गांव के रास्तों पर नाले का गंदा पानी भरा रहता है जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। बारिश के समय हालात और खराब हो जाते हैं। तालाब का पानी गंदी नाली के साथ मिलकर सड़कों पर फैल जाता है और पूरा रास्ता दलदल में बदल जाता है।
रिपोर्ट – शिवदेवी, लेखन – रचना
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के मवाई गांव में लोग कई सालों से गंदे नाले और कीचड़ की समस्या से परेशान हैं। गांव के रास्तों पर नाले का गंदा पानी भरा रहता है जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। बारिश के समय हालात और खराब हो जाते हैं। तालाब का पानी गंदी नाली के साथ मिलकर सड़कों पर फैल जाता है और पूरा रास्ता दलदल में बदल जाता है। ग्रामीण लगातार सड़क और नाली बनवाने की मांग कर रहे हैं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। स्कूली बच्चों का कहना है कि सालभर रास्ते में कीचड़ भरा रहता है और उन्हें उसी गंदगी से होकर स्कूल जाना पड़ता है। इससे उनकी स्कूल ड्रेस खराब हो जाती है। जब वे गंदे कपड़ों में स्कूल पहुंचते हैं तो शिक्षक डांटते और मारते हैं। उनकी मजबूरी यह है कि गांव से निकलने का यही एक मुख्य रास्ता है।
गांव के रहने वाले रामबाबू द्वारा बताया गया कि इस समय शादी-विवाह का मौसम चल रहा है लेकिन गांव की गंदगी से भरी इस हालत को देखकर रिश्तेदार और बाराती नाराज हो जाते हैं। लोग गांव को लेकर तरह-तरह की बातें करते हैं। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि शादियां तक टूटने लगती हैं क्योंकि बारात गांव के अंदर और घर तक नहीं पहुंच पाती। रामबाबू का कहना है कि करीब 10 साल से यह समस्या बनी हुई है। इस दलित बस्ती में बना लगभग 50 मीटर लंबा नाला पूरी तरह जाम पड़ा है। नाले की सफाई न होने की वजह से गंदा पानी पूरे रास्ते में फैल जाता है।
बस्ती के और भी ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते में जहां घास उगी हुई है उसके नीचे भी गंदा पानी जमा है। यही गांव का मुख्य रास्ता है। लोग मजबूरी में दूसरों के दरवाजों और घरों के सामने से चढ़कर निकलते हैं जिस पर आए दिन झगड़े और गाली-गलौज भी होती है। लोगों ने बताया कि गंदे पानी से निकलने के कारण पैरों में खुजली और दूसरी बीमारियां हो रही हैं। गांव में मच्छरों की भरमार है और बदबू इतनी ज्यादा रहती है कि लोगों का घर के बाहर बैठना मुश्किल हो गया है।
11 मई 2026 को जिला अधिकारी को लिखित पत्र देकर मांग की गई थी कि नाले की सफाई कराई जाए ताकि गंदा पानी रास्तों में न फैले और बारातें आसानी से गांव तक पहुंच सकें। अधिकारियों की तरफ से जांच और सफाई कराने का आश्वासन दिया गया है। महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए अधिकारियों ने कहा कि गांव के लिए नाला और सीसी सड़क का प्रस्ताव भेजा जाएगा और मंजूरी मिलने पर निर्माण कराया जाएगा।
गंदे नाले का पानी घरों के सामने भर जाता है जिससे बीमारियां फैल रही हैं। महिलाओं ने भी इस समस्या को लेकर नाराजगी जताई। दर्जनों ग्रामीण, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत दी। उन्होंने मांग की कि नाले की सफाई कराई जाए और रास्ते में इंटरलॉकिंग या सीसी सड़क बनाई जाए ताकि लोगों को गंदगी और बीमारी से राहत मिल सके। पूरा नाला शतावर और गंदगी से पटा हुआ है। अगर समय रहते सफाई और सड़क निर्माण नहीं हुआ तो लोग इसी तरह बीमारियों और परेशानी के बीच जीने को मजबूर रहेंगे
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में विकास की बातें बहुत होती हैं लेकिन जमीन पर हालात अब भी वैसे ही हैं। लोगों का आरोप है कि कई सालों से मांग करने के बावजूद न तो नाले की सफाई हुई और न ही सड़क बनी। उन्होंने कहा अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आने वाले चुनाव में वोट नहीं देंगे। ग्रामीणों के मुताबिक दलित मोहल्ले में करीब 700 वोटर और लगभग 1200 की आबादी है। जब तक जिला अधिकारी गांव में आकर उनकी समस्या का समाधान नहीं करते तब तक वे मतदान का बहिष्कार करेंगे।
इस मामले में बड़ोखर ब्लॉक के बीडीओ सुभाष चंद्र से भी बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि अगर ग्रामीण जिला अधिकारी के पास गए हैं तो उन्हें ब्लॉक कार्यालय में भी आकर अपनी समस्या बतानी चाहिए। अगर वहां समस्या है तो उसका समाधान कराने की कोशिश की जाएगी। इलाके का प्रस्ताव तैयार करके भेजा जाएगा और बजट मिलने के बाद ही नाला और सड़क का काम शुरू हो पाएगा।
वहीं मवई बुजुर्ग गांव के प्रधान राजकरण का कहना है कि दलित बस्ती में अभी तक कोई विकास कार्य नहीं कराया गया है। उस बस्ती के लिए अभी कोई प्रस्ताव भी पास नहीं हुआ है। प्रधान के मुताबिक यह काम उनके स्तर का नहीं है और इसके लिए विधायक निधि से मांग करनी पड़ेगी। उनका कहना है कि अगर मोहल्ले में सीसी सड़क और नाले का निर्माण हो जाए तो लोगों की काफी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
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