पटना से महज कुछ दूरी पर एक ऐसा गांव है, जहां बाढ़ का पानी आते ही जिंदगी की रफ्तार थम जाती है। तीन दिन से पानी में घिरे इस गांव के लोगों के लिए नाव सिर्फ सफर का साधन नहीं… बल्कि स्कूल, बाजार, काम और अस्पताल तक पहुंचने का एकमात्र सहारा बन गई है। पटना जिले के मनेर ब्लॉक के इस्लामगंज गांव में 3 दिन से बाढ़ का पानी भरा है, जिससे गांव का सड़क संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल करीब 3 से 4 महीने तक उन्हें इसी तरह पानी और नाव के सहारे रहना पड़ता है। गाँव की आबादी 5 हजार से अधिक है, जबकि यहाँ 1,300 से ज्यादा मतदाता हैं। गाँव में मुख्य रूप से मलहा समाज के लोग रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या से जूझते हुए चार से पांच पीढ़ियां बीत चुकी हैं, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीण लंबे समय से गांव में पुल और सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को स्कूल जाने, मजदूरी पर जाने, बाजार पहुंचने और आपात स्थिति में अस्पताल जाने तक के लिए नाव पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर ब्लॉक, मुखिया, विधायक, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हुआ। ग्राम पंचायत के मुखिया लोकेश कुमार ने बताया कि पंचायत के बजट से पुल बनाना संभव नहीं है। उन्होंने विधायक से भी इस मुद्दे को उठाने की बात कही। ग्रामीणों के अनुसार करीब 17 करोड़ रुपये के बजट की बात सामने आई थी, लेकिन जमीन पर पुल कब बनेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी अब तक नहीं है।
ये भी देखें –
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’