मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में इन दिनों पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। गांव हो या शहर, हर जगह लोग पानी की किल्लत से परेशान हैं। बढ़ती गर्मी के कारण लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई इलाकों में लोग घंटों लाइन में लगकर पानी भरने को मजबूर हैं तो कहीं कई दिनों तक पानी की सप्लाई ही नहीं हो रही है।
रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – रचना
बीते कुछ सालों से गर्मी से हाल बेहाल नजर आ रहा है। देश के कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। इस गर्मी में सबसे बड़ी समस्या बन कर जो सामने आ रही है वो है पानी। पानी की एक एक बूँद के लिए लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। तेज गर्मी के कारण कई जगहों पर तालाब, कुएँ और हैंडपंप सूखने लगे हैं। इन दिनों हालत ऐसे हैं कि लोगों को पानी के लिए मिलो दूर का सामना करना पड़ रहा है या फिर कड़कती धूप में पानी का इंतिज़ार।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में भी यही हाल देखने को मिल रहा है। जिले के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी की कमी साफ नजर आने लगी है। कई गांवों के हैंडपंप जवाब दे चुके हैं तो कहीं पानी इतना नीचे चला गया है कि लोगों को दूर-दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ रही है। सुबह होते ही लोग बाल्टी, डिब्बे और बर्तन लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ते हैं। कई लोग साइकिल और बाइक से कई किलोमीटर दूर जाकर पानी भरने को मजबूर हैं।
दरअसल मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में इन दिनों पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। गांव हो या शहर, हर जगह लोग पानी की किल्लत से परेशान हैं। बढ़ती गर्मी के कारण लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई इलाकों में लोग घंटों लाइन में लगकर पानी भरने को मजबूर हैं तो कहीं कई दिनों तक पानी की सप्लाई ही नहीं हो रही है। छतरपुर शहर के लक्ष्मी वार्ड नंबर 15 में रहने वाले लोगों का कहना है कि मोहल्ले के लगभग हर घर में पानी का कनेक्शन है लेकिन इसके बावजूद पानी की सप्लाई नियमित नहीं हो पा रही है। हालत यह है कि कई बार पांच-पांच दिन तक पानी नहीं आता। मोहल्ले की आबादी करीब 3000 बताई जा रही है और लोग पूरी तरह सप्लाई के पानी पर ही निर्भर हैं। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी है उन्होंने अपने घरों में बोरिंग और मोटर लगवा रखी है। लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिनके पास सप्लाई के पानी के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं है। गर्मी शुरू होने के बाद से पानी की दिक्कत और ज्यादा बढ़ गई है। लोगों को रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो रही है।
पानी के लिए 1 किलोमीटर तक रास्ता तय करते ग्रामीण
वहीं ग्रामीण इलाकों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। ओरछा थाना क्षेत्र के चौकी पुरवा गांव में हर साल गर्मियों के मौसम में पानी की समस्या बनी रहती है। पथरीला इलाका होने के कारण यहां पानी जमीन के काफी नीचे चला जाता है जिससे पानी की समस्या दोगुना बढ़ जाती है। करीब 2000 की आबादी वाले इस गांव में सिर्फ तीन हैंडपंप हैं। इनमें से भी केवल एक हैंडपंप ही ठीक हालत में है जिससे पूरे गांव के लोग पानी भरते हैं। कई बार उसमें भी बहुत कम पानी निकलता है। भीषण गर्मी और करीब 40 डिग्री तापमान की वजह से वाटर लेवल लगातार नीचे जा रहा है। गांव के ज्यादातर हैंडपंप सूख चुके हैं। पानी भरने के लिए लोगों को करीब 1 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है। वे लोग सुबह 4 बजे से ही लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं और कई घंटों इंतजार के बाद करीब 7 बजे तक पानी मिल पाता है।
एक हैंडपंप से पूरा गांव भरता है पानी
पुरवा गांव में रहने वाली गायत्री अहिरवार बताती हैं कि वह रोज सुबह 4 बजे अपने गांव से पैदल चलकर चार डिब्बे लेकर आती हैं और यहां नंबर लगाकर बैठ जाती हैं। कभी-कभी उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है तो कभी एक-दो घंटे में पानी मिल जाता है। उनका कहना है कि पानी की इतनी ज्यादा समस्या है कि लोगों को नहाने-धोने के लिए पानी ही नहीं मिल पाते हैं।
