इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बोला गया ‘दिमागी नक्सली’ बयान (शब्द) काफी चर्चे में है। इसे लेकर युवाओं और विपक्षी नेताओं के बीच ग़ुस्सा और नाराज़गी भी है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भाषण दिया गया और उस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के अगले ही दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ नाम का एक पैरोडी (व्यंग्यात्मक) अकाउंट सामने आया है।
इस अकाउंट ने बेहद कम समय में काफी लोकप्रियता हासिल कर ली और इसके फॉलोअर्स की संख्या 2 लाख के पार पहुंच गई है।
सोशल मीडिया पर छाया ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’
‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’ यानी DNJP के नाम से सोशल मीडिया पर बने नए अकाउंट्स पर Gen Z का अंदाज, मजाक और राजनीतिक सवाल एक साथ देखने को मिल रहे हैं। DNJP के एक्स अकाउंट (@DNJP_India) को अब तक 14 हजार से ज्यादा लोग फॉलो कर चुके हैं।
कई लोगों ने अपना समर्थन दिखाने के लिए अपने नाम के आगे ‘दिमागी नक्सल’ भी जोड़ लिया है। DNJP की अपनी वेबसाइट भी है। यहां पार्टी ने अपना मेनिफेस्टो और एंथम जारी किया है। एंथम के साथ 2006 में आई फिल्म ‘रंग दे बसंती’ के ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ वाले सीन का YouTube लिंक भी शेयर किया गया है।
इस पार्टी को किसने शुरू किया है इसकी पहचान अभी सामने नहीं आई है। इसके संस्थापक ‘ए दिमागी इंडियन’ नाम से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। DNJP का कहना है कि इस पार्टी का न कोई झंडा होगा, न कोई खास फॉन्ट और न ही कोई चेहरा। इसमें शामिल होने के लिए बस अपने दिमाग से सोचने और सवाल पूछने की हिम्मत होनी चाहिए। DNJP पार्टी का मानना है कि ‘दिमागी नक्सल’ और ‘एंटी-नेशनल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल अक्सर राजनीतिक दल अपनी आलोचना करने वालों को चुप कराने के लिए करते हैं। पार्टी इसी सोच को अपने तरीके से पलट रही है। इस पेज पर मुख्य रूप से व्यंग्यात्मक सामग्री पोस्ट की जा रही है, जिसका नारा है-“हम सोचते हैं, हम शोध करते हैं, हम विरोध करते हैं।”
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देश में नया राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। उन्होंने कहा था “इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा और विकसित राष्ट्र बनाने के मुख्य धारा की ओर युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।”
Watch LIVE. https://t.co/TmFSTCdlYC
— PMO India (@PMOIndia) August 15, 2026
– भाजपा के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने रविवार को पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान की नई परिभाषा दी है। उन्होंने कहा कि जंगलों में रहने वाले हथियारबंद नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक ये ‘दिमागी नक्सली’ हैं, जो शहरों में प्रोफेसर, शिक्षक, एनजीओ संचालक, बुद्धिजीवी, कवि और लेखक के रूप में सक्रिय हैं।
#WATCH | Lucknow, UP | BJP MP and Former DGP Brijlal says, “Today, I want to talk about ‘Dimagi Naxals.’ They do not live in forests or remote wilderness areas. They do not carry weapons or fire bullets. They rely solely on their intellect. They are found in cities, operating as… pic.twitter.com/OmEJCyToW8
— ANI (@ANI) August 16, 2026
– सीपीआईएम (CPIM) के महासचिव एमए बेबी ने कहा है कि उनकी पार्टी नक्सलवाद का विरोध करती है, लेकिन सरकार पर माओवादियों से निपटने में कानून और संविधान का उल्लंघन करने का आरोप है।
– इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। चिदंबरम के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।
I am proud to be a dimagi naxal !
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) August 16, 2026
– पीएम मोदी के भाषण के बाद बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने लाल क़िले से अपने उद्बोधन में जो दिमाग़ी नक्सल शब्द कहा है उसको गहराई से समझने की आवश्यकता है। pic.twitter.com/DI1yc1RtT3
— Dr. Sudhanshu Trivedi (@SudhanshuTrived) August 15, 2026
ये वीडियो एक न्यूज़ चैनल में चल रहे डिबेट का है जिसमें राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी कह रहे हैं कि “प्रधानमंत्री ने लाल क़िले से अपने उद्दघोषण में जो दिमागी नक्सल शब्द कहा है उसको गहराई से समझने की आवश्यकता है।” “वह दिमाग़ी नक्सल है जो कहे कि ‘नक्सली गांधीयन्स विद गन है।’ वह दिमाग़ी नक्सल है, जिसको सीएए में यह नज़र आता था कि यह नागरिकता छीनने का क़ानून है जबकि पांच साल में किसी मुसलमान की नागरिकता नहीं गई।”
– ANI को बाइट देते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा “दो-तीन साल पहले उन्होंने (पीएम मोदी) अपने राजनीतिक विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ (शहरी नक्सली) कहा, तब संसद में ये पूछा गया कि ‘अर्बन नक्सल’ (शहरी नक्सली) की परिभाषा क्या है? गृह मंत्री से जवाब आता है कि अर्बन नक्सल कोई चीज नहीं है, कोई परिभाषा नहीं है। आज प्रधानमंत्री लाल किले से दिमागी नक्सल की भाषा, अपने राजनीतिक विरोधियों को लेकर इस्तेमाल करते हैं। बात ये है, हकीकत ये है कि जो मुद्दा ‘अर्बन नक्सल’ उठाते हैं, जो प्रधानमंत्री की सोच में ‘अर्बन नक्सल’ हैं, जो मांग वे करते हैं, उसे वे स्वीकार करते हैं। जातिगत जनगणना को लेकर उन्होंने अर्बन नक्सल सोच ठहराया था लेकिन एक साल पहले उन्होंने जाति आधारित जनगणना की घोषणा की। पहले आप गाली दें, अर्बन नक्सल कहो, दिमागी नक्सल कहो लेकिन बाद में जो आपके राजनीतिक विरोधी कह रहे हैं उनकी मांगों को मानो…12 साल बाद भी उनके राजनीतिक भाषण में कोई नई बात नहीं थी…”
