इसी बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने आने वाले महीनों के मौसम को लेकर एक अहम चेतावनी जारी की है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक प्रशांत महासागर का पानी तेजी से गर्म हो रहा है जिसके कारण आने वाले महीनों में अल नीनो बनने की संभावना काफी बढ़ गई है।
इस वर्ष देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और लू का प्रकोप छाया हुआ है। कई राज्यों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और लोगों को तेज गर्मी और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है।
इसी बीच विश्व मौसम विज्ञान संगठन (world meteorological organization) (WMO) ने आने वाले महीनों के मौसम को लेकर एक अहम चेतावनी जारी की है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक प्रशांत महासागर का पानी तेजी से गर्म हो रहा है जिसके कारण आने वाले महीनों में अल नीनो बनने की संभावना काफी बढ़ गई है। अनुमान है कि जून से अगस्त के बीच इसके विकसित होने की संभावना करीब 80 प्रतिशत जबकि नवंबर तक इसके बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत से भी अधिक है।
अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमीय प्रक्रिया है जो तब बनती है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम को प्रभावित करता है। यह स्थिति कई महीनों तक बनी रह सकती है और सामान्य मौसम चक्र को बदल सकती है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन का कहना है कि अगर अल नीनो मजबूत होता है तो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जिसमें भारत भी शामिल है मौसम के चरम रूप देखने को मिल सकता है। कहीं सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा जमीन और समुद्र दोनों क्षेत्रों में हीटवेव यानी भीषण गर्मी की घटनाएँ भी बढ़ सकती हैं। अल नीनो के कारण मानसून प्रभावित हो सकता है जिससे कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। वहीं दुनिया के कई हिस्सों में तेज तूफ़ान की भी आशंका जताई गई है।
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WMO की महासचिव सेलेस्टो साउलो ने कहा है कि देशों को अभी से संभावित अल नीनो के प्रभावों के लिए तैयार होना चाहिए क्योंकि इसका असर खेती, जल स्त्रोतों, लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका पर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरुरी होगा।
बता दें इससे पहले साल 2023-24 का अल नीनो इतिहास के पांच सबसे शक्तिशाली दौर में शामिल था जिसमें 2024 में वैश्विक तापमान के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।
अल नीनो है क्या और क्यों आता है?
अगर सरल तरीके से समझे तो अल नीनो एक ऐसी मौसमी स्थिति है जो प्रशांत महासागर में होने वाले बदलावों के कारण बनती है। सामान्य दिनों में समुद्र के ऊपर चलने वाली हवाएं पानी को एक दिशा में धकेलती रहती है जिससे समुद्र का तापमान संतुलित बना रहता है। लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती है तो समुद्र का पानी सामान्य से ज़्यादा गर्म होने लगता है।
समुद्र के इस असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति को अल नीनो कहा जाता है। समुद्र का तापमान बढ़ने से दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है। अल नीनो समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो दुनिया के मौसम का संतुलन बिगाड़ सकती है।
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इस विषय पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश
इस विषय के संबंध में कृषि मंत्रालय ने राज्यों और संबंधित एजेंसियो को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि हर जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना लागू की जाए ताकि कम बारिश की स्थिति में किसानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों तक मौसम और खेती से जुड़ी जरुरी जानकारी समय पर पहुँचाना बेहद जरुरी है। इसके लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, मोबाइल संदेश सेवाओं और कृषि कॉल सेंटरो को मज़बूत किया जाएगा ताकि किसान मौसम के बदलते हालत के अनुसार समय रहते फैसले ले सके और निवारण का सोच सके।
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हलांकी अल नीनो के कारण कई समस्याएँ बताई जा रही है लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में मानसून पूरी तरह खराब हो ऐसा जरुरी नहीं है। अगर दो अहम मौसमीय सिस्टम सक्रिय रहते हैं तो वे अल नीनो के असर को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
पहला सिस्टम है इंडियन ओशन डायपोल (IOD) – इसे हिंद महासागर का अल नीनो भी कहा जाता है। जब इसका सकारात्मक चरण सक्रिय होता है तो यह भारत की ओर नमी बढ़ाता है और अच्छी बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाता है और कई बार यह अल नीनो के प्रभाव को कमजोर भी कर देता है।
दूसरा है मैडेन-जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO)- यह बादलों और हवाओं का एक बड़ा चक्र है जो लगातार भूमध्य रेखा के आसपास घूमता रहता है और जब ये भारत के क्षेत्र में पहुँचता है तो बारिश की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में मानसून कमजोर होने पर कई इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। यानी अल नीनो के मौजूदगी के बावजूद अगर (MJO) और (IOD) दोनों सामान्य स्थिति में रहते हैं तो भारत में इसका असर कम हो सकता है।
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