खबर लहरिया Blog Nepal floods: नेपाल में अचानक बाढ़ कैसे आया? बाढ़ में अब तक 384 लोगों की हुई मौत और कई हैं लापता 

Nepal floods: नेपाल में अचानक बाढ़ कैसे आया? बाढ़ में अब तक 384 लोगों की हुई मौत और कई हैं लापता 

                        

नेपाल के भोटेकोशी नदी में आई अचानक भीषण बाढ़ और तबाही ने इस समय भारी तबाही मचा रखी है। इस भीषण आपदा में अब तक तक़रीबन 384 लोगों की मौत चुकी गई। इस बाढ़ में हजार से ज़्यादा लोग अभी भी लापता हैं जिसमें कुछ भारतीय सेना, विदेश पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

नेपाल बाढ़ में तबाही की तस्वीर (फोटो साभार: एक्स)

बाढ़ में लापता लोगों का रेस्क्यू किया जा रहा है। मौतों का आंकड़ा बढ़ने की अभी भी आशंका है। बता दें ये बाढ़ नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत बॉर्डर पर आई है।  

बीते 26 अगस्त 2026 को करीब 8 बजे के आसपास नेपाल और चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में इसे तेज भूकंप बताया गया। फिर बाद में जानकारी सामने आई कि ये झटके पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ़ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था उसका था। माना जा रहा है कि इस बाढ़ का कारण सीमा के तिब्बत वाले हिस्से से भोटे कोशी नदी में अचानक और भारी मात्रा में पानी का आना था। वीडियो में दिख रहा है कि मिट्टी और चट्टानों की एक दीवार इमारतों, सड़कों और गाड़ियों को बहा ले जा रही है। यह बाढ़ इतनी तेज गति से आई कि लोगों को बचने का मौका तक नहीं मिल सका। 

बाढ़ की तबाही का एल अलग मंजर देखा गया जिसमें बाढ़ सब कुछ बहा ले गया। 

नेपाल में बाढ़ आने का कुछ और भी कारण 

– एक और कारण माना जा रहा है कि तिब्बत में भारी बर्फबारी और भूकंप के कारण झीलों का निर्माण हुआ था। इसमें भारी मात्रा में पानी जमा था जो किसी कारण से टूट गया और पूरा पानी नीचे की ओर तेजी से बहने लगा। 

– भूवैज्ञानिकों का मानना है कि इस बाढ़ के पीछे किसी ग्लेशियर या ग्लेशियर से बनी झील के टूटने की भी आशंका है। संभावना है कि ऊंचाई वाले इलाके में ऐसी ही कोई ग्लेशियर झील बनी हो। भूकंप या किसी दूसरी प्राकृतिक हलचल के कारण अगर यह झील अचानक टूट गई होगी तो उसमें जमा पानी तेजी से नीचे आया होगा। 

– एक और कारण पर्माफ्रॉस्ट को भी माना जा रहा है। पर्माफ्रॉस्ट का मतलब इसी ज़मीन, मिट्टी, चट्टान से है जो लगातार कम से कम दो साल तक 0 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान में जमी रहती है। ये आम तौर पर बहुत ऊँचे और ठंडे पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है। तिब्बत जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में अगर भूकंप या किसी दूसरी वजह से जमी हुई जमीन और चट्टानों का हिस्सा टूटकर नीचे आया होगा, तो उसके साथ बड़ी मात्रा में पानी और मलबा भी नदियों में पहुंच गया होगा। पानी और मलबे के इस तेज बहाव ने अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी।

इस पर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि शुरुआत में मिली जानकारी के मुताबिक भूकंप के बाद पहाड़ों पर बर्फ और मलबे का बड़ा हिस्सा नीचे खिसका, जिससे भोटे कोशी नदी के इलाके में अचानक बाढ़ की स्थिति बनी हो सकती है। अधिकारियों ने रसुवा जिले के स्याप्रु बेसी और तिमुरे इलाके में अचानक बाढ़ आने की पुष्टि की है।

नेपाल बाढ़ का बाकी राज्यों पर असर 

नेपाल में बाढ़ का असर अब भारत के कुछ राज्यों में भी दिखाई देने की आशंका है। इसका सबसे ज़्यादा असर बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी नदियों पर पड़ सकता है। नेपाल से करीब 3 मीटर उंची बाढ़ की लहर आने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके चलते बिहार के कई जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। 

पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास नजर रखी जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर को भी अलर्ट पर रखा गया है। नेपाल से आने वाला पानी त्रिशुली नदी के रास्ते गंडक में पहुँचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ने का खतरा है। इस बाढ़ का असर उत्तर प्रदेश पर भी देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश महाराजगंज और कुशीनगर में बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। 

नेपाल बाढ़ पर सरकार क्या कह रही है 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स अकाउंट में लिखा है कि “मैंने प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जानमाल की हानि पर शोक व्यक्त किया। इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों में मिलकर काम कर रही हैं।”

कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने एक्स पर लिखा कि “कल काठमांडू के लिए रवाना हुआ, पहाड़ियों में घटी भयावह घटना और उससे हुए विनाशकारी नुकसान से पूरी तरह अनभिज्ञ था। तिब्बत सीमा के पास उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे व्यापक तबाही मचा दी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ग्लोबल वार्मिंग और/या तिब्बत में आए भूकंप के कारण ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिर गया होगा। पहुंचने पर पता चला कि कई लोगों की जान जा चुकी है (अब तक 160 की पुष्टि हो चुकी है) और लगभग 2000 या उससे अधिक लोग लापता हैं। उग्र बाढ़ के पानी ने कम से कम 19 मोटर योग्य पुलों को नष्ट कर दिया, बेत्रावती-रसुवागढ़ी राजमार्ग का लगभग 40 किलोमीटर हिस्सा बह गया और आठ चालू जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुँचाया। मैं राहत सहायता के लिए भारत सरकार के तत्काल वादे का पूरी तरह से समर्थन करता हूँ। नेपाल को हर संभव मदद की ज़रूरत है। मेरी संवेदनाएं पीड़ितों और उनके परिजनों के साथ हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक शामिल हैं, जिनमें कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकले सौ लोग भी शामिल हैं। लापता लोगों के लिए प्रार्थना; ईश्वर करे उन्हें जल्द ही बचा लिया जाए।” 

नेपाल बाढ़ को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिख कर कुछ निर्देश दिए हैं। “नेपाल के ऊपरी जल निगम क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति पर नजर डालते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में संबंधित उत्पाद को पूरी तरह से बनाए रखने का निर्देश दिया गया। पश्चिम मंदिर, पूर्वी मंदिर, गोपालगंज, सारणी, कांच और आभूषण जिसमें सजावटी सजावटी वस्तुएं शामिल हैं, रात्रि-रात्रि पर्यवेक्षण, नाइट पेट्रोलिंग और आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित करने के निर्देश। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के प्रतिष्ठित अनुयायी हैं। कर्मियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” 

उत्तर प्रदेश सरकार भी इस बाढ़ से अलर्ट जारी किया है। यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स अकाउंट पर लिखा है कि “नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से हुई क्षति अत्यंत चिंताजनक है।

भगवान पशुपतिनाथ से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना है। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश के जनपद महराजगंज और कुशीनगर में गंडक एवं नारायणी नदियों के जलस्तर में वृद्धि तथा बाढ़ की संभावना के दृष्टिगत स्थानीय प्रशासन को पूर्ण सतर्कता बरतने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।”

पश्चिम बंगाल सरकार नेपाल में फंसे अपने राज्य के पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, कामगारों और कारोबारियों की जानकारी जुटा रही है। सरकार भारतीय दूतावास और नेपाल के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है, ताकि वहां फंसे लोगों की स्थिति का पता लगाया जा सके और जरूरत पड़ने पर मदद पहुंचाई जा सके।

चंदननगर और उत्तर 24 परगना के बारासात के कुछ लोगों के भी नेपाल में फंसे या लापता होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे लोगों के परिजनों की मदद के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। परिजन 033-24793311 और 9147890181 पर संपर्क कर सकते हैं। वहीं कोलकाता पुलिस ने 18003455678 और व्हाट्सऐप के लिए 9874902880 नंबर जारी किया है।

कुछ और राज्यों ने हेल्पलाइन नंबर जारी की है

– उत्तर प्रदेश: 1070

– महाराष्ट्र: 1070 और +91-9321587143

– तेलंगाना: 9871999044, 9949351270 और 9618597969

– राजस्थान: 1070, 112 और 0141-2851960, 0141-2385776, 0141-2385777, 0141-2227296, 0141-2927392, 0141-2227603

– ओडिशा: 011-23012807, 7428135044 और 8527580245

– सिक्किम: 03592201145, 03592202461 और 03592202256

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