#WATCH | दिल्ली | कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “दो-तीन साल पहले उन्होंने(पीएम मोदी) अपने राजनीतिक विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ (शहरी नक्सली) कहा, तब संसद में ये पूछा गया कि ‘अर्बन नक्सल’ (शहरी नक्सली) की परिभाषा क्या है? गृह मंत्री से जवाब आता है कि अर्बन नक्सल कोई चीज नहीं… pic.twitter.com/7J5q17sLvL
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 15, 2026
– राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने एक्स में पोस्ट कर लिखा कि “प्रिय प्रधानमंत्री जी, नन्हे-मुन्ने, युवा और जिज्ञासु लोग “दिमागी नक्सल” शब्द देने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। अब आप कई भारतीय भाषाओं में और हर संभव प्रारूप में वायरल होने वाले मीम्स, रील्स, कार्टून, पैरोडी, कविताएँ और गीतों के लिए तैयार हो जाइए। जय हिंद!”
Dear Prime Minister Sir,
The very young, the young, and the ever-curious express their sincerest gratitude for gifting us the phrase “Dimagi Naxal.”
Please now brace yourself for the viral memes, reels, cartoons, parodies, poems, and songs, in multiple Indian languages and in…
— Manoj Kumar Jha (@manojkjhadu) August 16, 2026
– ANI के साथ इंटरव्यू में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आज़ाद ने कहा है कि “प्रधानमंत्री का कमाल है, जो पढ़ा लिखा है वो नक्सल है और जो अनपढ़ और अज्ञानी है वो देशभक्त है…6 लाख सरकारी स्कूलों में से 1.5 लाख सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। 1 लाख ऐसे स्कूल हैं जहां लड़कियों के लिए बाथरूम नहीं हैं। 1.25 लाख स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक है। तभी ये पढ़े लिखों को अर्बन नक्सल बोलते हैं।”
#WATCH दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर TMC सांसद कीर्ति आज़ाद ने कहा, “प्रधानमंत्री का कमाल है, जो पढ़ा लिखा है वो नक्सल है और जो अनपढ़ और अज्ञानी है वो देशभक्त है…6 लाख सरकारी स्कूलों में से 1.5 लाख सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। 1 लाख ऐसे स्कूल हैं जहां… pic.twitter.com/mX0ljIrs4y
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 15, 2026
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी पीएम मोदी की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इस मुद्दे को युवाओं खासकर Gen Z, से जोड़ते हुए अपनी बात रखी है।
– सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने अपने एक्स अकाउंट में लिखते हुए कहा है कि “प्रधानमंत्री जी, “दिमागी नक्सल” या ऐसा कुछ भी नहीं चलेगा। आप पढ़े-लिखे युवाओं को सिर्फ इसलिए “नक्सली” वगैरह कैसे कह सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि वे आपकी सरकार पर सवाल उठाते हैं? सरासर अहंकार! उनकी समस्याओं को सुलझाने में घोर अक्षमता! खतरे की घंटी बज रही है। जागृति आ चुकी है!”
“Dimagi Naxal” or whatever is not going to work, Prime Minister. How could you loosely brand educated young people “naxalis” etc? Just because they question your government? Sheer arrogance! Sheer incompetence at resolving their problems!
Bells are ringing. The awakening is… https://t.co/DHuGkhWrGN
— Saurav Das (@SauravDassss) August 15, 2026
– वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण द्वारा भी इस विषय पर सवाल उठाया गया। “मोदी जी किनको दिमाग़ी नक्सल कह रहे हैं? क्या हमारे युवाओं को जो जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़ा की माँग कर रहे थे? या आज प्रोटेस्ट कर रहे बच्चों को जो स्कूल मैं सुचारु व्यवस्था की माँग कर रहे हैं? “
मोदी जी किनको दिमाग़ी नक्सल कह रहे हैं? क्या हमारे युवाओं को जो जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़ा की माँग कर रहे थे? या आज प्रोटेस्ट कर रहे बच्चों को जो स्कूल मैं सुचारु व्यवस्था की माँग कर रहे हैं? pic.twitter.com/8rd8xZU8k0
— Prashant Bhushan (@pbhushan1) August 15, 2026
प्रधानमंत्री द्वारा क्या कहा गया था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने भाषण में कहा गया था कि ‘भले ही जंगल में हथियार उठाने वाले नक्सल खत्म हो गए हों लेकिन दिमागी नक्सल अब भी मौके की तलाश में हैं। वे हिंसा के तरीके ढूंढ रहे हैं और देश को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग किया जाना चाहिए।’ प्रधानमंत्री द्वारा अपने बयान में किसी खास संगठन या समूह का नाम नहीं लिया गया था। हालांकि ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई और विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’
