बदलते मौसम का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। कभी तेज गर्मी तो कभी अचानक बारिश होने से लोग बीमार हो रहे हैं। यूपी के बाँदा जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, बुखार और डिहाइड्रेशन से पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में बार-बार हो रहे बदलाव के कारण लोगों की इम्युनिटी प्रभावित हो रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट – गीता देवी, लेखन – सुचित्रा
इस बार लोगों को सबसे ज़्यादा हैरानी इस बात से हो रही है कि जहां अप्रैल-मई में आमतौर पर तेज़ लू चलती थी, वहां कई जगहों पर बारिश, आंधी और ओले पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी भी पड़ रही है। मौसम वैज्ञानिक कहते हैं कि यह “असामान्य मौसम” अब सामान्य बनता जा रहा है। हाल के दिनों में भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department (IMD) ने उत्तर भारत, यूपी, बिहार, दिल्ली-NCR और कई राज्यों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है।
यूपी में बीते दिनों में बारिश और गर्मी
यूपी में अप्रैल की शुरुआत में काफी गर्मी पड़ी और यह गर्मी महीने के अंत से कुछ दिन पहले तक बनी रही। 26 अप्रैल के बाद से मौसम में बदलाव देखने को मिला आंधी, बारिश और ओले के साथ लोगों को गर्मी से राहत तो मिली लेकिन लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर दिया। मौसम का मिजाज अब भी कुछ इसी तरह का है। मई की शुरुआत में भी कभी बारिश तो कभी अचानक तेज धूप ने चिंता बढ़ा दी है।
मौसम ठंडा और गर्म होने से पड़ते हैं बीमार
बाँदा इस बार उत्तर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा है जहाँ पारा 43.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है। बाँदा में तेज धूप, उमस भरी गर्मी और बीच-बीच में हो रही बारिश लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण बड़ी संख्या में लोग बुखार, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। इसका असर जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में साफ दिखाई दे रहा है, जहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बबेरु तहसील के बड़ा गांव की रहने वाली कुंता ने बताया कि उन्हें पिछले चार दिनों से बुखार आ रहा है और अचानक आवाज बंद हो जाती है। इसी परेशानी के चलते वह जिला अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है और बेड तक फुल हो रहे हैं।
गर्मियों में शादी भी बीमार होने की वजह
वहीं दूसरी तरफ इस मौसम में शादी समारोहों का सहालग भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। अधिक भीड़, खान-पान में लापरवाही और देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं। यह भी एक कारण है जिससे अस्पतालों की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक मरीजों से हाउसफुल चल रहे हैं।
मोहन पुरवा गांव की विद्या ने बताया कि वह अपनी मौसी की बेटी की शादी में गई थीं। 7 मई की शाम घर लौटने के बाद 8 मई की रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें बार-बार पतले दस्त और उल्टी होने लगी। शुरुआत में परिवार वालों ने इसे सामान्य पेट खराब होना समझा और घरेलू उपचार कराया, लेकिन कुछ ही समय में उनकी हालत बिगड़ने लगी। पेट में तेज दर्द, कमजोरी और लगातार दस्त होने के कारण शरीर में पानी की भारी कमी हो गई।
रात में हालत ज्यादा खराब होने पर परिवार वाले उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें डायरिया हुआ है। अस्पताल में तुरंत ORS दिया गया और शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए ग्लूकोज चढ़ाया गया। दवाइयों और डॉक्टरों की निगरानी में उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। अगले दिन डॉक्टरों ने हल्का भोजन करने, ज्यादा पानी पीने और कुछ दिन आराम करने की सलाह देकर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया।
पुकारी गांव की रहने वाली विमला कहती हैं “इस समय शादियों का सहालग इतना तेज है कि एक महीने में चार निमंत्रणों में हमें जाना पड़ा। लगातार बाहर का खाना खाने और भागदौड़ के कारण पहले मेरे बेटे की तबीयत खराब हुई, फिर मैं बीमार पड़ गईं।”
उन्होंने बताया कि बेटे के इलाज में निजी अस्पताल में 500 रुपये खर्च हुए। बाद में उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें नरैनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ा, जहां ग्लूकोज चढ़ाने के बाद राहत मिली।
विमला कहती हैं कि उमस भरी गर्मी और शादियों के खान-पान ने लोगों की हालत खराब कर दी है। उन्होंने हंसते हुए कहा, “लड्डू गांठिन पर गे।” उनका मतलब था कि शादी में खर्च तो होता ही है लेकिन बाद में बीमारी के कारण डॉक्टरों पर भी पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
मच्छरों का बढ़ता प्रकोप भी बन रहा बीमारी की वजह
बाँदा की रहने वाली निधि का कहना है कि गर्मी के साथ-साथ मच्छरों की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हर कमरे में कूलर लगाया जा सके। एक छोटे कूलर में पांच लोगों का गुजारा करना पड़ता है। वहीं छत पर सोने पर मच्छरों का इतना प्रकोप है कि चैन से सो पाना मुश्किल हो जाता है।
निधि ने बताया कि उनकी बेटी को वायरल फीवर, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत थी, जिसके बाद वह उसे जिला अस्पताल लेकर आईं। इलाज के बाद अब उसकी हालत में सुधार है, लेकिन अगर मौसम और व्यवस्थाओं की यही स्थिति रही तो बीमारियां और बढ़ सकती हैं।
बाँदा अस्पताल में रोजाना बढ़ रही मरीजों की संख्या
ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉक्टर विनीत सचान का कहना है कि तेज गर्मी और बीच-बीच में हो रही बारिश के कारण वायरल, बैक्टीरियल और पेट संबंधी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। सबसे ज्यादा मरीज पेट दर्द, डायरिया और डिहाइड्रेशन की समस्या लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि शादी समारोहों में बाहर का खाना खाने से भी संक्रमण बढ़ रहा है जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, जिला अस्पताल में हर रोज 50 से अधिक मरीज ऐसे आ रहे हैं जो गर्मी और मौसम संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। पिछले चार दिनों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है जिसके चलते अस्पताल में अतिरिक्त वार्ड तक खोलने पड़े हैं।
बदलते मौसम से सबसे ज्यादा खतरा किन लोगों को?
- बुजुर्ग
- छोटे बच्चे
- दिल और फेफड़ों के मरीज
- बाहर काम करने वाले लोग
- किसान और मजदूर
बदलते मौसम में वायरल और फ्लू के केस ज्यादा
दिन में गर्मी और शाम को ठंडक या बारिश। इस अचानक बदलाव से शरीर का तापमान संतुलन बिगड़ता है। इससे वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, गले में संक्रमण और एलर्जी तेज़ी से बढ़ते हैं। जहां बारिश नहीं हो रही, वहां तेज उमस और गर्मी लोगों को थका रही है। बार-बार मौसम बदलने से शरीर को एडजस्ट करने में दिक्कत होती है चक्कर, कमजोरी, सिरदर्द, डिहाइड्रेशन, लो BP/हाई BP की समस्या बढ़ सकती है।
बदलते मौसम में खुद को ऐसे बचाएं
ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉक्टर विनीत सचान ने लोगों को धूप से बचने, अधिक पानी पीने, बाहर के तले-भुने भोजन और कटे हुए फलों से परहेज करने की सलाह दी है। घर से बाहर तभी निकले जब जरुरी काम हो। लू से बचने के लिए चेहरे को ढक कर निकलें। कपड़ों में हल्के कॉटन यानि सूती के कपड़े पहनें। पानी ज्यादा से ज्यादा पियें।
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