शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित विमुक्त, घुमंतू और अर्द्ध-घुमंतू (DNT/NT/SNT) समुदायों के लिए केंद्र सरकार की SEED योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 7 जुलाई 2026 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत 1.10 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है। इसके लिए सरकार ने 53.06 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके।

7 जुलाई को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज़ (फोटो साभार: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय)
देश में कुछ ऐसे समुदाय भी हैं, जो आज़ादी के 75 साल बाद भी शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं ले पाए हैं? इन्हीं लोगों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने शुरू की है SEED योजना।
SEED योजना क्या है?
SEED का पूरा नाम है स्कीम फॉर इकोनॉमिक एम्पावरमेंट ऑफ डीएनटीज़ हिंदी में कहें तो विमुक्त, घुमंतू और अर्द्ध-घुमंतू समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण की योजना। यह योजना केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है। इसकी शुरुआत 16 फरवरी 2022 को की गई थी। इसका उद्देश्य विमुक्त (DNT), घुमंतू (NT) और अर्द्ध-घुमंतू (SNT) समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी सुविधाओं से जोड़कर उनका आर्थिक और सामाजिक विकास करना है।
अब आप सोच रहे होंगे विमुक्त (DNT), घुमंतू (NT) और अर्द्ध-घुमंतू कौन होते हैं या फिर क्या आप तो नहीं आते इस श्रेणी में? तो चलिए हम एक एक कर के बताते हैं।
विमुक्त समुदाय वे लोग हैं जिन्हें अंग्रेज़ों के समय गलत तरीके से अपराधी घोषित कर दिया गया था। आज़ादी के बाद यह कानून खत्म कर दिया गया, लेकिन इन समुदायों के कई परिवार आज भी पिछड़े हुए हैं। आज ये देश के अलग-अलग राज्यों में रहते हैं और सामान्य नागरिकों की तरह जीवन जीते हैं, लेकिन इनमें से कई परिवार अब भी आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं।
घुमंतू समुदाय वे लोग हैं जो अपने काम के लिए एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं। घुमंतू वे लोग होते हैं जिनका कोई स्थायी घर या गांव नहीं होता। ये रोज़गार या पारंपरिक काम की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं। इनमें पशुपालन करने वाले, लोक कलाकार, सपेरे, बंजारा, नट और ऐसे कई समुदाय शामिल हैं, जो अलग-अलग राज्यों में अपनी आजीविका के लिए लगातार यात्रा करते रहते हैं।
अर्द्ध-घुमंतू समुदाय वे लोग हैं जिनका घर तो होता है, लेकिन वे साल के कुछ समय के लिए काम की तलाश में दूसरे इलाकों में चले जाते हैं। अर्द्ध-घुमंतू वे लोग होते हैं जिनका एक स्थायी ठिकाना तो होता है, लेकिन साल के कुछ महीनों में काम या रोज़गार के लिए दूसरे इलाकों में चले जाते हैं। काम पूरा होने के बाद वे वापस अपने घर लौट आते हैं।
SEED योजना का मुख्य उद्देश्य
पहला, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को अच्छी कोचिंग की सुविधा।
दूसरा, पात्र परिवारों को स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से जोड़ना।
तीसरा, स्वरोजगार और आजीविका बढ़ाने के लिए सहायता देना।
चौथा, जिन परिवारों के पास पक्का घर नहीं है, उन्हें सरकारी आवास योजनाओं से जोड़ने में मदद करना।
SEED योजना से मिलने वाले लाभार्थियों का आंकड़ा
सीड योजना के बारे में जानकारी देते हुए 1 अप्रैल 2025 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया। इसमें बताया गया कि 2023-24 व 2024-25 के दौरान 62,936 लोगों को इसका लाभ मिला है।
SEED योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
- सबसे पहले SEED योजना के आधिकारिक पोर्टल https://dwbdnc.dosje.gov.in/content/seed-schemeपर जाएं।
- इसके बाद अपना रजिस्ट्रेशन करें।
- फिर आवेदन फॉर्म भरें और आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, समुदाय से संबंधित प्रमाण पत्र, बैंक खाते की जानकारी और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।
आपको यह बात ध्यान रखनी होगी कि सिर्फ पंजीकरण करने से योजना का लाभ मिलना तय नहीं होता। पहले सरकार आपके दस्तावेज़ और पात्रता की जांच करेगी। यदि आप सभी शर्तें पूरी करते हैं, तभी आपको योजना का लाभ मिलेगा।
अगर आपके पास इस योजना के लिए अलग से मांगा गया प्रमाण पत्र नहीं है, तो आप अपना जाति प्रमाण पत्र भी जमा कर सकते हैं। इसे मान्य दस्तावेज़ माना जाएगा।
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