वहीं, चौकी पुरवा गांव के ही निवासी कल्लू अहिरवार बताते हैं कि वह मजदूरी करते हैं। दिनभर मजदूरी करने के बाद जब घर लौटते हैं तो उनकी पत्नी हैंडपंप पर नंबर लगाए बैठी रहती है। पहले पानी भरते हैं उसके बाद खाना नसीब होता है। उनका कहना है कि अगर सुबह पानी भरने आना हो तो वह पहले 5 बजे आकर पानी भरते हैं और उसके बाद मजदूरी करने जाते हैं। गांव में पानी की इतनी ज्यादा समस्या है कि अगर यह एक हैंडपंप भी बंद हो जाए तो आधा गांव प्यासा रह जाए। गांव में नल-जल योजना भी नहीं है और एक ही हैंडपंप से पूरा गांव पानी भरता है जिसके कारण काफी दिक्कत होती है। कई बार पानी को लेकर झगड़े तक हो जाते हैं और पुलिस तक बुलानी पड़ जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पार्षद से शिकायत की लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला सुधार नहीं हुआ। अगर शहरों की बात करें तो वहां नल-जल योजना आने के बाद भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। घर-घर कनेक्शन तो हो चुके हैं लेकिन कई बार 4 से 5 दिन तक नल नहीं आते। ऐसे में लोगों को टैंकर मंगवाकर पानी भरना पड़ता है और पीने का पानी कैंपर से खरीदना पड़ता है और महंगाई के इस दौर में एक कैंपर करीब 20 रुपये का आता है।महीने में चार से पांच सौ पानी के कैंपर में चला जाता है।
नल जल योजना क्या है
बता दें नल जल योजना (जिसे अधिकारिक तौर पर जल जीवन मिशन भी कहा जाता है) की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 15 अगस्त 2019 को गई थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर में व्यक्तिगत नल कनेक्शन के माध्यम से स्वच्छ और पर्याप्त पेय जल उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार नल जल योजना (PHED) के तहत 73% से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ पेय जल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार द्वारा कई ग्रामों को ‘हर घर जल’ ग्राम घोषित किया गया है।
ये तो बात हो गई नल जल योजना जो सरकार द्वारा चलाई गई है लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही कहती है। ज़मीन की हक़ीकत जिस तरह दिख रही है उससे लगता है मानो पानी की यह योजना सिर्फ फ़ाइलों में ही दबी हुई है।
नल-जल योजना तो आई लेकिन पानी नहीं आई
चौकी पुरवा गांव की शाहजहां बेगम बताती हैं कि उनके घर में 12 लोगों का परिवार है और एक कैंपर से काम नहीं चलता। उन्हें रोज कई कैंपर खरीदने पड़ते हैं। उनके पति रिक्शा चलाते हैं और रोज की कमाई में से करीब 100 रुपये सिर्फ पीने के पानी पर खर्च हो जाते हैं। उनका कहना है कि नल-जल योजना तो आ गई लेकिन पानी की समस्या आज भी बनी हुई है। गर्मियों के दिनों में परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है।
वहीं मुन्नी बेगम बताती हैं कि वह दूसरे लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा का काम करती हैं और उनके तीन छोटे बच्चे हैं। सुबह उठते ही सबसे पहले पानी की चिंता होती है। अगर नल आ जाए तो पानी भर लेती हैं लेकिन जब कई दिनों तक सप्लाई नहीं आती तो मोहल्ले के करीब 10 लोग मिलकर लगभग 450 रुपये का टैंकर मंगवाते हैं और पानी स्टोर करके रखते हैं। “जब पानी भर जाता है तभी लगता है कि दिन का सबसे बड़ा काम पूरा हुआ।”
जब खबर लहरिया द्वारा यहां रिपोर्टिंग किया गया तो देखा गया कि लोग साइकिलों पर चार-चार डिब्बे रखकर पानी भरने आ रहे थे। छोटे-छोटे बच्चे भी पानी भरने के लिए लाइन में लगे हुए थे। जब बच्चों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वे लोग पहले पानी की तलाश में रहते हैं पढ़ाई बाद में करते हैं।
गर्मी के दिनों में जब पानी नहीं मिलता तो सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ती है। घर का सारा काम जैसे खाना बनाना, बर्तन धोना, कपड़े साफ करना और बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं पर ही हो जाती है। ऐसे में पानी की कमी उनके लिए बड़ी मुश्किल बन जाती है। कई महिलाएं मजदूरी करने भी जाती हैं लेकिन पानी भरने की वजह से कई बार समय पर काम पर नहीं पहुंच पातीं।
महिलाओं ने बताया कि सुबह का ज्यादातर समय पानी भरने में ही निकल जाता है। एक परिवार में रोज कम से कम 10 डिब्बे पानी की जरूरत पड़ती है लेकिन उतना पानी मिल ही नहीं पाता। ऐसे में उन्हें बहुत संभालकर पानी इस्तेमाल करना पड़ता है। उनका कहना है कि घर की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है इसलिए पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर भी उन्हीं पर पड़ता है।
वार्ड पार्षद और अधिकारी का पक्ष
