खबर लहरिया Blog Swine Flu: दिल्ली समेत कई राज्यों में फैला स्वाइन फ्लू, मौत भी, कितना ख़तरनाक है H1N1 वायरस? पहले कहाँ और कैसे आया 

Swine Flu: दिल्ली समेत कई राज्यों में फैला स्वाइन फ्लू, मौत भी, कितना ख़तरनाक है H1N1 वायरस? पहले कहाँ और कैसे आया 

                                       

 

स्वाइन फ्लू ने एक बार फिर दस्तक दे दिया है। अब स्वाइन फ्लू धीरे-धीरे दिल्ली समेत देश के और भी राज्यों में अपना पैर पसार रहा है। देश की राजधानी दिल्ली शहर में तेजी से H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। इस साल अब तक 1,777 केस रिकॉर्ड किए गए हैं जबकि पिछले साल 229 H1N1 केस सामने आए थे। 

सांकेतिक तस्वीर

आज तक में छपी खबर अनुसार पिछले 24 घंटे में राजधानी में 166 नए केस सामने आए हैं। इसके साथ ही कुल मामलों की संख्या 2,600 के पार पहुंच गई है। इसी बीच दिल्ली सरकार के मंत्री डॉक्टर पंकज सिंह इंदिरा गांधी द्वारा लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं उन्होंने कहा है कि डरने के बजाय सावधानी बरतने की जरुरत है। फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है, जिससे लोगों को पैनिक करने की जरूरत पड़े। 

और भी राज्यों में स्वाइन फ्लू का असर 

– सबसे पहले छत्तीसगढ़ की बात करें तो प्रदेश भर में इस वर्ष स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के 105 मामले सामने आ चुके हैं।स्वास्थ्य विभाग के एक जनवरी से 27 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार रायपुर में सबसे अधिक 51 संक्रमित मिले हैं।अब तक राज्य के दो प्रमुख जिलों दुर्ग और बिलासपुर से कुल 13 स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से दुर्ग जिले में 6 और बिलासपुर जिले में 7 मरीजों की पुष्टि हुई है। राहत की बात ये है कि 13 मरीजों में से 9 मरीज इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं।

– वहीं उत्तर प्रदेश में भी स्वाइन फ्लू की चिंता बढ़ गई है। इस समय लखनऊ से स्वाइन फ्लू के चलते पहली मौत सामने आई है। जिनकी मौत हुई है वो लखनऊ के इंदिरानगर की रहने वाली है हैं जो कल 27 अगस्त को अस्पताल में दम तोड़ दिया। महिला का इलाज करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों को आइसोलेट रहने की सलाह दी गई है। 

– राजस्थान में जनवरी 2026 से अब तक राज्य भर में स्वाइन फ्लू (इन्फ्लूएंजा एच1एन1) के 146 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं।

– हिमाचल प्रदेश में भी स्वाइन फ्लू के 4 नए मामले सामने आए हैं जिनमें 7 महीने और एक वर्ष का बच्चा शामिल है।

– कर्नाटक में 4,000 से अधिक मामला दर्ज किया गया है जिनमें से सबसे अधिक बेंगलुरु का मामला है। 

स्वाइन फ्लू क्या है? 

स्वाइन फ्लू एक तरह का वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से सांस से जुड़ी हुई बीमारी ज़्यादा पैदा करता है। ये वायरस की पहचान सबसे पहले इन्फ्लूएंजा ए वायरस के H1N1 स्ट्रेन से होता है। इसका नाम स्वाइन फ्लू इस कारण से पड़ा क्योंकि इस वायरस की पहचान सबसे पहले सूवरों में हुई थी। बाद में ये इंसानों में भी फैलने लगा और अब इसका संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक उसी तरह पहुंच सकता है जैसे कोई सामान्य मौसमी फ्लू फैलता है। 

स्वाइन फ्लू फैलता कैसे है?

