बाँदा की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम मोहन साहू अब कांग्रेस के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं। बाँदा नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष और खुद को ‘बाँदा का बेटा’ कहने वाले मोहन साहू लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं। उन्हें बाँदा में होने वाले कई दाह संस्कारों में लोगों के साथ खड़े होकर कंधा देते हुए भी देखा जाता रहा है, जिसके चलते उनकी स्थानीय स्तर पर एक अलग पहचान बनी है। मोहन साहू का कहना है कि वह राहुल गांधी के शिक्षा से जुड़े अभियान और उनकी विचारधारा से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। लेकिन ऐसे समय में जब सपा और कांग्रेस INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, उनका सपा छोड़कर कांग्रेस में जाना कई सवाल खड़े करता है। इस बातचीत में मोहन साहू से हमने पूछा- सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या राहुल गांधी उन्हें अखिलेश यादव से बेहतर नेता लगते हैं? उत्तर प्रदेश में महज़ दो विधानसभा सीटों तक सिमटी कांग्रेस दोबारा अपनी जमीन कैसे तैयार करेगी? इसके अलावा बातचीत में राहुल गांधी की ग्रामीण इलाकों में छवि, बुंदेलखंड में कांग्रेस के संभावित वोट बैंक, जातिगत राजनीति, आरक्षण और आने वाले विधानसभा चुनाव में मोहन साहू के कांग्रेस प्रत्याशी बनने की संभावनाओं पर भी सवाल किए गए।
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