11 जून 2026 को बांदा जिले से एक मामला सामने आया है। महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति उसे अपने बहनोई के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट करता था। इस सम्बन्ध में महिला ने 11 जून 2026 को बाँदा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज की।
रिपोर्ट – गीता, लेखन – सुचित्रा
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो यानी एनसीआरबी (NCRB) 2024 की रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले 4.41 लाख से अधिक किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 1.20 लाख से अधिक मामले पति या ससुराल पक्ष द्वारा की गई प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़े थे। वहीं, उत्तर प्रदेश महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में देश में सबसे ऊपर रहा, जहां 66 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा कई बार उनके अपने घरों के भीतर ही मौजूद है।
क्या है पूरा मामला
बांदा जिले के कमासिन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने बताया कि उसकी शादी 4 मार्च 2024 को बबेरू थाना क्षेत्र के पबइया गांव निवासी रोहित पुत्र राजेंद्र के साथ हुई थी। महिला का आरोप है कि उसका पति शराब का आदी है और आए दिन नशे की हालत में उसके साथ मारपीट करता है तथा अभद्र गालियां देता है। कई बार उसे निर्वस्त्र कर पीटा गया और देर रात घर से बाहर निकाल दिया गया।
महिला का आरोप है कि पति अपने बहनोई योगेंद्र पुत्र चुनबाद निवासी अकौना थाना बिसंडा तथा गचकन्ना पुत्र पोपला निवासी मुरवल थाना बबेरू को घर बुलाता था। तीनों शराब पीकर उसके सामने अश्लील हरकतें करते थे। विरोध करने पर पति मारपीट करता और कथित रूप से अपने बहनोइयों के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालता था।
1 साल से बहनोई से सम्बन्ध बनाने का दबाव – पत्नी का आरोप
महिला ने 11 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि लगातार प्रताड़ना से तंग आकर वह 7 अप्रैल 2025 को अपनी जान और इज्जत बचाने के लिए मायके आ गई थी। लेकिन वहां भी उसका पति फोन कर गाली-गलौज करता रहा और कथित रूप से बहनोइयों के साथ संबंध बनाने का दबाव बनाता रहा।
महिला का आरोप है कि 11 अप्रैल 2026 को उसके माता-पिता खेतों में काम करने गए थे और वह घर में अकेली थी। इसी दौरान उसका पति अपने दोनों बहनोइयों के साथ सुबह 10:30 बजे घर पहुंचा। आरोप है कि तीनों ने उसके साथ मारपीट की, निर्वस्त्र कर दिया और अश्लील हरकतें कीं। महिला का कहना है कि उसे जबरन बहनोइयों की ओर धकेला गया। शोर सुनकर पड़ोसी रामप्रकाश पुत्र जंग बहादुर मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग निकले।
पुलिस ने लिए मामले को दबाने के पैसे – आरोप
इस घटना का प्रार्थना पत्र भी उसी दिन महिला ने कमासिन थाने में दिया लेकिन आज तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई। महिला ने आरोप लगाया कि बबेरू थाने के पुलिस ने घूस लिया है। महिला ने कमासिन और बबेरू दोनों थानों में एप्लीकेशन दे चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही और पति की दरिंदगी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है, जिससे उसको अपनी जान का भी खतरा है।
महिला के परिवार को असुरक्षा का डर
महिला की मां का कहना है कि उनकी बेटी अब उस घर में सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी पति लगातार बहनोइयों के साथ संबंध बनाने का दबाव डालता है और मना करने पर जान से मारने की धमकी देता है।
ऐसे माहौल में वह अपनी बेटी को दोबारा ससुराल नहीं भेज सकतीं। परिवार ने प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
महिला के वकील ने मामला एसपी कार्यालय तक पहुंचाया
परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील दयाराम ने बताया कि महिला का परिवार उनके पास आया था, जिसके बाद उन्होंने प्रार्थना पत्र तैयार कराकर एसपी कार्यालय में प्रस्तुत कराया। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो महिला की इच्छा के अनुसार आगे की कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
एसपी ने दिए जाँच के आदेश
इस मामले में पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। मामले को संबंधित थाने को भेजकर जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी और महिला को न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में आज भी हजारों महिलाएं विवाह के बाद अपने ही ससुराल में मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का शिकार बन रही हैं। कहीं दहेज की मांग पूरी न होने पर उन्हें ताने, अपमान और अत्याचार सहने पड़ते हैं, तो कहीं छोटी-छोटी बातों या शारीरिक संबंधों को लेकर उनके साथ मारपीट की जाती है। कई मामलों में महिलाओं को इतना प्रताड़ित किया जाता है कि उनकी जान तक चली जाती है। उन्हें बार-बार यह एहसास कराया जाता है कि वे परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बोझ हैं। सम्मान, प्यार और सुरक्षा मिलने के बजाय उन्हें भय, अपमान और दबाव के माहौल में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन नहीं है, बल्कि समाज की सोच और मानवता पर भी एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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