खबर लहरिया Blog बिहार पुलिस विभाग में ‘दीदी की रसोई’ सेवा बंद, जानिए क्यों लिया सरकार ने यह फैसला 

बिहार पुलिस विभाग में ‘दीदी की रसोई’ सेवा बंद, जानिए क्यों लिया सरकार ने यह फैसला 

 

बिहार पुलिस के कार्यालयों, प्रशिक्षण केंद्रो और पुलिस लाइनों में चल रही है ‘जीविका दीदी की रसोई’ सेवा को राज्य स्तर पर बंद करने का फैसला लिया गया है। बता दें यह ‘जीविका दीदी की रसोई’ सेवा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है।

फोटो साभार: जागरण

इस संबंध में जीविका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिमांशु शर्मा द्वारा गृह विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) को पत्र भेजकर निर्णय की जानकारी दी गई है। इस आदेश के सामने आने के बाद प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हो गई है। 

इसके तहत मुजफ़्फरपुर पुलिस लाइन और बीएसएपी-6  में चल रही रसोईयों का संचालन भी रोक दिया गया है। 

बंद क्यों हो रही है ? 

‘अन्नपूर्णा जीविका फूड प्रोडक्ट्स प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी’ के माध्यम से बिहार पुलिस मुख्यालय, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों और पुलिस लाइनों में इस सेवा का संचालन किया जा रहा था। इस योजना का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को गुणवत्तापूर्वक और स्वास्थ्य भोजन उपलब्ध करना था साथ ही ग्रामीण महिलाओं को रोजगार स्थाई आजीविका देना भी था। हलांकी जारी आदेश के अनुसार कई जगह बुनियादी सुविधाओं की कमी, नियमित कार्यादेश नहीं मिलना, भुगतान में देरी और आर्थिक नुक़सान जैसी समस्याओं के कारण इस योजना को आगे चलाना मुश्किल हो गया। लगातार घाटे को देखते हुए जीविका द्वारा इसे बंद करने का फैसला लिया गया है।  

साथ ही जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा ने गृह विभाग से विभिन्न इकाइयों पर बकाया भुगतान जल्द जारी करने का अनुरोध भी किया है। जागरण के अनुसार उनके द्वारा कहा गया है कि लंबित राशि मिलने के बाद ही ‘दीदी की रसोई’ की सभी इकाइयों को तय नियमों के अनुसार बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 

प्रमुख कारण जो पत्र के द्वारा बताए गए 

लगातार आर्थिक नुकसान – जीविका के आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश पुलिस केंद्रों में संचालित रसोई इकाइयां लगातार घाटे में चल रही थीं।

बुनियादी सुविधाओं की कमी – कई पुलिस परिसरों में रसोई चलाने के लिए जरुरी ढाँचा और सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थी। 

भुगतान में देरी – पुलिस विभागों की ओर से बिलों का भुगतान समय पर नहीं होने से जीविका समूहों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। 

नियमित कार्यादेश का आभाव – कई केंद्रों पर स्पष्ट और नियमित कार्यादेश के बिना ही रसोई का संचालन कराया जा रहा था जिससे व्यवस्था प्रभावित हुई। 

 

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