आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस तेज है। इसे शिक्षा, योग्यता और अवसरों में असमानता की सबसे बड़ी वजह बताकर आरक्षण खत्म करने की मांग की जा रही है। इसी बीच ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ से जुड़े लोगों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया, जहां लगे नारों और सामने आए बयानों ने आरक्षण विरोध की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। क्या आरक्षण का विरोध सिर्फ एक नीति का विरोध है या इसके पीछे जातिगत श्रेष्ठता की सोच भी मौजूद है? जंतर-मंतर पर ‘SC से आज़ादी’, ‘UGC से आज़ादी’, ‘हमारे कुएं में इनको पानी क्यों पीना है?’ जैसे नारों और टिप्पणियों को इसी सवाल के संदर्भ में समझना जरूरी है। इस वीडियो में बात होगी कि आरक्षण आखिर क्यों लाया गया था, इसका उद्देश्य आर्थिक गरीबी दूर करना नहीं बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक और शैक्षणिक बहिष्कार तथा प्रतिनिधित्व की कमी को दूर करना क्यों था। साथ ही अजीत भारती के विवादित बयानों और SC/ST Act के खिलाफ उठती आवाजों के जरिए समझेंगे कि जातिवाद सिर्फ छुआछूत नहीं, बल्कि सामाजिक सत्ता और बराबरी से जुड़ा सवाल भी है।
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