मध्य प्रदेश के सीधी जिले में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 53 महिलाओं की गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के बाद मौत हो गई। इनमें सबसे कम उम्र की महिला सिर्फ 19 साल की थी, जबकि मृत महिलाओं की औसत उम्र 26 साल थी। यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस की एक विस्तृत रिपोर्ट में सामने आई है।
सीधी जिला मध्य प्रदेश के उस आदिवासी बहुल क्षेत्र का हिस्सा है, जिसमें सिंगरौली, शहडोल, डिंडोरी, उमरिया और अनूपपुर जैसे जिले शामिल हैं। इस पूरे क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर लंबे समय से राज्य और राष्ट्रीय औसत से ज़्यादा रही है। दूर-दराज़ बस्तियां, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, कुपोषण, एनीमिया, खराब सड़क संपर्क और समय पर इलाज न मिल पाना जैसे कारण यहां गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ की अच्छी सुविधा नहीं बनाते। सीधी में स्थिति और गंभीर है, जहां मातृ मृत्यु दर मध्य प्रदेश के औसत से भी काफी ज्यादा दर्ज की गई है।

नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) पर आधारित भारत में मातृ मृत्यु दर पर विशेष बुलेटिन, 2020-22 |
भारत रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार
भारत में मातृ मृत्यु दर लगातार घट रही है। देश में अब प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 महिलाओं की मौत होती है। लेकिन मध्य प्रदेश में यह संख्या 159 है, जो देश के सबसे खराब प्रदर्शन वाले राज्यों में से एक है। वहीं सीधी जिले की मातृ मृत्यु दर 211 है, जो राज्य के औसत से भी काफी ज्यादा है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने मौत से जुड़े रिकॉर्ड देखे, जिला अस्पताल का दौरा किया और करीब 20 परिवारों से बात की। जांच में कई गंभीर बातें सामने आईं।
53 महिलाओं की मौत: कहां और कैसे हुईं मौतें?
मौत कहां हुई?
| जगह | मौतों की संख्या |
| श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा | 16 |
| अस्पताल पहुंचने के रास्ते में | 13 |
| घर पर | 13 |
| सीधी जिला अस्पताल | 5 |
| निजी अस्पताल | 4 |
| अन्य मेडिकल कॉलेज (रीवा) | 2 |
जिन मामलों में कारण पता चला, उनमें मौत की वजह क्या थी?
| कारण | मौतों की संख्या |
| प्रसव के दौरान या बाद में अत्यधिक रक्तस्राव | 12 |
| हाई ब्लड प्रेशर / एक्लेम्पसिया | 7 |
| गंभीर एनीमिया (खून की कमी) | 5 |
| संक्रमण (सेप्सिस आदि) | 4 |
| गर्भपात से जुड़ी जटिलताएं | 3 |
| प्लेटलेट्स की गंभीर कमी | 2 |
| हृदय विफलता | 1 |
| फेफड़ों में भोजन या तरल पहुंचना | 1 |
| एमनियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज्म | 1 |
| सांप के काटने से मौत | 1 |
| आत्महत्या | 1 |
| पोस्टमार्टम रिपोर्ट लंबित | 13 |
दिसंबर 2025 में हुई एक समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने माना था कि सीधी जिले में मातृ मृत्यु दर सबसे ज्यादा है। जिला अस्पताल के प्रमुख डॉक्टर को कारण बताने के लिए नोटिस भी जारी किया गया। नोटिस में खराब फैसले, सुविधाओं की कमी और सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक न पहुंचाने जैसी बातें सामने आयी। लेकिन समस्या सिर्फ डॉक्टरों की नहीं है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि पूरा स्वास्थ्य तंत्र भारी दबाव में काम कर रहा है।
सीधी जिला अस्पताल में एक साल में 10 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया गया और लगभग 6 हजार प्रसव हुए। लेकिन पूरे अस्पताल में सिर्फ एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ यानी बेहोशी का डॉक्टर है। यही कारण है कि कई जटिल मामलों को दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता है।अस्पताल में चार स्त्री रोग विशेषज्ञों की जरूरत है, लेकिन पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। खून की कमी भी एक बड़ी समस्या है।
आदिवासी इलाकों में महिलाओं में एनीमिया ज्यादा है, पोषण की कमी है और कई गांव दूर-दराज के इलाकों में बसे हैं। लेकिन ये कारण हम सालों से सुनते आ रहे हैं। सीधी की ये 53 मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। ये उस स्वास्थ्य व्यवस्था की कहानी हैं जहां अस्पतालों में डॉक्टर कम हैं, खून नहीं है, दवाएं नहीं हैं, एंबुलेंस पर्याप्त नहीं हैं और कई महिलाओं को समय पर इलाज तक नहीं मिल पाता। ऐसे में गर्भावस्था, जो एक सामान्य प्रक्रिया होनी चाहिए, कई महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
सीधी जिले की एक महिला लीला साहू ने इसी मामले को उठाने के लिए अपना यूट्यूब चैनल बनाया जिसमे वो अपने घर के पास की सड़क की हालत दिखाती हैं और मांग करती हैं की सड़क ठीक की जाए। लीला खुद उस वक़्त एक गर्ववती महिला थी। जब उन्होंने एक मामला उठाया तोह वहां के सांसद राजेश मिश्रा ने कहा की वो अपनी डिलीवरी डेट बता दें, हम हेलीकाप्टर पंहुचा देंगे जिसपर लीला साहू ने कहा वो हेलीकाप्टर से नहीं जाना चाहती और केवल वो अकेली एक गर्ववती महिला नहीं हैं, गांव में और भी महिलाएं हैं, बीमार मरीज़ हैं।
ऐसी दिक्कतें भी ज़्यादा मातृ मृत्यु दर का कारण हैं जिसे सरकार गंभीरता से नहीं लेती।
