2024 में भारत में 5,737 दहेज हत्याएं दर्ज हुईं। यानी हर दिन औसतन 16 महिलाओं की मौत दहेज की वजह से हुई। लेकिन क्या यही पूरी सच्चाई है? नहीं। दहेज से जुड़ी कई मौतें कभी NCRB के आंकड़ों तक पहुंचती ही नहीं हैं। कई मामलों में FIR दर्ज नहीं होती, कई परिवार समझौते के दबाव में चुप हो जाते हैं, और कई मौतों को आत्महत्या या हादसा मानकर दर्ज कर लिया जाता है। ऐसे में दहेज से जुड़ी अनगिनत मौतें सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रह जाती हैं। खबर लहरिया ने पिछले कई सालों में दहेज हत्या और दहेज उत्पीड़न के न जाने कितने मामले रिपोर्ट किए हैं। लेकिन इन खबरों के बावजूद दहेज को लेकर समाज में गंभीर चर्चा कम दिखाई देती है। उल्टा सोशल मीडिया पर दहेज को लेकर जोक्स, मीम्स और रील्स की भरमार है। कहीं दहेज में मिली कार का मजाक बनाया जाता है, तो कहीं शादी को कमाई का जरिया बताकर हंसी-मजाक किया जाता है। इस सबके बीच दहेज की वजह से मरने वाली महिलाओं की कहानियां पीछे छूट जाती हैं। इस एपिसोड में कविता बुंदेलखंडी बात कर रही हैं दहेज हत्या के आंकड़ों, आंकड़ों से बाहर रह जाने वाले मामलों, कानून की चुनौतियों और उस समाज की, जहां हजारों महिलाओं की मौत के बावजूद दहेज पर मजाक बंद नहीं हुआ है।
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