प्रयागराज के एक ईंट-भट्ठे से यह ग्राउंड रिपोर्ट उन प्रवासी मजदूरों की कार्य परिस्थितियों पर केंद्रित है, जो हर साल रोज़गार की तलाश में अपने घरों से दूर आकर काम करते हैं। ईंट-भट्ठों में मजदूरी अक्सर प्रति 1000 ईंटों के हिसाब से तय की जाती है, जबकि काम कई घंटों तक लगातार चलता है। गर्मियों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बावजूद उत्पादन जारी रहता है। इस रिपोर्ट में मजदूरों की मजदूरी व्यवस्था, काम के स्वरूप और भट्ठों पर मौजूद वास्तविक परिस्थितियों को उनके अनुभवों और ज़मीनी दृश्यों के माध्यम से समझने का प्रयास किया गया है।
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