चित्रकूट के मऊ ब्लॉक के छतैनी मजरे में करीब 1 हजार लोग साफ पानी न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं। 6 महीने से सौर ऊर्जा आधारित पेयजल व्यवस्था बंद है और 4 में से 2 हैंडपंपों से गंदा पानी निकल रहा है। एक मात्र सहारा कुआं उसके भी घाट और पत्थर साफ नहीं।
रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – रचना
चित्रकूट जिले के मऊ ब्लॉक के डोडिया माफी गांव के मजरा छतैनी में करीब एक हजार लोग रहते हैं। इस पूरे गांव में पीने के पानी का व्यवस्था करीब एक साल से खराब है। गांव में जो हैंडपंप है वो पिछले एक साल से खराब पड़ा हुआ है। इस हाल में ग्रामीण सालों पुराना एक कुएँ के सहारे अपना काम चला रहे हैं। दिक्कत की बात ये है कि उस कुएँ की हालत भी खराब हुई पड़ी है।
उसी गांव की ही एक महिला कलावती खबर लहरिया को बताती है कि कुएँ की मरम्मत हुए कई साल बीत चुके हैं। कुएँ के पास की कुछ सीढ़ियाँ कई जगह से टूट चुकी हैं। उनका कहना है कि “पानी भरने के दौरान लोगों के पैर फिसलने का डर होता है। इस समय कोई फिसल कर गिर जाए तो हाथ-पैर टूट सकते हैं।” कलावती के अनुसार कुछ दिन पहले ही रानी नाम की महिला कुएँ में पानी भरने गई थी। उसी दौरान वो पैर फिसला और वो गिर गई जिसके बाद उनके पैर में मोच आ गया।
गांव में पानी की और कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है जिसके कारण उन्हें इसी कुएँ से पानी भरना होता है। और उसी फिसलन वाली जगह पर रिस्क के साथ पानी लेना ही पड़ता है।
बारिश में पानी और भी गंदा हो जाता है
खबर लहरिया को बताते हुए कुसुम ने बताया कि कुवाँ इतना पुराना है कि इसे बने हुए चार पीढ़ियाँ बीत चुकी है। तक़रीबन बीस साल पहले वहां के पूर्व प्रधान मनका रामखेलावन द्वारा एक बार कुएँ की साफ-सफाई किया गया था। इसके बाद से कुएँ की नियमित सफाई नहीं हुई है। बारिश के मौसम में कुएँ की पानी की स्थिति और भी खराब हो जाती है।
कुछ और ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के बाद पानी में छोटे-छोटे कीड़े दिखाई देते हैं। इसी पानी को पीने से फिर गांव के लोग बीमार भी पड़ जाते हैं। गांव वालों के मुताबिक गांव में कालरा और टाइफाइड जैसी बीमारी फैली है। उन्होंने गांव में करीब 25 लोगों की बीमार पड़ने की बात कही। इस स्थिति में तबियत खराब हो जाने पर वे इलाज नहीं करवा पाते क्योंकि सब कुछ महंगा होता है। वहां के रहने वाले सब रोजी-मज़दूरी ही करते हैं। “हम दवा करवाएँ या घर का खर्च चलाएँ? पानी ही साफ नहीं है तो हम पिए क्या?”
सौर ऊर्जा पेयजल भी छह महीने से बंद पड़ा है।
गांव में कुएँ के अलावा घर-घर पानी पहुँचाने वाली सौर ऊर्जा आधारित पेयजल की भी सुविधा दी गई है। लेकिन उस सौर ऊर्जा से पानी की टंकी भी नहीं चलती है। टंकी से पाइप के माध्यम से घर तक पानी पहुँचाया जाता था। सौर ऊर्जा भी करीब छह महीने सूखा पड़ा हुआ है जिसे अभी तक दोबारा ठीक नहीं करवाया गया। जिसके बाद सब हैंडपंप और कुएँ पर ही निर्भर हैं।
गांव वालों के अनुसार जितनी आबादी है उसके हिसाब से पानी की पूर्ति गांव में नहीं हो पाती है।
चार हैंडपंप में से दो हैंडपंप में आता है गंदा पानी
ये भी जानकारी मिली कि छतैनी मजरे में में पीने के पानी के लिए कुल चार हैंडपंप हैं। इनमे से दो हैंडपंप में पानी गंदा आता है। यानी चार में से सिर्फ दो हैंडपंप सही चलता है। एक हैंडपंप करीब दस साल पहले लगाया गया था तब से ही उसमें से पानी गंदा आ रहा है। दूसरे का भी लगभग वही हाल है।
पानी मटमैला होता है। पीने में स्वाद नकम और खारा जैसा होता है। अब इस पूरी स्थिति में कुएँ का पानी ही पूरे डोडिया माफी गांव के लिए एक मात्र साधन है और उस कुएँ की भी स्थिति खराब है।
गांव वालों की मांग क्या है?
साफ पानी के सीमित स्रोतों के कारण ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ स्वास्थ्य का संकट भी खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों की मांगे हैं कि कुएँ की तत्काल सफाई और सही मरम्मत की जानी चाहिए।
गांव के लोगो की मांग है कि कुएँ की सफाई, मरम्मत और पानी की जांच हो। पानी की गुणवत्ता की जांच भी कराई जाए।
इसके अलावा छह महीने से खराब पड़ी सौर ऊर्जा आधारित पेयजल व्यवस्था को जल्द चालू कराने और गंदा पानी देने वाले दोनों हैंडपंप की जांच कराने की मांग की गई है।
कुएँ का सफाई कराया गया था, प्रधान श्वेता पति रमेश
इस पानी की व्यवस्था को लेकर गांव के प्रधान श्वेता, जिसके जगह पर उनके पति रमेश से बात हुई। उनके अनुसार ये बताया गया कि गांव में लगभग दो हजार की आबादी है। छतैनी गांव के कुएँ का पहले एक बार सफाई और गहरीकरण कराया गया था। अभी फिर से सफाई के लिए कार्ययोजना में डलवा दिए गए हैं। अगर बजट पास हो जाता है तो आने वाली गर्मी तक कुएँ की पूरी मरम्मत करवा दी जाएगी।
उनके द्वारा ये माना गया कि गांव के लोग उसी कुएँ का पानी पीते हैं और उसी पर ही निर्भर है। गांव में सौर ऊर्जा जो खराब पड़ा है उसके लिए कोई मिस्त्री नहीं मिल रहा।। एक बार ब्लॉक में लिखित आवेदन दिया गया है पर अभी तक कुछ आया ही नहीं है।
वहीं आशा कार्यकर्ता उर्मिला ने बताया कि इस साल की पूरी बारिश निकल गई लेकिन ब्लीचिंग पाउडर ही उपलब्ध नहि हुआ। जब विभाग से पूछा गया तो कहा गया कि सोमवार को भेज दिया जाएगा। “जब ब्लीचिंग पाउडर मिल जाएगा तो हम कुएँ में डलवा देंगे। पर अभी तक मिला ही नहीं है।”
सचिव सुरेन्द द्वारा कहा गया गांव में जो भी दिक्कत सामने आती है उसकी जानकारी प्रधान लिखित में देते हैं। इसके लिए बैठक भी होती है। रही बात कुएँ की तो मरम्मत की बात कार्ययोजना में डाल दिया गया है। बजट पास होने के बाद काम करवा दिया जाएगा।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’