स्वाइन फ्लू का वायरस किसी स्वाइन फ्लू संक्रमित व्यक्ति खाँसने, छिकने या बात करने के दौरान बाहर निकलने वाली सांस की छोटी बूँदों के ज़रिए फैल सकता है। अगर ये बूँदे आसपास मौजूद किसी व्यक्ति की सांस की साथ शरीर में चली जाए तो ये बीमारी फैलने की संभावना होती है। भीड़-भाड़ या बंद जगहों पर इसका बढ़ने का ज़्यादा संभावना हो जाता है। दरवाजे का हैंडल, मोबाइल फोन, मेज या दूसरी साझा की जाने वाली वस्तुएं। इन चीजों को छूने के बाद अगर कोई व्यक्ति बिना हाथ साफ किए अपनी आंख, नाक या मुंह छूता है तो वायरस शरीर के अंदर पहुंच सकता है। जिसे स्वाइन फ्लू है और उससे हाथ मिलाने या एक-दूसरे के बहुत करीब रहने जैसी स्थितियों में वायरस फैलने की संभावना रहती है। 

स्वाइन फ्लू कितना ख़तरनाक होता है? 

स्वाइन फ्लू में आम तौर पर बहुत कम ही जान जाने की स्थिति होती है। उपलब्ध आकलनों में इसकी फेटेलिटी रेट करीब 0.01% से 0.1% के बीच बताई जाती है। इसका मतलब ये नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए इसका खतरा एक जैसा है। 

छोटे बच्चों, बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में वायरस ज़्यादा ख़तरनाक रूप ले सकता है। ख़ासकर मधुमेह (शुगर) हृदय या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी वाले लोगों में स्वाइन फ्लू के कारण निमोनिया जैसे बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। 

स्वाइन फ्लू का लक्षण क्या है 

– तेज बुखार और ठंड लगना

– सर्दी और बुखार 

– लगातार खांसी और गले में खराश

– शरीर और सिर में तेज दर्द

– अत्यधिक थकान और कमजोरी

– कुछ मामलों में उल्टी और दस्त

इसलिए तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या लगातार बिगड़ते हुए दिखाई देने पर इसे सामान्य फ्लू समझकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

स्वाइन फ्लू से बचने के लिए क्या करें 

– हाथों का नियमित सफाई करें। हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं, साफ करे। 

– हाथों को बिना धोए या सैनिटाइज किए चहरे, नाक, मुंह आँख को न छुए। 

– बाहर भी-भाड़ वाले जगहों में जाने से पहले मास्क का इस्तेमाल जरुर से करें। 

– फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों के संपर्क में आने से बचें। 

– खाने-पीने में ध्यान दें, विटामिन-सी युक्त फल, हरी सब्जियां, पर्याप्त पानी पिए और पौष्टिक आहार वाला भोजन का सेवन करें। 

– डॉक्टर के सलाह पर हर साल मौसमी फ्लू का टिका भी लगवा सकते हैं। 

– इसी के साथ ही घर में जरुरी डिवाइस में से एक थर्मामीटर जरुर रखें। इसके मदद से परिवार में से किसी का भी बुखार नाम सकते हैं। अगर बुखार है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ। 

– पल्स ऑक्सीमीटर के मदद से शरीर में ऑक्सीजन लेवल का पता लगाया जा सकता है। 

स्वाइन फ्लू कैसे और कब आया? 

स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) की महामारी की शुरुआत सबसे पहले अप्रैल 2009 में मैक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका (कैलिफोर्निया) में हुई थी। ये वायरस इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) का एक नया स्ट्रेन था जो आनुवंशिक रूप से सूअर, पक्षी और इंसानों के वायरस के मिलने (म्यूटेशन/रीसॉर्टमेंट) से बना था। ये आम फ्लू की तरह ही संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या हवा में मौजूद बूंदों के जरिए एक से दूसरे इंसान में तेजी से फैला। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जून 2009 में इसे वैश्विक महामारी घोषित किया था।

इसके बाद भारत में स्वाइन फ्लू का पहला मामला 16 मई 2009 को हैदराबाद में सामने आया था।ये  विदेश से यात्रा करके आए लोगों के जरिए देश में आया और फिर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात और दिल्ली सहित कई राज्यों में फैल गया। साल 2009-2010 के दौरान इसके बड़े पैमाने पर मामले दर्ज किए गए हैं। 

 

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