जब इस बारे में वार्ड पार्षद गट्टी यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कई बार नल-जल योजना के तहत पानी की सप्लाई बाधित हो जाती है। नदी-नहरों के सूखने और बिजली बंद होने की वजह से पानी की टंकियां समय पर नहीं भर पातीं जिसके कारण मोहल्लों में सप्लाई रोकनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल नगर पालिका की ओर से टैंकर भेजकर लोगों की मदद की जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि लोग अपने पैसे से टैंकर मंगवा रहे हैं। अब जरूरत पड़ने पर नगर पालिका की ओर से निशुल्क टैंकर उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
वहीं, इस मामले में कार्यपालन मंत्री संजय कुबरी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि चौकी पुरवा गांव में पानी सूखता जा रहा है। वहां नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का काम प्रस्तावित है और जल्द ही हर घर तक कनेक्शन पहुंचाने की तैयारी की जा रही है ताकि ग्रामीणों को पानी की समस्या से राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि वे लोग लगातार शिकायत करते हैं पर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। इस बात पर उनका कहना था कि गांव की सरपंच भी पानी की समस्या से जूझ रही हैं। फिलहाल ग्राम पंचायत की तरफ से जरूरत पड़ने पर टैंकर मंगवाए जाते हैं जिससे कुछ समय के लिए लोगों को राहत मिल जाती है।
जानकारी के मुताबिक छतरपुर जिले में अभी करीब 75 से 80 प्रतिशत लोगों को नल-जल योजना का लाभ मिल चुका है। बाकी बचे इलाकों में काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन जगहों पर अभी योजना का काम पूरा नहीं हुआ है वहां भी जल्द से जल्द कनेक्शन पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
देश के बाकी राज्यों में भी पानी की समस्या (खबर लहरिया द्वारा रिपोर्ट)
अगर हम देखें तो पानी की समस्या सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं है। खबर लहरिया द्वारा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी कई ग्राउंड रिपोर्टिंग किया गया है जिसमें ये सामने आया है कि पानी की समस्या नई नहीं है और इस साल बीते सालों से भी ज़्यादा पानी की समस्याओं की खबर मिली है।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के पहाड़ी ब्लॉक की ग्राम पंचायत पथरा मानी में भी रिपोर्टिंग से पता लगा कि ‘हर घर जल योजना’ के दावे अधूरे हैं। गांव के कई परिवार आज भी साफ पानी से वंचित हैं और मजबूरी में तालाब का गंदा पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
गांव पथरा के ऊंचाई वाले हिस्सों में रहने वाले लोगों को रोज करीब 2 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। कुएं सूख चुके हैं एक हैंडपंप खराब है और दूसरा खारा पानी देता है। ऐसे में गांव के लोग, बच्चे और जानवर एक ही तालाब के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं जल निगम का कहना है कि गांव में हर घर नल लगाए गए हैं लेकिन कुछ लोग टुल्लू पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक के मबईया पहलवान गांव में वही भीषण जल संकट देखने को मिला। गांव में लगी सौर ऊर्जा की पानी टंकियां लंबे समय से खराब पड़ी हैं और हैंडपंप भी काम नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जो पानी निकलता भी है वह बेहद गंदा और मिट्टी जैसा होता है।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा और बलौदा बाजार जिले के गांवों में “जल जीवन मिशन” की जमीनी हकीकत भी सामने आई।
सरकार का दावा है कि हर घर तक नल से पानी पहुंचाया जा रहा है लेकिन गांवों में आज भी लोग पानी के लिए परेशान हैं। इस ग्राउंड रिपोर्ट में पहुंचे ग्राम पंचायत कोहका और खोसड़ा जहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया। कहीं पाइपलाइन अधूरी है कहीं पाइप टूटे पड़े हैं, तो कहीं नल उखड़े हुए हैं।
महोबा में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट लगातार गहराता नजर आया। कई इलाकों में लोगों को पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी का टैंकर भी एक दिन छोड़कर आता है जिससे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
पानी की समस्या से संबंधित और भी वीडियो या आर्टिकल खबर लहरिया के चैनल और वेबसाइट पर देखने की मिल जाएगी।
इसके अलावा अन्य राज्यों में भी पानी की समस्या की खबरें आईं हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें छोटी लड़कियाँ जान जोखिम में डालकर गहरे कुएँ से रस्सी के सहारे उतर कर पानी भरने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के धूलकोट इलाके की भगवानिया ग्राम पंचायत के सरबद (रेखलिया झिरा फलिया) का है।
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सबसे गर्म देश में भारत का नाम भी शामिल आख़िर क्यों?
