यूपी में 77 दिनों में 31 लाख लोगों की जांच की गई जिसमें 1.43 लाख लोग टीबी से ग्रसित मिले हैं। राज्य की राजधानी लखनऊ में टीबी के 6811 नए रोगी मिले। इनमें से 41 हजार ऐसे हैं जिनके शरीर में लक्षण नहीं थे लेकिन वो टीबी की चपेट में थे।
केंद्र सरकार द्वारा 100 दिवसीय टीबी-मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया यह अभियान वर्तमान में 347 जिलों और 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (देश के कई गांवों और शहरी वार्डों सहित) में चलाया जा रहा है। यह जांच और अभियान स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य शिविरों और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से नजदीकी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य टीबी के छिपे हुए मामलों की जल्द से जल्द पहचान करना, मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है।
इसी अभियान के दौरान यूपी में 77 दिनों में 31 लाख लोगों की जांच की गई जिसमें 1.43 लाख लोग टीबी से ग्रसित मिले हैं। राज्य की राजधानी लखनऊ में टीबी के 6811 नए रोगी मिले। इनमें से 41 हजार ऐसे हैं जिनके शरीर में लक्षण नहीं थे लेकिन वो टीबी की चपेट में थे।
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77 दिनों में करीब 31 लाख लोगों की जांच की गई
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी की पहचान के लिए प्रदेश भर में विशेष अभियान चलाया गया है। इसके तहत गांवों, शहरों, वार्डों, झुग्गी बस्तियों और अन्य संवेदनशील इलाकों में 17,960 आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाए गए। अभियान के पहले 77 दिनों में करीब 31 लाख लोगों की जांच की गई।
इन शिविरों में टीबी जांच के साथ ही हीमोग्लोबिन ब्लड प्रेशर और मधुमेह (शुगर) की जांच जैसे जरुरी स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने अब तक 26,722 ऐसे गांवों को चिन्हित किया है जहां टीबी का खतरा अधिक माना गया है। रोगियों की पहचान के लिए 22 लाख से ज़्यादा एक्सरे किए गए हैं जबकि 6 लाख से अधिक मॉलिक्यूलर टेस्ट भी किए जा चुके हैं।
राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक 6,811 नए टीबी मरीज सामने आए हैं। इन सभी को इलाज और दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही है। जागरण के रिपोर्ट के अनुसार अपर मुख्य सचिव अमित घोष का कहना है कि अभियान के दौरान ज़्यादा मरिजों का सामने आना चिंता के साथ अच्छी बात भी है क्योंकि जितने अधिक मरीज समय रहते पहचान में आएँगे उनका इलाज उतनी जल्दी शुरू हो सकेगा और टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
उनके द्वारा यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार ने 7 दिसंबर 2024 से देशभर में 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान में बेहतर काम करने के लिए उत्तरप्रदेश के क्षय रोग उन्मूलन के क्षेत्र में बढ़िया प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया है। उन्होंने कहा है कि 7 दिसंबर 2024 से 17 जनवरी 2026 तक राज्य में टीबी के खतरे वाली आबादी पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस दौरान करीब 3.02 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई ताकि बीमारी की सही समय पर निवारण किया जा सके। जांच सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 81.29 लाख लोगों के एक्स-रे और 24.79 लाख नैट परीक्षण किए गए। इससे मरीजों में संक्रमण का पता जल्दी और अधिक सटीक तरीके से लगाया जा सका।
टीबी क्या है और ये कैसे फैलती है
टीबी (तपेदिक या क्षय रोग) एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के बैक्टिरिया के कारण होती है। यह सबसे ज़्यादा फेफड़ों को प्रभावित करती है लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों जैसे हड्डियों, रीढ़, दिमाक, किडनी में भी फैल सकती है।
ये फैलती कैसे है
जब किसी टीबी रोगी के फेफड़ों में संक्रमण होता है और वह खाँसता, छींकता, बोलता या थूकता है तो उसके मुंह से निकलने वाली छोटी-छोटी संक्रमित बूँदें हवा में फैल जाती हैं। इन्हें सांस के साथ दूसरे लोग अंदर ले जाते हैं जिससे संक्रमण फैल सकता है। हलांकी टीबी हाथ मिलने या साथ खाना खाने या साथ बैठने से नहीं फैलती है।
टीबी होने का खतरा उन्हें ज़्यादा हो सकता है जो मधुमेह (शुगर) के मरीज हों, कुपोषण या कमजोर व्यक्ति हों, HIV संक्रमित लोग हों, धूम्रपान या शराब का सेवन करता हो या भीड़भाड़ और खराब वेंटिलेशन वाले इलाकों में रहने वाले हों।
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