तमिलनाडु में नौ पुलिसकर्मी को दोहरे फांसी की सजा दी गई गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के सातानुकुलम में 19 जून 2020 को पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान दुकान खुली रखने के आरोप में व्यापारी जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को हिरासत में लिया था।
दोनों को थाने ले जाया गया जहां परिजनों के मुताबिक उनके साथ पूरी रात बुरी तरह मारपीट की गई। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया लेकिन 22 जून की रात बेनिक्स की और अगले दिन सुबह जयराज की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया। मद्रास हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और जांच पहले राज्य की CB-CID को और बाद में CBI को सौंप दी गई। जांच में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे और कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अदालत का फैसला और जांच में क्या सामने आया
करीब छह साल बाद मदुरै की अदालत (मद्रास हाईकोर्ट) ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 6 अप्रैल 2026 को 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दी है। कोर्ट ने माना कि दोनों को हिरासत में सुनियोजित (सोच-समझकर) तरीके से टॉर्चर किया गया था इसलिए सख्त सजा जरूरी है। जांच के दौरान एक महिला कांस्टेबल की गवाही अहम रही जिसने बताया कि थाने में रातभर पिटाई हुई थी और वहां खून के निशान भी थे। हालांकि थाने का CCTV फुटेज सुरक्षित नहीं रखा गया जिससे कुछ सबूत नहीं मिल सके।
इस मामले में इंस्पेक्टर श्रीधर समेत कई पुलिसकर्मी आरोपी थे। अदालत ने यह भी कहा कि यह मामला सत्ता के गलत इस्तेमाल का गंभीर उदाहरण है लेकिन इससे पूरी पुलिस व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।
अदालत की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने इस मामले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर इस केस की निगरानी बेंच खुद नहीं करती तो शायद सच सामने ही नहीं आ पाता। अदालत ने इसे ऐसा मामला बताया जिसने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया और साफ तौर पर सत्ता के गलत इस्तेमाल को दिखाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग सरकारी पैसे से वेतन लेते हैं वे अपने काम में गलती या हिंसा के लिए तनाव का बहाना नहीं बना सकते।
अदालत ने यह भी माना कि इस केस में सीसीटीवी फुटेज जैसे सबूत सामने आए जो आमतौर पर ऐसे मामलों में नहीं मिलते। साथ ही कोर्ट ने कहा कि राज्य में कई ईमानदार पुलिसकर्मी भी हैं लेकिन ऐसे गंभीर मामलों में सिर्फ उम्रकैद जैसी सजा से पुलिस के भीतर जरूरी डर नहीं बनेगा।
किसको कितनी सजा मिली?
अदालत ने इस मामले में इंस्पेक्टर श्रीधर समेत 9 दोषियों को बेहद सख्त सजा सुनाई है। सभी को “डबल डेथ सेंटेंस” यानी दो बार फांसी की सजा दी गई है। इसके साथ ही अलग-अलग धाराओं में 1 साल से लेकर 7 साल तक की जेल और कुल मिलाकर करीब 76.38 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इंस्पेक्टर श्रीधर पर सबसे ज्यादा 24.10 लाख रुपये का जुर्माना लगा है। वहीं बालकृष्णन को 16.80 लाख, रघुगणेश को 5.20 लाख, मुरुगन को 10.10 लाख और सामदुरई को 5.60 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा मुथुराजा पर 3.20 लाख, सेल्लादुरई पर 14.40 लाख, थॉमस फ्रांसिस और वेलुमुथु पर 10.54-10.54 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
सभी दोषियों को अलग-अलग धाराओं में जेल की सजा भी दी गई है जो 1 साल से लेकर 7 साल तक की है।
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