बीच जीने को मजबूर है।
रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – मीरा देवी
1 सितंबर 2023 को गांव में कूड़ा संग्रहण केंद्र (कूड़ा घर) बनाया गया था ताकि गांव साफ रहे और कचरा इधर उधर न फैले लेकिन आज यह केंद्र सिर्फ एक खाली ढांचा बनकर खड़ा है। करीब 1600 वोटर (मतदाता) वाले इस गांव में यह केंद्र तालाब के पास और बस्ती से कुछ दूरी पर बनाया गया था ताकि सभी लोग वहां कूड़ा डाल सकें। मौके पर देखा गया कि वहां एक भी कूड़ा नहीं है जबकि गांव की गलियों में हर तरफ गंदगी फैली हुई है।
गंदगी के बीच रोज गुजरते लोग
गांव की महिलाएं और बच्चे हर दिन इसी गंदगी के बीच से गुजरते हैं। पानी भरने के लिए भी उसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है जहां कूड़ा पड़ा रहता है। गांव की गोल्डी बताती हैं कि हमें कूड़े के ऊपर से पैर रखकर जाना पड़ता है। चाहे बारिश हो या तेज गर्मी हमें उसी रास्ते से पानी लेने जाना होता है। कूड़ा डालने की कोई तय जगह नहीं है इसलिए लोग जहां जगह मिलती है वहीं कूड़ा फेंक देते हैं।
कृष्ण का सवाल कूड़ा जाएगा कैसे?
गांव के कृष्णा कहते हैं कि सरकार ने कूड़ा घर तो बहुत अच्छा बनवाया है लेकिन कूड़ा जाएगा कैसे। जब कोई उठाने वाला ही नहीं आएगा तो लोग वहां क्यों जाएंगे। शहरों में गाड़ी आती है कूड़ा उठाने के लिए लेकिन गांव में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। लोग अपने घर के पास ही कूड़ा डाल देते हैं क्योंकि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
कूड़ा घर बना लेकिन बन गया दारू अड्डा
मनीष निगम बताते हैं कि यह कूड़ा घर (आरसी सेंटर) करीब एक साल पहले बनकर तैयार हो गया था लेकिन आज वहां कूड़ा नहीं बल्कि कुछ लोग बैठकर दारू पीते हैं। उन्होंने कहा कि जो जगह गांव को साफ रखने के लिए बनाई गई थी वही जगह अब गंदगी और गलत कामों का अड्डा बन गई है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को और परेशानी हो रही है।
तालाब का पानी भी हो रहा खराब
ईश्वर दास बताते हैं कि अगर यह कूड़ा घर सही से चलता तो नालियों का कूड़ा तालाब में नहीं जाता। अभी हालत यह है कि नालियों से कूड़ा सीधे तालाब में पहुंचता है। इसी तालाब के पानी से लोग नहाते हैं और कपड़े धोते हैं। इससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। सरकार की योजना अच्छी है लेकिन उसे चलाने की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
प्रधान और ग्राम रोजगार सेवक के दावे पर सवाल
ग्राम प्रधान जयकरण श्रीवास्तव और ग्राम रोजगार सेवक लतीफ़ खान का कहना है कि यह केंद्र गीले और सूखे कचरे के लिए बनाया गया है और वहां कूड़ा डलवाया भी जाता है। वहीं ग्राम रोजगार सेवक लतीफ़ खान बताते हैं कि यह कूड़ा डालने के लिए ही बनवाया गया है क्योंकि यह ग्राम पंचायत की जमीन पर बना है। उन्होंने कहा कि गांव के कुछ लोग यह कहते हैं कि यहां कूड़ा डालने से बदबू आएगी इसलिए विरोध करते हैं। अभी यहां मीटिंग हो जाती है लेकिन जिस दिन से यहां कूड़ा पड़ने लगेगा उस दिन से यहां मीटिंग नहीं की जायेगी हालांकि रिपोर्टिंग के दौरान कूड़ा घर पूरी तरह खाली मिला जिससे इन दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पैसे और जिम्मेदारी में अटकी सफाई
ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) विक्रमादित्य बताते हैं कि इस केंद्र पर करीब 4 लाख रुपये खर्च हुए हैं और कूड़ा उठाने के लिए रिक्शा भी रखा गया है लेकिन उसे चलाने के लिए किसी को मानदेय देना होगा। इसके लिए गांव के लोगों से 30 रुपये महीने देने को कहा गया लेकिन लोग तैयार नहीं हुए।
अब सवाल यह है कि जब योजना बनाई गई तो उसके संचालन का इंतजाम पहले क्यों नहीं किया गया। फिलहाल कूड़ा घर बना है लेकिन गांव अब भी गंदगी में जी रहा है।



