खबर लहरिया Blog MP/Chhatarpur: कच्ची सड़क से परेशान ग्रामीण, बारिश में गांव का संपर्क तक टूट जाता है

MP/Chhatarpur: कच्ची सड़क से परेशान ग्रामीण, बारिश में गांव का संपर्क तक टूट जाता है

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र के कैंडी गांव में पिछले करीब 10 सालों से सड़क की हालत खराब बनी हुई है। गांव की आबादी करीब 1200 बताई जा रही है लेकिन आज भी लोग कच्चे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – रचना 

कच्ची सड़क में भरा पानी (फोटो साभार: अलीमा)

इस बारे में ग्रामीण से बात करने पर ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं और सड़क बनवाने का वादा करते हैं पर चुनाव खत्म होते ही कोई वापस मुड़कर नहीं देखता। बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। गांव वालों के मुताबिक थोड़ी सी बारिश में ही सड़क पर इतना कीचड़ हो जाता है कि लोगों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जब वे सड़क बनवाने की मांग करते हैं तो सरपंच और जिम्मेदार अधिकारी बजट नहीं होने की बात कहकर मामला टाल देते हैं। ऐसे में गांव के लोग सालों से बदहाल सड़क की परेशानी झेल रहे हैं।

गांव वालों से मिली जानकारी के अनुसार –

भागवत अहिरवार का कहना है कि वह कई सालों से सड़क को इसी खराब हालत में देख रहे हैं। जो भी बाइक या गाड़ी लेकर निकलता है उसके गिरने का डर बना रहता है। गर्मियों में सड़क से इतनी धूल उड़ती है कि सामने तक साफ दिखाई नहीं देता।

बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। कुछ दिनों पहले उनकी पत्नी बाइक से गिर गई थीं जिसमें उनका पैर टूट गया था। सड़क पर पानी भरा हुआ था। इसलिए गड्ढे और रास्ता समझ नहीं आया और बाइक फिसल गई। उन्होंने कहा कि पत्नी को ठीक होने में काफी समय लगा था।

उसी गांव में रहने वाले भागवत ने बताया कि गांव वाले कई बार सड़क बनवाने की मांग कर चुके हैं पर हर बार बजट न होने की बात कहकर मामला टाल दिया जाता है।           वहीं लालकुंवर अहिरवार बताती हैं कि उन्होंने इस सड़क को कभी ठीक हालत में नहीं देखा। बारिश होते ही सड़क पर पानी भर जाता है और लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने एक घटना को याद करते हुए बताया कि एक बार उनकी सास की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई थी। उस समय तेज बारिश हो रही थी। एंबुलेंस को फोन किया गया लेकिन खराब सड़क की वजह से वह गांव तक नहीं आ सकी और करीब 8 किलोमीटर दूर ही रुक गई। मजबूरी में चार लोगों ने उनकी सास को खाट पर लिटाकर वहां तक पहुंचाया तब जाकर उन्हें छतरपुर अस्पताल ले जाया जा सका। 

खराब रास्ते (फोटो साभार: अलीमा)

 गांव की सरपंच और जनपद पंचायत का पक्ष 

गांव की सरपंच देवकी कुशवाहा से भी इस मामले पर राय ली गई उनका कहना है कि सड़क की समस्या काफी समय से बनी हुई है। सड़क बनवाने के लिए कई बार जनपद पंचायत में प्रस्ताव भेजा जा चुका है पर अब तक बजट मंजूर नहीं हो पाया है। उनका कहना था कि वह खुद भी चाहती हैं कि सड़क जल्द बने क्योंकि उसी रास्ते की तरफ उनका खेत भी पड़ता है और उन्हें भी आने-जाने में दिक्कत होती है। 6 दिसंबर 2025 को एक बार फिर सड़क निर्माण का प्रस्ताव जनपद पंचायत को भेजा गया है और उम्मीद है कि इस बार मंजूरी मिल जाएगी।

वहीं जनपद पंचायत में पदस्थ संजय सिंह पैड सीईओ ने बताया कि सरपंच की ओर से सड़क निर्माण के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए हैं। इस बार आए प्रस्ताव को आगे बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बजट और स्वीकृति मिलती है सड़क निर्माण का काम प्राथमिकता के साथ शुरू कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि गांव के लोगों को जल्द राहत मिल सके।

गांव के बुजुर्ग मेही लाल का कहना है कि यह गांव का मुख्य शॉर्टकट रास्ता है और रोजाना करीब एक से दो हजार लोग इसी सड़क से गुजरते हैं। सड़क खराब होने के बावजूद लोग मजबूरी में इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। किसान खेती के काम से निकलते हैं बच्चे स्कूल जाने के लिए इसी सड़क से जाते हैं पर कीचड़ और खराब रास्ते की वजह से बच्चों के कपड़े खराब हो जाते हैं और कई बार वे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। वाहन चालक भी आए दिन हादसों का शिकार होते रहते हैं।

मेही लाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय नेता और प्रत्याशी वोट मांगने जरूर आते हैं और सड़क की समस्या पर कोई ठोस काम नहीं होता। हर बार सिर्फ भरोसा दिया जाता है हालत जस की तस बनी हुई है।

 

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