सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (26 मई) को अवैध रेत खनन के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों से कहा कि वे इस बात पर विचार करें कि चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन रोकने के लिए काम कर रहे वन रक्षकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो। यह मामला खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं।
चंबल घड़ियाल अभयारण्य एक संरक्षित क्षेत्र है, जहां नदी और वन्यजीवों को सुरक्षित रखना जरूरी होता है। लेकिन यहां अवैध रेत खनन लगातार जारी रहने की वजह से पर्यावरण और वन्यजीवों को नुकसान हो रहा है।
अवैध खनन की सुनवाई के दौरान आदेश
सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य और उसके आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन हो रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए कि वे इस अवैध खनन को रोकने के लिए तुरंत और प्रभावी कदम उठाएं।
अवैध खनन में लगी मशीन और वाहनों पर भी सख्ती
सुनवाई करने वाली पीठ ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे प्रभावित इलाकों में अवैध खनन और रेत ढोने में लगे वाहनों और मशीनों के खिलाफ सख्त, लगातार और मिलकर कार्रवाई करें।
वन रक्षक (Forest Guard) को लेकर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने खनन के इलाकों में वन रक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा वन विभाग में खाली पड़े वन रक्षकों (Forest Guards) के पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि अवैध खनन पर रोक लग सके।
अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वन रक्षकों पर हमले
द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में अवैध रेत खनन के दौरान वन रक्षकों पर हुए हमलों और मौतों के बाद आया है।
मध्य प्रदेश के मोरेना जिले में 8 अप्रैल को अवैध रेत खनन रोकने की कोशिश करते समय वन रक्षक हरिकेश गुर्जर एक ट्रक से कुचलकर मारे गए थे। इसी तरह राजस्थान के धौलपुर जिले में तैनात वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत भी खनन कर्ताओं के वाहन को रोकने की कोशिश में ट्रक की चपेट में आ गए थे।
इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराज़गी जताई थी और कहा था कि अगर राज्य सरकारें अवैध खनन रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठातीं, तो चंबल क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर भी विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकारों की लापरवाही और ढिलाई से यह साफ होता है कि अवैध खनन करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं और कानून व्यवस्था कमजोर पड़ रही है।
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