खबर लहरिया Blog Death Due to Dowry: नोएडा की दीपिका और भोपाल की ट्विशा समेत कई महिलाओं की मौत, कारण दहेज 

Death Due to Dowry: नोएडा की दीपिका और भोपाल की ट्विशा समेत कई महिलाओं की मौत, कारण दहेज 

                                         

‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे श्लोगन उस समय फीके पड़ जाते हैं जब पढ़ी लिखी लड़कियाँ दहेज के वजह से मौत का शिकार बन जाती हैं। दहेज प्रथा आज भी समाज की ऐसी कड़वी सच्चाई है जो समय के साथ खत्म होने के बजाय कई घरों में अब भी जिंदा है। अब यह समस्या ग्रामीण इलाक़ों और बड़े शहरों तक उतनी ही मज़बूती से जड़ बनाते हुए नजर आती है। भोपाल और नोएडा से आई दो लड़कियों की खबरें इसी सच को देखने के लिए मजबूर कर रही है कि आज भी कई लड़कियों की ज़िंदगी दहेज की भेंट चढ़ रही है। 

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: आइ)

नोएडा, दीपिका नागर की मौत का मामला 

उत्तर प्रदेश के नोएडा के जलपुरा गांव में 24 वर्षीय दीपिका नागर की मौत ने एक बार फिर दहेज और घरेलू प्रताड़ना के मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। दीपिका पढ़ी लिखी और पोस्ट ग्रेजवेट लड़की थी। करीब 14 महीने पहले बड़े सपनों के साथ दीपिका की शादी हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परिवार का आरोप है कि शादी में काफी दहेज देने के बावजूद ससुराल पक्ष की मांगे रुकी नहीं। परिवार के मुताबिक दीपिका पर फॉर्च्यूनर कार और 50 लाख रुपए लाने का दाबाव बनाया जा रहा था। मांग पूरी न होने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था। दीपिका कई बार फोन पर अपने परिजनों को अपनी तकलीफ़ें बताती थी, लेकिन परिवार और रिश्तों को बचाने के लिए वह हर मुश्किल सहती रही।

17 मई 2026 की रात छत से कूद कर उसकी मौत की खबर आई। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे दहेज प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या का मामला माना जबकि लड़की के परिवार का आरोप है कि दीपिका की हत्या की गई है। परिवार ने बताया है कि घटना के बाद ससुराल पक्ष के दीपिका को अस्पताल में छोड़कर फरार हो गए। जब दीपिका के परिवार वाले अस्पताल पहुंचे तो दीपिका मृत हालत में मिली। परिवार का दावा है कि दीपिका के शरीर में कई चोटों के निशान थे। इसलिए वे इसे दहेज के नाम पर हत्या मान रहे हैं। 

इस मामले में पुलिस द्वारा मृतिका दीपिका के पिता की शिकायत पर दहेज हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। साथ ही पति ऋतिक को गिरफ़्तार कर जांच शुरू कर दी गई है। इसी के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल कॉल डिटेल और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर जांच जारी है। 

भोपाल, ट्विशा शर्मा की मौत का मामला 

वहीं भोपाल में 33 साल की ट्विशा शर्मा की मौत ने भी दहेज और घरेलू हिंसा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्विशा शर्मा की शादी कुछ महीने पहले ही वकील समर्थ सिंह से हुई थी। ट्विशा शर्मा की सास एक रिटायर्ड जज भी हैं। इन सब के कारण परिवार को उम्मीद थी की उनकी लड़की शिक्षित घर में जा रही है तो खुश रहेगी लेकिन कुछ ही दिन में हालत बदलने लगे। ट्विशा शर्मा के परिवार का आरोप है कि ट्विशा शर्मा पर लगातार कैश और सोना लाने का दाबव बनाया जाता था। उनका कहना है कि दहेज को लेकर उसे परेशान किया जाता रहा। धीरे-धीरे ट्विशा शर्मा तनाव में रहने लगी थी और वह भोपाल छोड़ कर नोएडा वापस आना चाहती थी। वहीं ससुराल पक्ष ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।

मंगलवार यानी 12 मई 2026 की रात कटारा हिल्स इलाके में ट्विशा शर्मा का शव फंदे से लटका मिला। घटना के बाद पुलिस द्वारा पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या और प्रताड़ना का केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय एसआईटी भी बनाई गई है जिसकी अगुवाई एसपी रजनीश कश्यप कर रहे हैं। टीम मरण रंक महिला अधिकारी को भी शामिल किया गया है। इसमें पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपी पति जो अभी फ़रार हैं उसकी तलाश की जा रही है। 

