इस नए मुद्दे पर खबर लहरिया की मैनेजिंग एडिटर मीरा देवी ने बात की BSP के पूर्व जिला अध्यक्ष रामसेवक प्रजापति से। बातचीत में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों, BSP के मौजूदा हालात और उसके पुराने कैडर को लेकर रामसेवक ने खुलकर अपनी बात रखी। रामसेवक का दावा है कि 2027 में “भटका हुआ समाज” एक बार फिर BSP के साथ लौटेगा। बातचीत में उन्होंने उन नेताओं पर भी सवाल उठाए जो डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम की जयंती के मौके पर दलित बस्तियों में पहुंचते हैं। रामसेवक का सवाल है कि अगर ये नेता सच में इन महापुरुषों के विचारों को मानते हैं, तो अपनी बस्तियों में उनकी जयंती क्यों नहीं मनाते? उनका आरोप है कि दलित बस्तियों में बनी प्रतिमाओं के सामने कार्यक्रम और दिखावे के बाद नेता वापस लौट जाते हैं। बता दें की 2007 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली BSP 2022 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट जीत सकी थी। अब उस इकलौते विधायक उमाशनकर सिंह के निधन के बाद 2026 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में BSP का एक भी विधायक नहीं है। तो क्या BSP 2027 में अपना राजनीतिक आधार वापस खड़ा कर पाएगी? क्या उसका दावा किया गया कैडर और “मिशन” उसे फिर विधानसभा तक पहुंचा पाएगा? और क्या दलित समाज एक बार फिर BSP की ओर लौटेगा?
ये भी देखें –
मूद्दे की बात: पुलिस कार्रवाई के बाद Jantar Mantar पर बढ़ रही है महिलाओं और युवाओं की भागीदारी
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’