केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ किसानों और आदिवासियों का विरोध तेज हो गया है। 23 मार्च 2026 से शुरू हुआ था 28 मार्च को प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखें , फिर 5 अप्रैल को पन्ना के डायमंड चौराहे से दिल्ली तक जाने के लिए एक और यात्रा निकाली गई थी। जिसे रास्ते में ही रोक दिया गया। अब 8 अप्रैल 2026 को उन्होंने छतरपुर के ढोढ़न बांध के पास चिता पर लेटकर अपना रोष प्रकट किया है। आरोप है कि 4 गुना मुआवजे का वादा करके अब उन्हें बिना पैसे ही घर से निकलने के लिए मजबूर किया जा रहा है।इतना ही नहीं उनका नाम मुआबजे की जोड़ने के लिए भी उनसे पैसे मांगे जा रहे है। महिलाओं ने ‘चिता आंदोलन’ किया के माध्यम से ये संदेश दिया कि ये हालात उनके लिए जीते जी चिता के समान हैं. और अब ये लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं… बल्कि हक और सम्मान की है।
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