खबर लहरिया Blog MP: 42 डिग्री की गर्मी में तड़पते पक्षी, पेड़ों पर मिट्टी के सकोरे टांगकर किया पानी का व्यवस्था 

MP: 42 डिग्री की गर्मी में तड़पते पक्षी, पेड़ों पर मिट्टी के सकोरे टांगकर किया पानी का व्यवस्था 

मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और दिन के साथ-साथ रातें भी अब राहत नहीं दे रही हैं।इस तेज गर्मी का असर इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पक्षियों पर भी पड़ रहा है। जहां एक तरफ लोग घरों में कूलर-पंखे या एसी का सहारा ले लेते हैं वहीं पक्षियों के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं होता।

रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – रचना 

41 डिग्री (फोटो साभार: गूगल)

भीषण गर्मी ने अब अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और दिन के साथ-साथ रातें भी अब राहत नहीं दे रही हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस बार पहली बार ‘वॉर्म नाइट’ यानी गर्म रातों और लू दोनों की एक साथ चेतावनी जारी की है। इसका मतलब है कि लोगों को दिन ही नहीं रात में भी गर्मी से जूझना पड़ेगा।              

इस तेज गर्मी का असर इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पक्षियों पर भी पड़ रहा है। जहां एक तरफ लोग घरों में कूलर-पंखे या एसी का सहारा ले लेते हैं वहीं पक्षियों के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं होता। पानी और छांव की कमी उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती है। इसी लिए मध्य प्रदेश की छतरपुर पुलिस द्वारा चिड़ियों के लिए पानी रखने की मुहिम शुरू की गई है।                      

पक्षियों के लिए पानी का व्यवस्था (फोटो साभार: अलीमा)

अगर पहले की बात करें तो हालात कुछ अलग थे। गांवों और शहरों में पेड़-पौधे ज्यादा हुआ करते थे तालाब और नदियां भरी रहती थीं। चिड़ियों को पानी के लिए ज्यादा भटकना नहीं पड़ता था। कहीं भी छोटे गड्ढों या जलस्रोतों में उन्हें पानी मिल जाता था। उस समय प्रकृति संतुलित थी और पक्षियों को इंसानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था।

लेकिन अब हालात बदल गए हैं। पेड़ों की कमी, सूखते जलस्रोत और बढ़ती गर्मी ने पक्षियों के लिए जीवन मुश्किल कर दिया है। इसी के साथ आज के समय में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। न पहले जैसे घने पेड़ बचे हैं न ही तालाब-नदियों जैसे जल स्रोत। शहर तेजी से बढ़े हैं हरियाली कम हुई है और पानी की कमी भी साफ नजर आती है। ऐसे में चिड़ियों को पानी की तलाश में दूर-दूर तक उड़ना पड़ता है जो इस भीषण गर्मी में उनके लिए और भी मुश्किल हो जाता है। अगर पुराने समय को याद करें तो सुबह होते ही चिड़ियों की चहचहाहट से माहौल गूंज उठता था। गांवों में लगभग हर घर के पास नीम, पीपल, बरगद या आम का पेड़ होता था जहां पक्षियों को छांव और आराम मिल जाता था। आसपास खेतों या गड्ढों में जमा पानी भी आसानी से मिल जाता था जिससे उन्हें प्यास की चिंता नहीं रहती थी। लेकिन अब वो नजारा बहुत कम देखने को मिलता है।

इसी बदलते माहौल के बीच एक अच्छी पहल शुरू हुई है जो इंसानियत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का उदाहरण पेश करती है। 21 अप्रैल 2026 को छतरपुर पुलिस ने चिड़ियों के लिए पानी रखने की मुहिम शुरू की गई है। शुरुआत पुलिस परिसर से की गई है और इसे जिले के सभी थानों तक बढ़ाने की योजना है। इस पहल के तहत जिले के एसपी अगम जैन ने परिसर के पेड़ों पर 20 से 25 मिट्टी के सकोरे टांगकर उनमें पानी भरवाया ताकि प्यास से परेशान पक्षियों को आसानी से राहत मिल सके। साथ ही उनके लिए दाने की भी व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें खाने की कमी न हो।               

इस काम की जिम्मेदारी एसपी कार्यालय में तैनात गार्ड गजेंद्र अनुरागी को दी गई है जो सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक इन सकोरों में पानी भरने और देखभाल का काम कर रहे हैं। यह छोटी सी पहल दिखाती है कि अगर हर कोई थोड़ा-सा ध्यान दे तो इस गर्मी में बेजुबान पक्षियों की मदद की जा सकती है।

जिला एसपी अगम जैन ने बताया कि – 

जैसे इंसानों के लिए गर्मी में पानी जरूरी होता है वैसे ही पक्षियों के लिए भी पानी और दाना उतना ही जरूरी है। इसी सोच के साथ यह पहल शुरू की गई है ताकि तेज गर्मी में चिड़ियों को थोड़ी राहत मिल सके। उन्होंने बताया कि पहले के समय में आसमान में बड़ी संख्या में पक्षी दिखाई देते थे। शाम होते ही उनके झुंड घर लौटते नजर आते थे लेकिन अब ऐसे दृश्य कम हो गए हैं। इसके पीछे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती गर्मी को माना जा रहा है।  

एसपी अगम जैन (फोटो साभार: अलीमा)                                  

एसपी ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घर की छत या आंगन में एक बर्तन में पानी और एक में दाना जरूर रखें। क्योंकि ये बेजुबान पक्षी अपनी परेशानी नहीं बता सकते ऐसे में हमारी छोटी-सी कोशिश भी उनके लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है। 

 

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