कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए गौरवपूर्ण और यादगार रहा। कल 2 अगस्त 2026 को इसका समापन कार्यक्रम हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 39 मेडल भारत के नाम किए। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इसके साथ ही भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
रविवार 2 अगस्त 2026 को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन समारोह ग्लासगो में रंगारंग अंदाज में आयोजित हुआ। यह समारोह खेलों की उपलब्धियों के साथ-साथ भारत और स्कॉटलैंड की संस्कृति का खूबसूरत संगम भी बना। समारोह में पारंपरिक स्कॉटिश संगीत और नृत्य के साथ भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। शंकर महादेवन ने अपने शानदार गीतों से माहौल को यादगार बनाया, जबकि पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर की प्रस्तुति ने भी दर्शकों का दिल जीता। ‘वंदे मातरम्’ की गूंज और “वसुधैव कुटुंबकम” का संदेश समारोह के मुख्य आकर्षण रहे। सबसे गर्व का पल तब था जब 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत को औपचारिक रूप से सौंपी गई।
India officially takes charge of the 2030 Commonwealth Games.
IOA President PT Usha, Gujarat Deputy CM Harsh Sanghavi, and Olympic champion Neeraj Chopra received the Commonwealth Games flag at the Glasgow 2026 ceremony, marking the formal handover of hosting rights to India.…
— Briefly 🇮🇳 (@BrieflyIndia_) August 3, 2026
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बॉक्सिंग में 10 पदक
भारत को सबसे बड़ी सफलता बॉक्सिंग में मिली। भारतीय मुक्केबाजों ने 14 खिलाड़ियों के दल के साथ कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण (गोल्ड) और 3 रजत (सिल्वर) पदक शामिल रहे। महिला मुक्केबाजों ने भी शक्ति का शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 गोल्ड मेडल जीते। इनमें प्रीति पवार, जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी के नाम शमिल हैं वहीं पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत की सफलता को और मजबूत किया।
वेटलिफ्टिंग में 8 पदक
भारतीय खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए वेटलिफ्टिंग में कुल 8 पदक जीते। ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इसके अलावा भारतीय टीम ने छह रजत और एक कांस्य पदक भी अपने नाम किए।
मीराबाई चानू (महिला 48 किग्रा) – स्वर्ण पदक
ऋषिकांता सिंह (पुरुष 60 किग्रा) – रजत पदक
एम. राजा (मुथुपांडी राजा) (पुरुष 65 किग्रा) – रजत पदक
वल्लुरी अजय बाबू (पुरुष 79 किग्रा) – रजत पदक
ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा) – रजत पदक
हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा) – रजत पदक
लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा) – रजत पदक
बिंदियारानी देवी (महिला 58 किग्रा) – कांस्य पदक
पैरा स्पोर्ट्स में 7 पदक
भारत ने रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए पैरा स्पोर्ट्स में 7 पदक हासिल किए। शर्मिला धनखड़, दिलीप महादू गावित और सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ पैरा स्पोर्ट्स अभियानों में से एक रहा।
शर्मिला धनखड़ (पैरा एथलेटिक्स, महिला शॉटपुट F57) – स्वर्ण पदक
दिलीप महादू गावित (पैरा एथलेटिक्स, पुरुष 100 मीटर T47) – स्वर्ण पदक
सोमन राणा (पैरा एथलेटिक्स, पुरुष शॉटपुट F57) – स्वर्ण पदक
मोहम्मद बासिल (पैरा एथलेटिक्स, पुरुष 100 मीटर T47) – रजत पदक
शुभम जुयाल (पैरा एथलेटिक्स, पुरुष शॉटपुट F57) – रजत पदक
शिल्पा के. शायला (पैरा एथलेटिक्स, महिला शॉटपुट F57) – कांस्य पदक
झंडू कुमार (पैरा पावरलिफ्टिंग, पुरुष हेवीवेट) – कांस्य पदक
जूडो में 4 पदक
जूडो में भी भारत ने नया इतिहास रचा। हर्ष सिंह (पुरुष 60 किलोग्राम) और अस्मिता डे (महिला 48 किलोग्राम) ने जूडो में भारत को पहला कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक दिलाया।
हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा) – स्वर्ण पदक
अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा) – स्वर्ण पदक
यामिनी मौर्य – रजत पदक
उन्नति शर्मा – कांस्य पदक
एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्पर्धा में रजत पदक जीता। गुलवीर सिंह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट बने। उन्होंने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक हासिल किए। तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर इस स्पर्धा में भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया।
हालांकि 1998 के बाद से भारत के लिए 39 मेडल सबसे कम हैं क्योंकि इस बार शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और फील्ड हॉकी जैसे भारत के सबसे सफल खेल प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थे, फिर भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपने जज़्बे और मेहनत से यह साबित कर दिया कि देश की खेल प्रतिभा लगातार नए क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है।
आपको बता दें कि 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में इन्हीं पांच खेलों से भारत को 61 में से 30 पदक मिले थे जिसमे 13 स्वर्ण पदक थे। ऐसे में इन खेलों की अनुपस्थिति के बावजूद 39 पदक जीतना भारतीय दल की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के बाद अब पूरे देश की निगाहें 2030 पर हैं, जब भारत मेजबान होगा और करोड़ों भारतीय अपने खिलाड़ियों को भारत की धरती पर नए इतिहास रचते देखने की उम्मीद करेंगे।
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