उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के जैतपुर ब्लॉक के भटेवरा गांव के मजरा सेला में लगभग 90% किसान चिमड़ी की खेती करते हैं। फरवरी में बुवाई और मई-जून में तैयार होने वाली इस फसल से किसानों को उम्मीद तो होती है, लेकिन सही दाम नहीं मिल पाता। किसानों का कहना है कि मेहनत, दवा, पानी, जुताई और मजदूरी सब जोड़ने के बाद भी लागत नहीं निकलती। मजबूरी में खराब होने से बचाने के लिए फसल औने-पौने दाम में बेचनी पड़ती है।
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