कोविड महामारी के बाद अब हंता वायरस को लेकर दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ने लगी है। बताया जा रहा है कि इस वायरस से जुड़े मामले एक क्रूज़ शिप (जहाज़) से सामने आए हैं जो अटलांटिक महासागर की यात्रा पर था। इस जहाज़ पर सफर कर रहे कई यात्रियों में संक्रमण जैसे लक्षण पाए गए जिसके बाद अलग-अलग देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने साफ किया है कि हंता वायरस कोविड-19 या इन्फ्लूएंजा जैसा नहीं है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता इसलिए फिलहाल इसे बड़े स्तर का खतरा नहीं माना जा रहा है। हालांकि संक्रमित लोगों के मिलने के बाद कई देशों में निगरानी बढ़ा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एमवी होंडियस नाम के जहाज़ पर पांच लोगों में वायरस की पुष्टि हुई है जबकि आठ अन्य लोगों में इसके लक्षण देखे गए हैं। संक्रमित लोगों में एक डच महिला की मौत हो चुकी है। वहीं एक ब्रिटिश यात्री दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में भर्ती है और एक स्विस नागरिक का इलाज ज़्यूरिख़ में चल रहा है। जहाज़ पर मौजूद कुछ संदिग्ध यात्रियों में एक ब्रिटिश व्यक्ति एक डच क्रू सदस्य और एक जर्मन नागरिक भी शामिल हैं। इनमें से कुछ लोगों को इलाज के लिए नीदरलैंड लाया गया है जबकि कुछ की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हालांकि कई लोगों में लक्षण दिखने के बावजूद अभी तक सभी की रिपोर्ट पॉज़िटिव नहीं आई है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार यह जहाज़ अर्जेंटीना से रवाना होकर अटलांटिक महासागर पार करते हुए केप वर्डे की तरफ जा रहा था। इसी दौरान कुछ यात्री बीच में ही जहाज़ छोड़कर अलग-अलग देशों में चले गए। अमेरिका के एरिज़ोना और जॉर्जिया राज्यों के अधिकारियों ने बताया है कि वे उन यात्रियों पर नजर बनाए हुए हैं जो यात्रा बीच में छोड़कर अमेरिका लौटे थे। फिलहाल उनमें कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।
ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने भी जानकारी दी है कि दो ब्रिटिश यात्री संभावित संपर्क में आने के बाद घर पर आइसोलेशन में हैं। वहीं सेंट हेलेना, दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड से भी संक्रमण से जुड़े मामले सामने आए हैं। फिलहाल जहाज़ में 23 देशों के 146 लोग अभी भी सवार हैं। यह शिप इस हफ्ते कैनरी आइलैंड्स पहुंचने वाला है जहां सभी यात्रियों की मेडिकल जांच की जाएगी। इसके बाद ही उन्हें अपने-अपने घर लौटने की अनुमति दी जाएगी।
हंता वायरस क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा?
हंता वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की “हंतान” नदी के नाम पर रखा गया है। यह कोई एक वायरस नहीं वायरसों का एक पूरा समूह है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी (WHO) के मुताबिक इसकी 20 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें ज्यादातर वायरस चूहों, गिलहरियों और दूसरे कुतरने वाले जानवरों से फैलते हैं। आमतौर पर संक्रमित जानवरों के सूखे मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है। जब यह गंदगी हवा में मिल जाती है और इंसान सांस के जरिए उसे अंदर ले लेता है तब संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ मामलों में संक्रमित चूहे के काटने से भी यह वायरस फैल सकता है।
यह हंता वायरस कैसे फैलता है और कितना खतरनाक है?
हंता वायरस आमतौर पर एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता। हालांकि “एंडीज़ वायरस” इसका एक ऐसा स्ट्रेन माना जाता है जो बेहद करीब और लंबे संपर्क में आने पर इंसानों के बीच फैल सकता है पर ऐसे मामले बहुत कम देखे गए हैं। यह वायरस फ्लू की तरह छींक या खांसी की बूंदों से नहीं फैलता।
हंता वायरस के दो मुख्य प्रकार माने जाते हैं। एक प्रकार किडनी पर असर डालता है जबकि दूसरा फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसका एक खतरनाक वैरिएंट “न्यू वर्ल्ड हंता वायरस” अमेरिका में पाया जाता है। इससे होने वाली बीमारी में फेफड़ों में पानी भर सकता है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। इस स्थिति को हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। इस बीमारी में मौत का खतरा काफी ज्यादा माना जाता है।
इस हंता वायरस के लक्षण और बीमारियां
बीबीसी के रिपोर्ट अनुसार हंता वायरस से दो गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। पहली है हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम यानी HPS। इसकी शुरुआत अक्सर बुखार, थकान और मांसपेशियों में दर्द से होती है। इसके बाद सिरदर्द, चक्कर आना, कंपकंपी और पेट से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। गंभीर हालत में मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है। इस बीमारी के लक्षण कई बार संक्रमण के एक से आठ हफ्ते बाद दिखाई देते हैं।
दूसरी बीमारी है हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं लेकिन बाद में यह किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके कारण लो ब्लड प्रेशर, शरीर के अंदर खून बहना और किडनी फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि सभी मामलों में मौत नहीं होती पर गंभीर संक्रमण होने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
हंता वायरस का इलाज और बचाव
हंता वायरस के लिए फिलहाल कोई खास दवा या तय इलाज मौजूद नहीं है। हालांकि अगर संक्रमण का पता शुरुआती समय में चल जाए और मरीज को तुरंत इलाज मिल जाए तो ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। डॉक्टर मरीज की हालत के हिसाब से इलाज करते हैं ताकि शरीर पर वायरस के असर को कम किया जा सके। गंभीर मामलों में मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट देना पड़ सकता है। अगर सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो तो मरीज को वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ सकता है।
वहीं जिन लोगों की किडनी प्रभावित होती है उन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है। हालत ज्यादा बिगड़ने पर मरीज को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जाता है। विशेषज्ञ इस वायरस के इलाज के नए तरीकों पर भी काम कर रहे हैं और कई जगहों पर ट्रायल चल रहे हैं। हालांकि अभी तक हंता वायरस से बचाव के लिए कोई ऐसी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जिसे दुनिया भर में बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा हो। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस से बचने के लिए सबसे जरूरी है संक्रमित चूहों और उनके मल-मूत्र के संपर्क से दूरी बनाकर रखना।
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