कुछ और भी घटनाएँ 

जब दहेज और घरेलू हिंसा जैसे मामले बड़े शहरों और पढ़े लिखे परिवारों में सामने आ रहे हैं तो ग्रामीण इलाक़ों के हक़ीक़त का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। गांव में आज भी कई लड़कियाँ और महिलाएँ दहेज की वजह से प्रताड़ना झेल रही है। कहीं उनकी संदिग्ध मौत हो जाती है तो कहीं वे इंसाफ़ के लिए भटकने को मजबूर होती हैं। ज़मीनी स्तर पर ऐसी कई घटना सामने आई है। 

वाराणसी के शिवपुर थाना क्षेत्र के परमानंदपुर से एक मामला सामने आया था जहां प्रिया की मां का आरोप था  कि शादी के एक साल बाद से ससुराल पक्ष दहेज में जमीन की मांग कर रहा था। मांग पूरी न होने पर बेटी को जान से मारने की कोशिश की गई और उसे पंखे से लटका दिया गया। वहीं पति अमित कुमार वर्मा का कहना था कि उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और उनकी पत्नी ने खुद यह कदम उठाया। उनका दावा था कि उन्होंने ही पत्नी को अस्पताल पहुंचाया।

UP, Varanasi : दहेज या साजिश? वाराणसी में बहू को पंखे से लटकाने का आरोप

चित्रकूट जिले के मऊ क्षेत्र से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए मारपीट करने और घर से निकाल देने का आरोप लगाया।जिसके शिकायत और न्याय के लिए वे कई जगह गुहार लगा रही थी। 

Chitrakoot Ground Report: दहेज के लिए हिंसा, कानून के बावजूद गांवों में जारी अत्याचार

यूपी के कौशांबी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी हुई। शादी के बाद पति द्वारा पत्नी से दहेज की मांग की गई जिसके बाद पति पर आरोप है कि उसने अपनी नवविवाहिता पत्नी की हत्या कर दी।

UP NEWS: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फेरे और फिर दहेज ना मिलने पर पत्नी की हत्या 

यूपी के सहारनपुर में दहेज के लिए कथित तौर पर ससुराल वालों ने अपनी बहू को HIV संक्रमित इंजेक्शन लगा दिया। यह आरोप लड़की के माता-पिता ने ससुराल वालों पर लगाया। महिला के पति और देवर सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

UP NEWS: सहारनपुर में दहेज के लिए HIV संक्रमित इंजेक्शन लगाया – परिवार का आरोप

ये सभी घटनाओं के चंद हिस्से हैं इसके अलावा भी कई ऐसी खबरें हैं और घटनाएँ हैं जो खबर नहीं बन पाती। इस मुद्दे पर खबर लहरिया द्वारा कई कवरेज की गई हैं। 

down to earth के रिपोर्ट अनुसार वर्ष 2017 से 2022 के बीच दहेज की वजह से होने वाले उत्पीड़न के कारण हर साल औसतन सात हजार महिलाओं ने अपनी जान दे दी या फिर उनकी हत्या कर दी गई। वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 6,450 था। यानी रोजाना 18 महिलाओं की मौत हुई थी। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 में हुई मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश (2,218), बिहार )1,057) और मध्य प्रदेश (518) क्रमश पहले से तीसरे नंबर पर थे। इससे साफ है कि ऐसी ज्यादातर घटनाएं उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में ही होती हैं।

कई लड़कियाँ पढ़ लिख तो रही हैं लेकिन शादी के बाद अक्सर उन्हें घर तक सीमित कर दिया जाता है। ऐसी में कई परिवारों में यह सोच बनी रहती है कि लड़का कमाता है इसलिए शादी में दहेज मिलना हक है। 

भारत में दहेज हत्या के मामले नई बात नहीं है। 1970 और 1980 के दशक में भी ऐसी घटनाएँ सामने आती थीं। जब महिलाओं को दहेज के लिए जला कर मार दिया जाता था और उसे रसोई हादसा बताने की कोशिश की जाती थी। क्या इसने सालों बाद भी आख़िर बदलाव हुआ है? ये सारे मामले बताते हैं कि ऐसे मामले घटने के बजाय समाज में और गहराई बनाती जा रही है। 

 

यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’

If you want to support our rural fearless feminist Journalism, subscribe to our premium product KL Hatke

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *