खबर लहरिया Blog Palash/Flame of the Forest: छुयूल (पलाश) का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर, क्या है उपयोग जानें 

Palash/Flame of the Forest: छुयूल (पलाश) का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर, क्या है उपयोग जानें 

इस समय गर्मी अपने चरम पर है। इस मौसम में अक्सर लोगों की नाक से खून (नाक फूटना) आने की समस्या भी हो जाती है। छुयूल (पलाश) के फूल औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं। आज भी गांव-देहात के लोग इनका उपयोग पारंपरिक जड़ी-बूटी के रूप में विभिन्न घरेलू उपचारों में करते हैं।

छुयूल (पलाश) के फूल (फोटो साभार: श्यामकली)

रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – सुचित्रा 

यूपी के महोबा ब्लॉक के कबरई गांव के लोग छुयूल (पलास) के फूल, पत्तों और रंगों का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण इलाकों इस तरह के कई पेड़ मौजूद होते हैं जिनकी जानकारी वहां के निवासियों को खासतौर पर पता होती हैं। क्योंकि उनके पूर्वजों द्वारा इन्हें आषौधि के रूप में उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इस वजह से आज भी यहां के लोग इन्हीं नुस्खों को इस्तेमाल करते हैं। 

टेसू के फूल, उत्तर प्रदेश का राजकीय फूल हैं जो चित्रकूट, मानिकपुर, बाँदा, महोबा और मध्य प्रदेश से जुड़े बुंदेलखंड में पाया जाता है। ये अपने रंग और औषधीय गुणों की खेती के लिये प्रचलित है। कहा जाता है कि इस फूल में कोई खूशबू नहीं होती लेकिन इसकी गोंद, पत्ता, पुष्प, जड़ समेत पेड़ का हर हिस्सा काफी फायदेमंद होता है। टेसू के फूल को पलाश, परसा, ढाक, किशक, सुपका, ब्रह्मवृक्ष और फ्लेम ऑफ फोरेस्ट आदि नामों से भी जानते हैं। 

छुयूल (पलाश) फूलों से रंग 

वहां के निवासी मोहित बताते हैं कि जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तब हमारे गुरुजी भी बताते थे कि पहले के समय में छुयूल (पलास) के फूल से रंग बनाया जाता था जो स्क्रीन प्रिंटिंग के लिए भी उपयोगी माना जाता था। आज-कल उससे रंग नहीं बनाया जाता लेकिन यह अभी भी पीने के लिए इस्तेमाल होता है। कई जगह इसी फूल के रंगों से होली खेली जाती है। 

मोहित पलाश के फूल को ले जाते हुए (फोटो साभार: श्यामकली)

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गोहाईडी  खुडा की निवासी एक दादी बताती हैं कि यदि किसी व्यक्ति को तेज धूप और गर्मी के कारण लू लग जाए या शरीर में तेज बुखार चढ़ जाए तो छुयूल (पलास) के फूल को पीसकर उसका लेप पूरे शरीर पर लगाया जाता है। उनके अनुसार इससे शरीर की गर्मी कम होती है और बुखार उतरने में भी राहत मिलती है।

पलाश के फूल से रंग निकलता है- दादी अपने हाथों में लगाकर दिखाती हुई। (फोटो साभार: श्यामकली)

छुयूल (पलाश) के पत्तों का इस्तेमाल 

रुचि बताती हैं कि छुयूल (पलाश) का पेड़ बहुत उपयोगी होता है। इसकी लकड़ी धार्मिक कार्यों में विशेष रूप से प्रयोग की जाती है। विवाह जैसे शुभ अवसरों पर इसकी लकड़ी से मंडप भी बनाया जाता है।

पलाश के पत्तों का उपयोग पत्तल और दोना बनाने में किया जाता है। आज भी कई स्थानों पर इनका उपयोग भोजन परोसने के लिए किया जाता है। ये प्राकृतिक, पर्यावरण-अनुकूल और आसानी से नष्ट होने वाले होते हैं इसलिए इनका महत्व आज भी बना हुआ है।

इसके अलावा, पलाश के पत्तों का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के चारे, पारंपरिक पैकिंग तथा कुछ स्थानों पर पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है।

छुयूल (पलाश) के फूल दवाई का काम 

महोबा जिले के सिरसी कला गाँव के मजरा न्यूरिया की निवासी श्रीमती श्याम देवी बताती हैं कि लगभग दो वर्ष पहले उनकी एक भैंस बीमार हो गई थी। उन्होंने कई तरह की दवाइयाँ दिलवाईं लेकिन कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। तभी किसी परिचित ने उन्हें एक पारंपरिक घरेलू उपाय बताया।

उन्होंने बताया कि शाम के समय छुयूल (पलाश) के फूलों को मिट्टी में दबा दिया जाता है। अगले दिन सुबह उसी मिट्टी को भैंस के शरीर पर लगाया जाता है। उन्होंने लगातार 15 दिनों तक यही उपाय किया जिसके बाद उनकी भैंस स्वस्थ हो गई।

श्याम देवी का कहना है कि इस अनुभव के कारण वे आज भी आवश्यकता पड़ने पर उपयोग के लिए अपने घर में पलाश के फूल इकट्ठा कर के रखती हैं।

छुयूल (पलाश) स्वास्थ्य के लिए फायेदमंद 

चित्रकूट के न्यू संजीवनी के वैद्य अल्लाह रख्खा बताते हैं कि छुयूल (पलाश) का लगभग पूरा पौधा औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। विशेष रूप से इसके फूल अनेक पारंपरिक उपचारों में उपयोग किए जाते हैं।

उनके अनुसार जिन महिलाओं को लंबे समय तक अत्यधिक मासिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) की समस्या रहती है, उन्हें पलाश के फूलों का शरबत इलायची और मिश्री के साथ बनाकर पिलाया जाता है जिससे लाभ मिलने की बात कही जाती है।

वे बताते हैं कि पलाश के फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से दमा (अस्थमा) के रोगियों को भी राहत मिल सकती है।

गर्मियों में जिन लोगों को नकसीर (नाक से खून आना) की समस्या होती है उनके लिए वे सलाह देते हैं कि लगभग 10 ग्राम पलाश के फूल पीसकर सेवन करें। यदि फूलों को पानी में भिगोकर उसका पानी पीना हो तो लगभग 20 ग्राम फूल भिगोकर उपयोग किया जा सकता है। उनके अनुसार, पलाश की तासीर ठंडी होती है इसलिए यह शरीर की गर्मी कम करने में सहायक माना जाता है।

वैद्य अल्लाह रख्खा यह भी बताते हैं कि पलाश का गोंद, जिसे कमरकस, चुनिया गोंद या ढाक का गोंद भी कहा जाता है, पारंपरिक रूप से कमर दर्द और शारीरिक कमजोरी में उपयोग किया जाता है।

 

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