खबर लहरिया Blog 10 साल की जेल, 10 करोड़ रु का जुर्माना, जानें पेपर लीक कानून में क्या बदलने वाला है।

10 साल की जेल, 10 करोड़ रु का जुर्माना, जानें पेपर लीक कानून में क्या बदलने वाला है।

2026 के संशोधन बिल में संगठित पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों के लिए कम से कम 7 साल की जेल और कम से कम 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रस्ताव है। साथ ही ऐसे मामलों की तेज और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ़) गठित करने का भी प्रावधान भी किया गया है।

पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन की तस्वीर (फोटो साभार: खबर लहरिया)                  

देश में NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर क़ानून में बदलाव  किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन (बदलाव) के लिए पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 संसद में पेश किया गया है। यानी 2026 के संशोधन बिल में पेपर लीक, संगठित नकल माफिया और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इसके तहत पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में सजा और जुर्माने को बढ़ाने, जांच के लिए विशेष व्यवस्था करने, मामलों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था करने और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही को और सख्त बनाने का प्रावधान किया गया है।

2026 के संशोधन बिल में मुख्य बदलाव ये हैं – 

व्यक्तिगत तौर पर नकल या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर सजा

2024 का कानून –

3 से 5 साल तक की जेल

– अधिकतम 10 लाख रुपये तक जुर्माना

2026 संशोधन बिल (प्रस्तावित)

5 से 10 साल तक की जेल

– अधिकतम 50 लाख रुपये तक जुर्माना

एक करोड़ का जुर्माना 

2026 के संशोधन बिल में संगठित पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों के लिए कम से कम 7 साल की जेल और कम से कम 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रस्ताव है। साथ ही ऐसे मामलों की तेज और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ़) गठित करने का भी प्रावधान भी किया गया है।

त्वरित न्यायालय कोर्ट में होगी सुनवाई

2026 के संशोधन बिल में परीक्षा से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों के लिए अलग अदालतें तय करनी होंगी जहां रोज़ाना सुनवाई हो और बार-बार तारीख देने से बचा जाए। सरकार चाहती है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद जहां तक संभव हो तीन महीने के भीतर मामले का फैसला हो जाए। साथ ही पहले से लंबित मामलों की सुनवाई भी इन्हीं अदालतों में की जाएगी। सरकार के अनुसार इसका मकसद यह है कि पेपर लीक जैसे मामलों में जांच और मुकदमे सालों तक लंबित न रहें और दोषियों पर जल्दी कार्रवाई हो सके।

जांच करने के लिए दो महीने का समय 

2026 के संशोधन बिल में जांच के लिए भी तय समयसीमा रखने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। यह समयसीमा राज्य पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और ऐसे मामलों की जांच के लिए गठित विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) पर लागू होगी। सरकार का मानना है कि जांच में देरी होने से दोषियों पर कार्रवाई कमजोर पड़ती है और लोगों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा भी कम होता है।

विशेष कार्य बलों का गठन 

2026 के संशोधन बिल में केंद्र सरकार को परीक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। ये टीमें बड़े और संगठित पेपर लीक नेटवर्क की स्वतंत्र जांच कर सकेंगी। 

इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने होंगे। वहीं अपीलों की सुनवाई सीधे हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ करेगी और कोशिश होगी कि उनका निपटारा भी तीन महीने के भीतर कर दिया जाए।

बता दें इस क़ानून का प्रस्ताव रखा गया है हालांकि संसद के दोनों सदनों में हंगामे के बीच अब तक इस पर चर्चा शुरू नहीं हो पाई है। 

 

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