खबर लहरिया क्राइम लखनऊ: एसिड अटैक की शिकार हुई महिलाएं आज बन गई हैं आत्मबल की पहचान

लखनऊ: एसिड अटैक की शिकार हुई महिलाएं आज बन गई हैं आत्मबल की पहचान

आपने समाज में महिलाओं पर हिंसा के अनेकों रूप देखें होंगे ,जिसमें महिलाओं की हत्या भी कर दी जाती है और कई बार तो आग लगा कर जान से मार दिया जाता है या उन्हें फांसी लगाने पर मजबूर कर दिया जाता है। इसके साथ ही यौन हिंसा एवं शारारिक उत्पीड़न के और भी बहुत तरीक़े हैं ,जिससे महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है व जान से मार दिया जाता है।

उन्हीं में एक सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली घटना होती है एसिड अटैक की जिसमें जिन लड़कियों ,महिलाओं पर एसिड अटैक किया जाता है वो बच तो जाती हैं , लेकिन उनकी पहचान बाकी नहीं रहती। उनकी दुनिया ही बदल जाती है ,उनसे कोई बात करना पसंद नहीं करता वो अपनी पहचान छिपा कर चलती हैं, अपना चेहरा ढक कर चलती हैं। जैसे ऐसिड अटैक का शिकार होना उनकी खुद की गलती है , समाज उन्हें गंदी नज़रों से देखता है जैसे उन्होंने बहुत बड़ी गलती की हो।

NCRB की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 से 2018 के बीच भारत में 1,483 लोग एसिड अटैक के शिकार हुए हैं । 2014 से 2018 तक एसिड हमलों के सबसे ज़्यादा मामले उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में देखने को मिले हैं। 2019 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,05,861 मामले दर्ज किए गए, जो कि 2018 की तुलना में 7.3% ज़्यादा थे।

आईपीसी के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराध के अधिकांश मामले ‘पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता’ के 30.9% मामले दर्ज किए गए। ‘महिलाओं का शील भंग करने के इरादे से हमले’ के 21.8% मामले, ‘अपहरण’ के 17.9% मामले और ‘बलात्कार’ 7.9% मामले दर्ज किए गए।

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हाल ही में हम पहुंचे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जहाँ हमने मुलाक़ात करी कुछ ऐसी महिलाओं से जो एसिड अटैक की शिकार हुई थीं। एसिड अटैक सर्वाइवर ये महिलाएं आज लखनऊ के गोमती नगर में स्थित शिरोज़ कैफ़े में काम कर रही हैं, और देश की महिलाओं के लिए आत्मबल और दृणसंकल्प की मिसाल बन चुकी हैं। इन सभी महिलाओं ने अपने जीवन में काफी कुछ देखा और शारीरिक हिंसा एवं समाज की प्रताड़ना की शिकार हुईं। लेकिन उसके बावजूद सब कुछ भुलाकर आज ये महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं।

हमें यकीन है कि इतना कुछ सहने के बाद भी ये महिलाएं आगे भी अपने सपनों की उड़ान भरती रहेंगी और यूं ही सबका दिल जीतती रहेंगी।

Photo credits: https://feminisminindia.com/2020/02/20/new-stock-images-rape/

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