बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार 11 मई 2026 को ‘सहयोग शिविर’ का शुभारंभ करते हुए राज्य के लोगों के लिए ‘सहयोग हेल्पलाइन’ और ‘सहयोग पोर्टल’ लॉन्च किया है। इसके तहत राज्य में लोग अपनी समस्या और शिकायत को ऑनलाइन और कॉल के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि लोगों की समस्या का समाधान मात्र 30 दिनों के अंदर किया जायेगा। वैसे तो पहले भी देश में लोगों की मदद के लिए नंबर जारी किए गए लेकिन क्या समय रहते वह नंबर काम आ पाए या समस्या का समाधान हो पाया? क्या इस बार हेल्पलाइन नंबर 1100 लोगों की समस्या का निपटारा कर पाएगा?

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 11 मई 2026 को सहयोग हेल्पलाइन नंबर और पोर्टल का लोकार्पण के दौरान (फोटो साभार: x/@samrat4bjp)
पटना के संवाद भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नई “सहयोग” व्यवस्था की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, कई जनप्रतिनिधि और बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। बिहार में अब यदि लोग बिजली, पानी, सड़क, राशन, पेंशन, जमीन विवाद या सरकारी योजनाओं की समस्या से परेशान है तो वे शिकायत सीधे “सहयोग पोर्टल” sahyog.bihar.gov.in पर दर्ज कर सकते हैं। जो लोग ऑनलाइन शिकायत नहीं कर सकते, वे हेल्पलाइन नंबर 1100 पर फोन करके भी अपनी समस्या बता सकते हैं।
सरकार के अनुसार, यह हेल्पलाइन सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक काम करेगी। कॉल करने पर अधिकारी शिकायत दर्ज करेंगे और शिकायत करने वाले व्यक्ति को उसकी जानकारी भी दी जाएगी। 19 मई 2026 से हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में सरकार लोगों के पास पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनेगी और मदद करेगी।
मुख्यमंत्री सचिवालय, पटना से जनसेवा के लिए एक नई शुरुआत करते हुए #सहयोग हेल्पलाइन एवं पोर्टल का शुभारंभ किया।
इस पहल के माध्यम से अब हर नागरिक की आवाज सीधे व्यवस्था तक पहुँचेगी, और तय समय सीमा में समाधान भी होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की सीधी निगरानी इस पहल को और अधिक… pic.twitter.com/weHzpvM8TZ
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) May 11, 2026
समस्या का समाधान 30 दिन के भीतर नहीं तो अधिकारी सस्पेंड
सहयोग हेल्पलाइन नंबर और पोर्टल पर आई शिकायतों का समाधान 30 दिनों के अंदर संबंधित विभाग द्वारा हल की जाएंगी और आवेदक को लिखित सूचना दी जाएगी। यदि 30 दिनों के अंदर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो अधिकारी को स्वतः ही सस्पेंड कर दिया जाएगा।
Samrat Choudhary ने Bihar DM -SP को कह दिया, 30 दिनों में फैसला, नहीं तो सीधे सस्पेंड हो जाएंगे…#samratchoudhary #dm #sp #biharnews #news4nation pic.twitter.com/aOCTutffQ5
— News4Nation (@news4nations) May 11, 2026
यूपी में 1090 हेल्पलाइन की सच्चाई
बिहार में जिस तरह लोगों की समस्या हल करने के लिए हेल्पलाइन जारी किया गया है वैसे ही यूपी सरकार ने 2012 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न से निपटने के लिए 1090 वुमन पावर लाइन शुरू की थी। यह सेवा 15 नवंबर 2012 से राज्य में काम कर रही है। उत्तर प्रदेश की महिला सशक्तिकरण हेल्पलाइन 1090 को महिलाओं की सुरक्षा और उत्पीड़न रोकने के लिए एक मजबूत व्यवस्था के रूप में शुरू किया गया था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई लोगों के अनुभव अलग रहे हैं।
1090 हेल्पलाइन नंबर को लेकर सरकार का दावा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 15 नवंबर 2012 से 31 दिसंबर 2025 तक वीमेन पावर लाइन 1090 पर कुल 37,51,816 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से लगभग 99.6% शिकायतों का समाधान कर दिया गया है, यानी ज्यादातर मामलों को सुलझा लिया गया है।
लेकिन जमीनी स्तर पर कई मामलों में शिकायत दर्ज करने के बाद भी कार्रवाई में देरी, पर्याप्त सहायता न मिलना और कभी-कभी सही समय पर समाधान न मिल पाने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इसके अलावा आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे नए खतरे भी बढ़ गए हैं, जिनसे निपटने में व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं दिखती। इस वजह से लोगों की उम्मीद और वास्तविक अनुभव के बीच अंतर दिखाई देता है।
उदाहरण के तौर पर खबर लहरिया की जनवरी 2024 की एक रिपोर्ट में 35 वर्षीय स्टाम्प विक्रेता सीमा देवी ने हेल्पलाइन के माध्यम से समाधान पाने के अपने निराशाजनक प्रयासों के बारे में बताया। कई बार कॉल करने के बावजूद, उन्हें केवल जांच के आश्वासन ही मिले, कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। सीमा ने खबर लहरिया को बताया, “विज्ञापनों में वे महिलाओं के लिए तत्काल सहायता का दावा करते हैं, लेकिन कोई वास्तविक राहत नहीं मिलती; कुछ भी तुरंत नहीं होता।”
उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट के अनुसार, शिकायत दर्ज करने के बाद पीड़ित को स्वचालित रूप से एक पंजीकरण संख्या भेजी जाती है, और शिकायत का समाधान होने तक महिला पुलिस नंबर 1090 संपर्क में रहता है। हालांकि, सीमा के मामले में इनमें से किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
सरकार लोगों की सुविधा और मदद के लिए पोर्टल और हेल्पलाइन शुरू तो कर देती है लेकिन इससे शिकायतों का समय पर और ईमानदारी से समाधान भी होता है? पहले भी कई हेल्पलाइन और पोर्टल शुरू किए गए, जिनमें आंकड़ों में सफलता दिखाई गई, लेकिन ज़मीनी स्तर पर लोगों को देरी, जवाब न मिलना और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अब बिहार में यह जो हेल्पलाइन की सेवा शुरू की गई है यह वास्तव में काम करेगी या इसका हाल भी बाकि नंबर की तरह होगा? क्योंकि सिर्फ कागजों में आंकड़ें दिखाने से जमीनी हक्कीकत नहीं बदलती।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते हैतो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’