द हिंदू के रिपोर्ट अनुसार नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने एक ताज़ा रिपोर्ट जारी किया जिसमें 2024 में देश में हुए अपराधों का ब्योरा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में समग्र अपराध दर 2023 की तुलना में 2024 में कम हुई लेकिन साइबर अपराध के मामलों में 17% से अधिक की वृद्धि हुई।
2024 में साइबर अपराधों के तहत कुल 1,01,928 मामले दर्ज किए गए जबकि 2023 में ऐसे 86,420 मामले दर्ज किए गए थे।
– साल 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक 2024 में ऐसे 13,396 मामले सामने आए जबकि 2023 में यह संख्या 13,366 थी। यानी मामलों में बहुत बड़ा अंतर नहीं है लेकिन यह बताता है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता अब भी बनी हुई है।
– बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के मामलों में मध्य प्रदेश लगातार दूसरे साल भी सबसे आगे बना हुआ है। साल 2024 में राज्य में ऐसे 5,875 मामले दर्ज किए गए जबकि 2023 में यह आंकड़ा 5,738 था। महाराष्ट्र में 2024 में 4,918 मामले सामने आए जो पिछले साल के 5,115 मामलों से थोड़े कम हैं।
वहीं कर्नाटक में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के मामलों में बड़ा उछाल देखा गया। यहां 2023 में 1,840 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 4,247 हो गए। इसके अलावा तेलंगाना में भी मामले बढ़े हैं जहां 2023 के 2,150 मामलों के मुकाबले 2024 में 2,907 मामले दर्ज किए गए। जबकि तमिलनाडु में कुछ राहत देखने को मिली है और यहां मामलों की संख्या 2,104 से घटकर 1,898 रह गई।
– रिपोर्ट के मुताबिक देश में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2024 में ऐसे कुल 1,87,702 मामले सामने आए जबकि 2023 में यह आंकड़ा 1,77,335 था। यानी एक साल में करीब 5.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश और बिहार में मामलों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। उत्तर प्रदेश में 2023 के 18,852 मामलों के मुकाबले 2024 में यह संख्या बढ़कर 22,222 हो गई। वहीं बिहार में 9,903 से बढ़कर 13,349 मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र में भी अपराध बढ़े हैं जहां 22,390 से बढ़कर 24,171 मामले सामने आए। जबकि मध्य प्रदेश में मामूली गिरावट दर्ज हुई और आंकड़ा 22,393 से घटकर 21,908 पर आ गया। तमिलनाडु में भी मामलों में बड़ा इजाफा हुआ है जहां 6,968 से बढ़कर 10,046 मामले दर्ज किए गए।
– रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में सामने आए साइबर अपराध के ज्यादातर मामले लोगों को ठगने और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े थे। कुल दर्ज मामलों में करीब 72 फीसदी यानी 73,987 केस फ्रॉड के मकसद से दर्ज किए गए। इसके अलावा यौन शोषण से जुड़े 3,190 मामले सामने आए जबकि 2,536 मामले जबरन वसूली यानी ब्लैकमेलिंग और धमकी देकर पैसे मांगने से जुड़े थे। ये आंकड़े दिखाते हैं कि साइबर अपराध अब सिर्फ हैकिंग तक सीमित नहीं है बल्कि अलग-अलग रूपों में लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
– रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में केस दर्ज किए गए। पीओसीएसओ कानून के तहत कुल 69,191 मामले सामने आए जो बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों की तस्वीर दिखाते हैं। इन मामलों में अपहरण और लड़कियों को जबरन शादी के लिए दबाव बनाने जैसे 13,192 केस दर्ज किए गए। वहीं भ्रूण हत्या के 141 और शिशु हत्या के 56 मामले भी सामने आए। इसके अलावा दलाली और तस्करी से जुड़े मामलों में 1,661 लड़कियां और 12 लड़के दर्ज किए गए। रिपोर्ट यह भी बताती है कि साल 2024 में अपहरण और अगवा करने के कुल 70,370 मामले दर्ज हुए जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के खिलाफ अपराध
नई रिपोर्ट के मुताबिक देश में अनुसूचित जाति यानी एससी समुदाय के खिलाफ होने वाले अपराधों में हल्की कमी दर्शा रही है। साल 2024 में ऐसे कुल 55,698 मामले दर्ज किए गए जबकि 2023 में यह संख्या 57,789 थी। यानी पिछले साल के मुकाबले करीब 3.6 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। वहीं अनुसूचित जनजाति यानी एसटी समुदाय के खिलाफ रिपोर्ट के अनुसार 2024 में एसटी समुदाय से जुड़े 9,966 मामले दर्ज हुए जबकि 2023 में यह आंकड़ा 12,960 था। इस तरह मामलों में करीब 23 फीसदी की कमी आई है।
आत्महत्या से संबंधित रिपोर्ट
इसके साथ ही एनसीआरबी ने भारत में आकस्मिक मौत और आत्महत्या से जुड़ी एडीएसआई 2024 रिपोर्ट भी जारी की है। रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में देशभर में 1 लाख 70 हजार 746 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें सबसे ज्यादा संख्या खेती-किसानी से जुड़े लोगों, बेरोजगार युवाओं और दिहाड़ी मजदूरी करने वालों की रही। रिपोर्ट से यह भी साफ होता है कि आर्थिक और सामाजिक दबाव अब भी बड़ी चिंता बने हुए हैं।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में खेती और कृषि से जुड़े लोगों में आत्महत्या के मामले चिंता बढ़ाने वाले रहे। पूरे साल में कुल 10,546 लोगों ने आत्महत्या की जिनका संबंध कृषि क्षेत्र से था। इनमें 4,633 किसान और खेती करने वाले लोग शामिल थे जबकि 5,913 कृषि मजदूर थे। ये आंकड़ा देश में हुई कुल आत्महत्याओं का करीब 6.2 फीसदी है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि आत्महत्या करने वाले किसानों में पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा रही। कुल 4,633 किसानों में से 4,481 पुरुष थे जबकि 152 महिलाएं शामिल थीं। इसके अलावा दिहाड़ी मजदूरों में भी आत्महत्या के मामले काफी ज्यादा दर्ज किए गए। देश में हुई कुल आत्महत्याओं में करीब 31 फीसदी हिस्सेदारी दिहाड़ी मजदूरों की रही। वहीं बेरोजगारी भी बड़ी वजह बनकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 14,778 बेरोजगार लोगों ने आत्महत्या की। इसके साथ ही 14,488 छात्रों और 22,113 गृहिणियों की आत्महत्या के मामले भी दर्ज किए गए, जो समाज के अलग-अलग वर्गों में बढ़ते मानसिक और आर्थिक दबाव की ओर इशारा करते हैं।
नशे के वजह से मौत
एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट में नशे की वजह से होने वाली मौतों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। साल 2024 में ड्रग ओवरडोज से जान गंवाने वालों की संख्या में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल जहां ऐसे 650 मामले सामने आए थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 978 तक पहुंच गया। यानी एक साल के भीतर करीब 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। राज्यों की बात करें तो इस मामले में तमिलनाडु सबसे ऊपर रहा, जहां ड्रग ओवरडोज से 313 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद पंजाब में 106, मध्य प्रदेश में 90, राजस्थान में 69 और मिजोरम में 65 लोगों की जान गई। ये आंकड़े बताते हैं कि नशे की समस्या अब कई राज्यों में गंभीर रूप लेती जा रही है और इसे रोकने के लिए मजबूत कदम उठाने की जरूरत है।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’
