खबर लहरिया Hindi Ganga Expressway, Kanpur-Lucknow Expressway: करोड़ों की सड़क और पुल धंसा, उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे और इंदौर में सड़क के नीचे पाइपलाइन फटी, निर्माण पर उठे सवाल

Ganga Expressway, Kanpur-Lucknow Expressway: करोड़ों की सड़क और पुल धंसा, उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे और इंदौर में सड़क के नीचे पाइपलाइन फटी, निर्माण पर उठे सवाल

देश में बड़े-बड़े एक्सप्रेस-वे, पुल और स्मार्ट सिटी की सड़कें विकास की तस्वीर के रूप में पेश की जाती हैं। इन परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये का सार्वजनिक पैसा खर्च होता है। लेकिन जब कोई नई सड़क बारिश के बाद धंसने लगे, एक्सप्रेसवे का हिस्सा बह जाए या नई सड़क के नीचे बिछी पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान सड़क की सतह टूट जाए, तो सवाल सिर्फ सड़क की मरम्मत का नहीं रहता। सवाल यह भी उठता है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी कितनी गंभीरता से हुई और जनता के पैसे का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ?

यूपी और एमपी से कई तस्वीर सामने आई जिसमें एक्सप्रेस-वे धंसने और सड़क लीकेज शामिल है। ये तस्वीर कहीं न कहीं ये भी साबित करती है कि किस तरह से करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद भी एक मजबूत ढांचा तैयार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि वह कुछ महीनों बाद ही सड़क निर्माण, पुल निर्माण में टूटने, दरारे और धंसने की ख़बरें सामने आने लगती है। सरकार बड़ी बड़ी बाते करती है मंच से कि यह निर्माण जनता की सुविधा के लिए है उनका सफर आसान बनाने के लिए है लेकिन जब अचानक कोई हादसा होता है तो जनता ही इसकी चपेट में आती है। सोशल मीडिया और ख़बरों में आई घटनाओं के बारे में नीचे विस्तार से जानेंगे।

उद्घाटन के कुछ महीनों बाद गंगा एक्सप्रेस-वे में हुआ गड्डा

पिछले 2-3 दिनों से यूपी के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है। इसी बीच सोशल मीडिया पर गंगा एक्सप्रेस-वे के धंसने का वीडियो सामने आया। वीडियो में मेरठ-प्रयागराज पर 421 किलोमीटर के पास नुकसान की खबर मिली है, जहां सड़क का एक हिस्सा और आस-पास का तटबंध बह गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 10 मीटर गहरा गड्ढा हो गया है जो वीडियो में देखा जा सकता है।

इस एक्सप्रेस-वे को करीब 36,000 करोड़ रुपये की लगात से बनाया गया था और 29 अप्रैल को इसका पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। यह एक्सप्रेस-वे 594 km लंबा , छह लेन वाला, एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और 12 जिलों से होकर गुज़रता है। इसे मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय लगभग 12 घंटे से घटाकर लगभग छह घंटे करने के लिए बनाया गया था। लेकिन बरसात ने इसके निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए हैं इतने करोड़ की लगात से बना आखिर चंद महीनों में कैसे धंस गया?

समाजवादी पार्टी ने भ्रष्टाचार का लगाया आरोप

समाजवादी पार्टी ने एक्सप्रेस-वे की क्वालिटी और रखरखाव पर सवाल उठाते हुए X पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा “बीजेपी सरकार के दौर में बने एक्सप्रेसवे और रिंग रोड की हालत तो देखिए! उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे की मिट्टी धंस गई है। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बने एक पुल के जोड़ों में दरारें आ गई हैं। मुरादाबाद में 655 करोड़ रुपये की लागत वाली रिंग रोड तो निर्माण शुरू होने से पहले ही धंस गई। मुख्यमंत्री अजय बिष्ट जी, यह भ्रष्टाचार आखिर कब रुकेगा?”

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे में दरार

इससे पहले सोशल मीडिया पर कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में पुल में कई दरारें देखी गई। बाद में इसकी मरम्मत की गई और इसे सूखाने के लिए पंखे भी लगाए गए।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार नेशनल हाइवे अथाॅरिटी ऑफ इंडिया एनएचएआई की ओर से चार हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत से लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस-वे तैयार करवाया गया था। इसका उद्घाटन भी इसी साल 13 जुलाई 2026 को हुआ। लेकिन महज बीस दिन में एक्सप्रेस-वे का घटिया निर्माण उजागर होने लगा। एक के बाद एक्सप्रेस-वे पर सड़क धंसने की शिकायतें सामने आने लगीं।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर सड़क धंसने की शिकायतों के बाद आईआईटी खड़गपुर की टीम ने जो तकनीकी जांच की, उसकी रिपोर्ट तैयार हो गई है। रिपोर्ट में ड्रेनेज, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, मिट्टी की पटाई में लापरवाही को उजागर किया गया है।

एमपी के इंदौर में सड़क के नीचे फटी पाइप लाइन

मध्य प्रदेश के इंदौर में सोमवार 17 अगस्त को इंदौर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बन रही सड़क के नीचे टेस्टिंग के दौरान पानी की पाइपलाइन फट गई। बताया जा रहा है कि यह घटना गोराकुंड इलाके में हुई, जो गोराकुंड स्क्वायर से करीब 20 मीटर दूर है। अधिकारियों ने नई बिछाई गई लाइनों को जोड़ने के बाद पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग शुरू की थी, तभी अचानक पाइपलाइन फट गई। सड़क के नीचे से पानी निकलने लगा और पूरी सतह पर फैल गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि सड़क बनाने में करीब 40 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2021 में इसके नीचे पानी की पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन इसकी टेस्टिंग कथित तौर पर करीब पांच साल से पेंडिंग थी

इंदौर नगर निगम के पब्लिक वर्क्स इंचार्ज राजेंद्र राठौर ने कहा कि यह सड़क कई साल पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई थी। राठौर ने कहा, “टेस्टिंग के दौरान पाइपलाइन टूट गई, जिससे सड़क पर पानी जमा हो गया। अगर जांच में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी।”

भले ही यह तस्वीर एमपी और यूपी की हो लेकिन सभी में एक ही सवाल है वो है निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही का। करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होने वाली परियोजनाओं में सड़क की मजबूती केवल ऊपर की सतह से तय नहीं होती, बल्कि मिट्टी की जांच और उसकी सही पटाई, पर्याप्त कम्पैक्शन, पानी की निकासी, ड्रेनेज, पाइपलाइन और दूसरी मजबूत साम्रगी के साथ बेहतर समन्वय तथा निर्माण के हर चरण की स्वतंत्र गुणवत्ता जांच बेहद जरूरी होती है। अगर किसी परियोजना में शुरुआती बारिश, पानी के दबाव या सामान्य टेस्टिंग के दौरान ही खामियां सामने आने लगें तो यह संकेत है कि निर्माण से पहले और निर्माण के दौरान जोखिमों का पर्याप्त आकलन और निगरानी नहीं हुई।
सवाल यह भी है कि क्या सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी सिर्फ परियोजना पूरी कराकर उद्घाटन करने तक सीमित है? क्या जब यह निर्माण कार्य हो रहा हो तो इसकी निगरानी की जवाबदेही किसकी है। जनता से लिए गए पैसे से करोड़ रुपए की आड़ में इतना सस्ता माल लगाकर तैयार कर देना जिसका परिणाम जनता को ही भुगतान पड़ेगा।

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