देश में साल 2027 में होने वाली जनगणना की तैयारियां अब धीरे-धीरे शुरू हो चुकी हैं। इसकी दूसरी कड़ी के तौर पर ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ का काम 1 मई 2026 से शुरू किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में यह चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा जिसमें हर घर, परिवार और वहां मौजूद बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाई जाएगी।
इसके लिए सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। आने वाले समय में यही प्रक्रिया देश के बाकी राज्यों में भी लागू की जाएगी।
2027, Census Questions:2027 की जनगणना में वो 33 सवाल क्या होंगे? छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू
बताया जा रहा है कि इस बार जनगणना का दूसरा चरण देश के कई राज्यों में 1 मई से शुरू होगा। यह वही समय है जब देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में इस काम को लेकर शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
दरअसल जनगणना के इस काम में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के अनुसार शिक्षकों का कहना है कि मई-जून की तेज गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना आसान नहीं होगा। ऊपर से यही समय स्कूलों की छुट्टियों का होता है जब उन्हें थोड़ा आराम मिलना चाहिए लेकिन इसके बजाय उन्हें फील्ड में काम करने के लिए भेजा जा रहा है। शिक्षकों का यह भी मानना है कि इतनी गर्मी में काम करने से उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है और काम की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल के महीने में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सबसे ज़्यादा गर्म जगह रहा है। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ कई इलाक़ों में ग्रीष्म लहर चलने की चेतावनी जताई है। छत्तीसगढ़ का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस है। ये तापमान मई महीने में और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी का विरोध छत्तीसगढ़ के शिक्षकों द्वारा की जा रही है।
अभी जो हालात छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहे हैं वही स्थिति जल्द ही देश के कई राज्यों में भी बन सकती है। एक मई से जब जनगणना का काम शुरू होगा तब भीषण गर्मी अपने चरम पर होगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकार ने इस काम में लगे शिक्षकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतज़ाम किए हैं? मई-जून की तपती गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना आसान नहीं है। लंबे समय तक धूप में रहना, लगातार चलना और काम का दबाव ये सब मिलकर शिक्षकों की सेहत पर असर डाल सकते हैं। देखने वाली बात होगी कि इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है और क्या जनगणना के इस बड़े काम के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है या नहीं।
शिक्षकों का विरोध
दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि यह फैसला लेते समय मौसम की सख्त परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया गया है। उनके मुताबिक, मई-जून की भीषण गर्मी में लंबे समय तक बाहर रहकर घर-घर सर्वे करना सिर्फ मुश्किल नहीं है ये स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है।शिक्षकों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया और समय को लेकर दोबारा सोचने की जरूरत है। उनका मानना है कि अगर समय और तरीका सही तरीके से तय नहीं किया गया तो उन्हें बेवजह परेशानी झेलनी पड़ेगी। इसलिए शिक्षक संघ ने मांग की है कि जनगणना ड्यूटी के शेड्यूल और प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए।
इसके अलावा एक और बड़ी दिक्कत स्मार्टफोन को लेकर सामने आ रही है। सरकार के निर्देश के अनुसार, जनगणना के काम में लगे कर्मचारियों के पास ऐसा एंड्रॉयड मोबाइल होना जरूरी है जिसमें कम से कम 12.0 वर्जन का सॉफ्टवेयर हो। ऐसे में जिन शिक्षकों के पास पुराने फोन हैं उन्हें नया स्मार्टफोन खरीदने की मजबूरी हो रही है।
यह समस्या सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड में भी शिक्षक इसी तरह की मांग उठा रहे हैं।
अमर उजाला के खबर मुताबिक उत्तराखंड के देहरादून में जनगणना के काम को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने साफ विरोध जताया है। शिक्षकों का कहना है कि वे इस काम के लिए अपने निजी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। दरअसल उन्हें जनगणना से जुड़ा एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है। संघ के मंडलीय सचिव गढ़वाल सैन सिंह नेगी और संयुक्त मंत्री सुरेश भट्ट ने कहा कि शिक्षकों पर जनगणना का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। साथ ही ऐप चलाने के लिए महंगा स्मार्टफोन जरूरी बताया जा रहा है जिससे कई शिक्षकों पर नया फोन खरीदने का दबाव बन रहा है। शिक्षकों का साफ कहना है कि वे न तो अपने निजी फोन में यह ऐप डाउनलोड करेंगे और न ही इस शर्त पर जनगणना का काम करेंगे।
इस बार जनगणना की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान और डिजिटल बनाने की कोशिश की गई है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग खुद भी ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपने घर और परिवार की जानकारी भर सकते हैं। इस प्रक्रिया को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ कहा जा रहा है। यानि अब हर बार कर्मचारियों का इंतजार करने की जरूरत नहीं है लोग चाहें तो अपनी जानकारी खुद ही पहले से दर्ज कर सकते हैं। जब कोई व्यक्ति ऑनलाइन जानकारी भर देगा तो उसे एक यूनिक आईडी मिलेगी। बाद में जब कर्मचारी घर पर आएंगे तो यही आईडी दिखानी होगी जिससे उनका काम भी आसान हो जाएगा।
देश में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तरखंड, बिहार राज्यों में 1 और 2 मई से जनगणना 2027 का दूसरा चरण लागू हो गया है।
बता दें पहले भी SIR प्रक्रिया के दौरान कई शिक्षक BLO के तौर पर काम करते हुए दबाव, संसाधनों की कमी और कठिन परिस्थितियों से जूझे थे। कुछ मामलों में तो हालात इतने खराब हुए कि शिक्षकों के हताश होने और आत्महत्या तक की खबरें सामने आईं। ऐसे में अब जब भीषण गर्मी के बीच जनगणना का काम शुरू हो रहा है यह देखना बेहद जरूरी होगा कि इस बार सरकार शिक्षकों के लिए क्या ठोस सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित करती है। क्योंकि एक तरफ उनसे स्मार्टफोन जैसे संसाधनों की मांग की जा रही है तो दूसरी तरफ तपती गर्मी में लगातार फील्ड में काम करने की जिम्मेदारी भी दी जा रही है।
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