इस समय भारत दुनिया के सबसे गर्म देशों में गिना जा रहा है। रियल टाइम ग्लोबल तापमान रैकिंग के मुताबिक दुनिया के सबसे गर्म शहरों में भारत एक है। उत्तर प्रदेश राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना ओड़िसा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सबसे ज़्यादा गर्मी रिकॉड किया गया है। इसी बढ़ते तापमान इ वजह से लोगों के स्वास्थ्य और रोज़मर्रा के जीवन पर असर पड़ रहा है।
– अब समझते हैं कि इतनी तेज गर्मी होने का कारण क्या है? दरअसल पेड़-पौधे प्राकृतिक रूप से तापमान को नियंत्रित रखने का काम करते हैं इसलिए उन्हें प्रकृति का प्राकृतिक एयर कंडिशनर भी कहा जा सकता है। लेकिन तेजी से हो रही जंगलों की कटाई ने मौसम का संतुलन बिगाड़ दिया है। खेती उद्योग और निर्माण कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में पेड़ काटे जा रहे हैं। इससे लू बढ़ रही है और इसका असर पहले से ज़्यादा ख़तरनाक हो गया है। कई शहरों में हरित क्षेत्र लगातार कम हो रहे हैं जिससे ज़मीन और आसपास का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है, नदियों को बांध बना दिया जा रहा है, कुएँ लगभग खत्म की कगार पर है, बड़ी बड़ी कंपनियाँ खुल रही हैं, पहाड़, जंगलों की कटाई की जा रही है और इतनी गर्मी बढ़ने का यह मुख्य कारण है। जैसे छत्तीसगढ़ का हसदेव, राजस्थान का अरावली आदि।
– भारत में तेजी से शहरों का विस्तार हो रहा है। नई नई इमारतें सड़कें और कंक्रीट के ढाँचे लगातार बढ़ रहे हैं जबकि हरियाली कम होती जा रही है। इससे “हीट आइलैंड इफेक्ट” की समस्या पैदा हो रही है। शहरों में कंक्रीट का डामर दिन भर गर्मी सोखते हैं और रात में धीरे धीरे छोड़ते रहते हैं। इसी वजह से दिल्ली, महाराष्ट्र और अहमदाबाद जैसे शहरों में गांव के मुक़ाबले ज़्यादा तापमान दर्ज किया जाता है। लगातार शहरों में बढ़ती बड़ी बड़ी गाड़ियाँ उससे निकलने वाले धुएँ और गैस भी कहीं न कहीं पर्यावरण पर प्रभाव डालता है।
इस बढ़ती गर्मी का सबसे ज़्यादा असर गरीब और मज़दूर तबके पर पड़ रहा है जो झोपड़ी या फुटपाथ पर रह कर दो वक्त की रोटी कमा रहे हैं उन पर पड़ रहा है। जिन लोगों के पास एसी कूलर या पानी ख़रीदने की सुविधा नहीं है वही सबसे ज़्यादा परेशान हैं। कई परिवारों को रोज पानी ख़रीदना पड़ रहा है तो कई गांवों में लोग घंटो लाइन में लग कर एक बाल्टी पानी के लिए राह देखते हैं। तेज गर्मी के वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं लू, डिहाइड्रेशन और थकान जैसे समस्याएँ भी हो रही है। दूसरी तरफ बिजली कटौती और गर्मी के कारण आग लगने की घटनाएँ भी बढ़ रही हैं। खेत, जंगल और घर तक आग की चपेट में आ रहे हैं।
देखा जाए तो सरकार की योजनाएँ कागज़ों में भले ही सफल दिखाई देती हों पर ज़मीन पर पानी जैसे बुनियादी जरुरत के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं। अगर समय रहते पेड़ की कटाई नहीं रोकी गई जल स्त्रोतों को नहीं बचाया गया और पर्यवारन को नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में स्थती और भी ज़्यादा गंभीर हो सकती है। आख़िरकार प्रकृति में हो रहे बदलावों का सबसे ज़्यादा असर आम लोगों के जीवन पर ही पड़ता है। जहां अभी लोग पानी की बूँद के लाइट भटक रहे हैं।
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